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20131114

किरदार और बेड़ियां


 तिग्मांशु धूलिया की लंबे अरसे से चाहत है कि वह समरू पर फिल्म बनायें. लेकिन उनकी यह चाहत अब तक पूरी नहीं हो पा रही है. वजह यह है कि तिग्मांशु की यह नायिका जिस तरह के किरदार में होगी. समरू बेगम शादीशुदा होने के बावजूद बिंदास जिंदगी जीती हैं. उनके एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर होते हैं. यही वजह है कि हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियां इन किरदारों को निभाने से इनकार कर रही हैं. रानी मुखर्जी, काजोल, ऐश्वर्य राय और तब्बू से इन किरदारों के लिए बात हुई थी. अभिनेत्रियों का मानना है कि जिस तरह का किरदार बेगम का था. दर्शक शायद उस रूप में इन अभिनेत्रियों को पसद नहीं करेंगे. चूंकि इससे उनकी इमेज पर असर होगा. दरअसल, हिंदी सिनेमा की यह विडंबना है कि इस इंडस्ट्री में अब भी वास्तविक छवि का अनुमान निभाये गये किरदार से लगा लिया जाता है. हमें लगता है कि जो किरदार निभाये गये हों, वास्तविकता में वह व्यक्ति उतना ही अच्छा हो या उतना ही बुरा. किकु उर्फ पलक जो इन दिनों काफी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. उनकी पत् नी ने हाल ही में स्टार प्लस के एक वीडियो में बताया है कि उनके पति घर पर अधिक वक्त नहीं देते. साफ जाहिर होता है कि किकु दुनिया के लोगों का मनोरंजन कर रहे. लेकिन अपनी पत् नी का ही नहीं. लेकिन हम उन्हें उसी रूप में स्वीकारना चाहते.जिस रूप में हमने उन्हें परदे पर देखा है. लेकिन एक नजरिया यह भी है कि विद्या बालन ने सिल्क की जो भूमिका निभायी. वे उस किरदार में बंध कर नहीं रहीं. फिर भी रानी मुखर्जी जैसी प्रभावशाली अभिनेत्री को इस बात का डर क्यों हैं. रानी चाहें तो वह इस फिल्म से असल रूप में वापसी कर सकती हैं. फिर भी उन्होंने ये बेड़ियां क्यों लगा रखी है. क्या वाकई 100 साल के हिंदी सिनेमा में महिलाओं को लेकर नजरिये में बदलाव हुआ है. यह सवाल मन में जरूर आता है.

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