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20150420

संगीत व पीरियड फिल्में


 अनुराग कश्यप की नयी फिल्म बांबे वेल्वेट का नया गीत आज ही लांच किया गया है. इस गाने में अनुष्का सिंगर के रूप में नजर आ रही हैं. रणबीर कपूर उनके दीवाने नजर आ रहे हैं. फिल्म का गीत आपको 60 की याद दिलायेगा. हिंदी फिल्मों में कैब्रे की अहम भूमिका रही है. कई फिल्मों में विशेष रूप से कैब्रे गीतों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. 60 की दशक को दर्शाने के लिए संगीत का यह इस्तेमाल सबसे आसान तरीका है. चूंकि संगीत से दौर को स्थापित करना आसान और सार्थक नजर आता है. गौरतलब है कि बांबे वेल्वेट में अनुष्का शर्मा ने भी अपनी आवाज में दो गीत गाये थे. लेकिन फिल्म की लंबाई को देखते हुए उन गीतों को हटा दिया गया है. रवीना टंडन के भी गीत हटाये गये हैं. यों भी अनुराग लंबी फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने विदेश से एडिटिंग की टीम बुलाई है और उन्होंने गीतों को कम तवज्जो दी है. यों भी अनुराग विदेशी फिल्मों व तकनीक व कहानियों से प्रेरित रहते हैं.अब चूंकि उन्होंने संपादन का दारोमदार ही लोकप्रिय विदेशी एडिटर को दिया है तो वे निश्चित तौर पर सबसे पहले संगीत की लंबाई पर कैंची चलाई है. चूंकि विदेशों में संगीत व नाच गाने की गुंजाईश फिल्मों में कम नजर आती है. और विदेशों में अधिकतर फिल्मी जानकारों को हिंदी फिल्मों के संगीत से परेशानी है. हालांकि अनुराग ने फिल्म की शूटिंग श्रीलंका में की है और उनकी कोशिश है कि वे पीरियड दिखाने में कामयाब होंगे. लेकिन  ऐसी फिल्मों को स्थापित करने के लिए गीत संगीत आवश्यक हैं. चूंकि इससे उनके पास समय व स्रोत दोनों की कमी का निदान निकल आता है. दर्शकों के कानों तक जैसे ही गीत पहुंचते हैं. वह जिस दौर से भी संबंधित हों. दर्शक अनुमान भी लगा लेते हैं और उनका विश्वास भी बढ़ता जाता है. हालांकि अंतिम निर्णय निर्देशक का ही होता है.

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