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20131127

समर्पित दर्शक की किताब


 अविजित घोष ने 40 रिटेक नामक एक पुस्तक लिखी है. इस पुस्तक में उन्होंने उन 40 फिल्मों का वर्णन बेहद दिलचस्प तरीके से किया है, जिनके नाम तो हमने सुने हैं. लेकिन शायद हमने देखे नहीं और शायद देखें भी हो तो जिस अंदाज में अविजित हमें इन फिल्मों को दोबारा 40 रिटेक्स के माध्यम से दिखाते हैं, वह इन फिल्मों को और दिलचस्प बना देती है. अविजित की यह पुस्तक पढ़ कर इन फिल्मों को दोबारा देखना ठीक वैसा ही अनुभव है जैसे आप पहले थ्योरी का अध्ययन करें और फिर उसका प्रयोग़. अविजित अपनी पहली बात में ही इस बात को स्पष्ट कर देते हैं कि उनकी इन 40 चुनिंदा फिल्में और उनकी यह किताब सुपरसितारा विहीन है. मतलब खान के बिना. आज जहां फिल्मों की सफलता सुपरसितारों के कंधों पर है. अविजित की किताब की यही यूएसपी है कि उन्होंने वैसी फिल्मों का चुनाव किया है जो खास होकर भी लोगों तक पहुंच नहीं पायी. वे फिल्में किस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने फिल्म के लेखक, निर्देशक, कलाकारों के माध्यम से उसकी कहानी कहने की कोशिश की है. अविजित मानते हैं कि फिल्मों की बॉक्स आॅफिस सफलता फिल्म के स्तरीय होने और न होने का मानक नहीं है. मुंबई में बैठ कर सिनेमा पर ग्लॉसी किताबें लिखनेवाले लेखकों का मानना है कि मुंबई से बाहर सिनेमा पर जो किताबें लिखी जाती हैं वह पठनीय नहीं. मौलिक नहीं होती. लेकिन अविजित ने जिस तरह इमेल और टेलीफोनिक माध्यम से किताब के शोध की सारी वस्तुएं एकत्रित की हैं. यह कोई सिनेमा का जूझारू और समर्पित दर्शक ही कर सकता है. चूंकि अविजित ने किताब लिखने का जो अंदाज चुना है. वह दिलचस्प है. ऐसा लगता है कि आप किताब नहीं पढ़ रहे, बल्कि देख रहे हैं. अविजित की यह किताब एक महत्वपूर्ण किताब है, जिसे हर सिनेप्रेमियों को जरूर पढ़ना चाहिए.

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