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20150420

रिपोर्टर से रिपोटर्स तक


 जल्द ही रिपोर्ट्स नामक धारावाहिक की शुरुआत हो रही है. इस धारावाहिक से राजीव खंडेलवाल अपनी वापसी भी कर रहे हैं छोटे परदे पर. फिलवक्त शो के प्रोमो दिखाये जा रहे हैं, जिसमें  राजीव अपनी नायिका को समझाते हैं कि खबरें कैसे बनती है. वह अभिनेत्री की चुंबन लेते हैं और फिर जब अभिनेत्री उन्हें थप्पड़ जड़ती हैं तो वे दर्शाते हैं कि कुछ ऐसा ही जवाब होना चाहिए लड़कियों का. रिपोर्ट्स की रूप और रंगत ग्लैमर से लबरेज नजर आ रही है. जब तक शो का प्रसारण शुरू नहीं होता. यह अनुमान लगा पाना कठिन है कि शो का मिजाज क्या होगा. लेकिन जो संकेत मिल रहे हैं उससे स्पष्ट है कि मीडिया ने अपने तेवर किस तरह बदले हैं. शो में वह स्पष्ट रूप से नजर आयेगा. कई वर्ष पूर्व शेखर सुमन रिपोर्टर नामक एक धारावाहिक लेकर आते थे. उस दौर में वे अधिकतर क्राइम रिपोर्टिंग से संबंधित खबरों को दर्शाते थे. और खोजी पत्रकारिता किसे कहते हैं. उस शो में देख कर मोटे तौर पर अनुमान लगाया जा सकता था. उस दौर में रिपोर्टर में गंभीरता इसलिए थी कि उस दौर में पत्रकारिता भी सिर्फ गंभीरता का ही नाम था. खोजी पत्रकारिता व गंभीर पत्रकारिता को ही अहमियत दी जाती थी. लेकिन अब दौर बदल चुका है. मीडिया के भी कलेवर तेवर बदल चुके हैं. खबरें अब बनाई जाती हैं. यह दौर सोशल मीडिया का भी है. हालांकि हाल ही में पत्रकारिता में एक विशिष्ट स्थान रखनेवाली शख्सियत का मानना है कि सोशल मीडिया पर हर दिन नये लोग लिखते हैं और वह स्तरीय नहीं लिखते. वे मीडिया के लायक नहीं. लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सोशल मीडिया ने कई बदलाव किये हैं. ऐसे में रिपोर्टर धारावाहिक की सोच और रिपोटर्स शो की सोच तक पहुंचने में एक लंबा फासला तय हो चुका है. रंग कैसा निखरता है. यह तो आनेवाला वक्त ही बतायेगा.

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