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20130322

शिक्षा-ग्लैमर के बीच की खाई


काजोल, ऐश्वर्य राय बच्चन व सचिन तेंदुलकर जैसी कई सुप्रसिद्ध हस्तियां एक साथ एक मुहिम कर रहे हैं. वे सभी एक टीवी चैनल के शिक्षा पर आधारित कैंपेन के चेहरे बने हैं. इस कैंपेन के माध्यम से महिलाओं की शिक्षा के साथ साथ हर किसी को शिक्षा मुहैया कराने की बात कही है. इसी दौरान सचिन तेंदुलकर ने बातचीत में कहा कि उन्होंने जब यह सुना कि कई बच्चियां केवल स्कूल इसलिए नहीं जा पातीं, क्योंकि स्कूल में अच्छे शौचालय नहीं तो वे दंग रह गये. सचिन ने एक निश्चित धन राशि से भी मदद की है. वही दूसरी तरफ काजोल ने स्वीकारा कि किस तरह उन्होंने अपने फिल्मी करियर को बनाने के लिए पढ़ाई को दांव पर लगा दिया. और स्कूल के बाद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और उन्हें इस बात का आज अफसोस होता है. काजोल वह पहली अभिनेत्री नहीं, जिन्होंने अभिनय के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ी हो. दरअसल, ग्लैमर की दुनिया में आने के लिए आपको किसी एजुकेशनल सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती. यहां आपकी उम्र, आपका हुस्र और आपकी अभिनय क्षमता आपको स्टार बनाती है. यही वजह है कि कई एक्टर व एक्ट्रेस अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ कर ग्लैमर के मोह में लीन हो जाते हैं. खासतौर से अभिनेत्रियां कम उम्र में ही यह क्षेत्र चुन लेती हैं और फिर पढ़ाई उनके लिए प्राथमिकता नहीं रहतीं. दीपिका पादुकोण ने भी एक बार मुझसे बातचीत करते हुए अफसोस जताया था कि वे इस बात से हमेशा दुखी रहती हैं कि पढ़ाई अधूरी छोड़ दी. करीना कपूर समेत कई नामचीन अभिनेत्रियां इसी फेहरिस्त में शामिल हैं. करन जौहर की नयी खोज आलिया के इन दिनों काफी चर्चे हैं. आलिया अभी काफी छोटी हैं. लेकिन उनके पास लगातार फिल्मों के आॅफर हैं. निश्चित तौर पर वे भी पढ़ाई अधूरी ही छोड़ देंगी. इस मामले में कई हद तक एक्टर्स सही रास्ता चुनते हैं. वे पहले पढ़ाई पूरी करते हैं और फिर इस क्षेत्र में आते हैं. इसकी वजह यह भी है कि अभिनेत्रियो के लिए उम्र भी एक बड़ी बाधा होती है. ढलती उम्र के साथ उन्हें फिल्में नहीं मिलतीं. सो, वे जल्द से जल्द इस करियर में आ जाती हैं. हालांकि विद्या बालन ने अपनी एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिनय में कदम रखा. लेकिन वह अपवाद हैं. तो क्या वाकई इस स्थिति पर यह बात फिट बैठती है कि जहां लक्ष्मी है वहां सरस्वती नहीं...चूंकि निस्संदेह ग्लैमर की दुनिया पैसा शोहरत सबकुछ देती है( लक्ष्मी) देती है. सो, उस लोभ में विद्या ( सरस्वती) की अहमियत समझ नहीं आती.

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