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20131127

लव कल आजकल


इन दिनों अभिजीत घोष की किताब 40 रिटेक्स पढ़ रही हूं. इस किताब में फिल्म तीन देवियां की चर्चा है. फिल्म के बारे में किताब में पढ़ने के ज्यादा दिलचस्पी हुई और यूटयूब पर दोबारा यह फिल्म देखी. इस फिल्म की कुछ खासियत है, जो शायद पहली बार मैंने देखी थी. तब उन बातों पर गौर नहीं किया था. शायद रविवार को  शाम 4 बजे दूरदर्शन पर प्रसारित होनेवाली फिल्मों में तीन देवियां भी थी. जब इसे पहली बार देखा था. फिल्म में जितने भी किरदार हैं. उन सारे किरदारों का नाम उनके वास्तविक नामों पर है. देव आनंद देव दत्त का किरदार निभा रहे हैं. कल्पना कल्पना नाम के किरदार में हैं. सिम्मी गेरेवाल सिम्मी हैं और नंदा नंदा है. यहां तक की आइएस जौहर भी इसी नाम के किरदार में हैं. फिल्म की शुरुआत में मनचले लड़कों की फितरत पर कुछ दृश्य हैं. उस दौर में देव आनंद उसी अंदाज में हैं. जो आज के दौर में रणबीर कपूर हैं. जी हां, रणबीर कपूर की फिल्म बचना ऐ हसीनों देखें और तीन देवियां तो उनमें कई समानताएं नजर आयेंगी. तीन देवियां में भले ही देव आनंद शुरुआत से  ही नंदा के प्रति वफादार थे. लेकिन वे कल्पना और सिम्मी के साथ भी दोस्ताना व्यवहार रखते थे. फिल्म बचना ऐ हसीनो में भी रणबीर कपूर लड़कियों से फ्लर्ट करने में उस्ताद रहते हैं. दरअसल, हिंदी फिल्मों में नौजवान युवाओं की कहानी में कई बार इन पहलुओं को दर्शाते देखा गया है. उस दौर में भी  चीजें वही थीं. जो आज हैं. स्पष्ट है कि लड़के तो केवल अपनी खुशी के लिए लड़कियों के करीब जाते हैं लेकिन बाद में लड़कियां इस कदर प्यार में पड़ जाती हैं कि उनसे दूर नहीं हो पाती. फिल्म लव आजकल में प्यार की इस फितरत को दर्शाने की कोशिश की जाती रही है. हर दौर में ऐसी कहानियां बनी हैं और बनती रहेंगी. शायद प्यार को देखने का यह नजरिया कभी नहीं बदला.

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