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20130322

bihar diwas


वासुदेव नारायण सिंह,एमडी व को फाउंडर अलकैम लेबरोटरीज आॅफ इंडिया

मैं मानता हूं कि बिहार का भविष्य बहुत उज्जवल है, क्योंकि बिहार में जो एक सबसे अच्छी बात हुई है वह यही हुई है कि बिहार को नीतिश कुमार जैसे लीडर मिले हैं. नीतिश कुमार की टीम बहुत अच्छा काम इसलिए कर पा रही है क्योंकि उन्होंने एक टीम बना ली है और टीम के तहत वह काम कर रहे हैं. उनकी टीम सकारात्मक सोच वाली टीम है. इसमें कोई संदेह नहीं कि बिहार को पूरे भारत में जो रुतबा दोबारा दिलाया है वह वर्तमान की सरकार ने ही दिलाया है. चूंकि उन्होंने सिर्फ बातें की नहीं, बल्कि काम करके भी दिखाया है. बिहार में अब इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर किसी  भी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है. पैसे खर्च किये जा रहे हैं तो काम भी हो रहा है. दूसरी तरफ मेरा मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी विकास हुआ है. नये कॉलेज, वोकेशनल कोर्सेज भी अब शुरू हो रहा है. लेकिन सबसे अधिक अगर बिहार ने किसी चीज में तरक्की की है तो वह है एग्रीकल्चर में. मैं मान सकता हूं कि कृषि के लिहाज से बिहार का जो स्थान उसे पहले मिला था. अब फिर से उसे हासिल हो गया है. अब बिहार में हर तरह के कृषि को बढ़ावा मिल रहा है. फिर चाहे वह मखाना की खेती हो या फिर शूगरकेन की खेती. लिची की खेती में, आलू की खेती में सबसे में तेजी से वृद्धि हुई है. कृषि में तेजी से विकास हुआ है और वहां के किसानों को भी कई तरह के काम दिये जा रहे हैं सुविधाएं दी जा रही हैं. चूंकि मैं खुद एक किसान के परिवार से संबंध रखता हूं तो इस बात को अच्छी तरह समझ सकता हूं कि कृषि के विकास पर क्या क्या चीजें टिकी हैं. सो, मैं मानता हूं कि कृषि के विकास की वजह से बिहार की स्थिति बदली है. यही नहीं, बिहार के वर्तमान सड़कें भी कई बातें कह जाती हैं. अब मैं सड़क मार्ग से केवल 1 से डेढ़ घंटे में अपने घर पहुंच जाता हूं. क्योंकि सड़कों की अब मरम्मत हो गयी है. जहां पहले कच्ची और खराब सड़कें थीं. अब वहां बेहतरीन सड़के बन गयी हैं. चूंकि मैं खुद फार्मा व स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्र से जुड़ा हूं तो मैं यह जानता हूं और देख रहा हूं कि इस क्षेत्र में भी पहले की अपेक्षा काम हुए हैं. अस्पताल खुले हैं. गांवों में भी पहले से चीजें अब बदली हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बिहार को बेहतरीन राज्य माना जा रहा है. बिहार की एक और खासियत भी रही है कि यहां के लोग पूरे भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपने दम पर एक पहचान हासिल करते हैं. वे अपनी कुशलता का परिचय हमेशा देते रहते हैं. यह हमारे संस्कार में ही है. हां,बस एक बात जो और मैं कहना चाहंूगा कि अगर बिहार के विकास को हम स्थाई रूप से बरकरार रखना चाहते हैं तो यह बहूत जरूरी है कि हमारे यहां के जो पॉलिटिकल लीडर हैं वे भी थोड़ा प्रोफेशनल तरीके से काम करें. वहां इस मामले में थोड़ी लचरता है. जबकि लोग योग्य हैं. लेकिन प्रोफेशनल नहीं हो पाते.  एक जो और महत्वपूर्ण बात मैं कहना चाहूंगा कि प्राय: हमसे भी यह शिकायत होती है कि हम अपने राज्य में जाकर क्यों नहीं इंडस्ट्री की शुरुआत करते. तो, मैं कहना चाहूंगा कि ऐसा कौन नहीं चाहता. लेकिन बिहार में हमें वह सारी चीजें मिलनी चाहिए, जिससे हम अपना काम आराम से कर सकें. मैं स्पेशल पैकेज सिस्टम की बात कर रहा हूं. हालांकि बिहार सरकार इसके लिए काफी दिनों से तत्पर है. जिस तरह उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमाचल के राज्यों को यह स्पेशल पैकेज मिला है तो वहां इंडस्ट्री की पहुंच हो रही है.  अगर कुछ ऐसा ही स्पेशल पैकेज बिहार को मिले तो हमें खुशी होगी कि हम वहां के लिए कुछ कर पायेंगे. लेकिन यह सब तभी संभव है, जब वहां से भी हमें सपोर्ट मिले. बिहार के युवा एंटरप्रेनर बनें, छोटे छोटे ही सही लेकिन उद्योग लगाने की पहल करें. तो निश्चित तौर पर बिहार की तरक्की होगी. एक बात तो तय है कि बिहार के लोग काफी मेहनती होते हैं और इसलिए वे हर जगह अपनी पहचान स्थापित कर लेते हैं तो जरूरत है कि हम ऐसे युवा, ऐसी ऊर्जा को बिहार की तरक्की के लिए सकारात्मक रूप से इस्तेमाल करें. जिस तरह हम अपनी कंपनी अलकैम में बिहार के कई लोगों को रोजगार देते हैं. वैसे ही जरूरी है कि भारत के कई इलाकों में जहां भी जो लोग समर्थ हैं. उन्हें अपने राज्य के लोगों को रोजगार के अवसर देने ही चाहिए.
परिचय :
बिहार से संबंध रखनेवाले वासुदेव नारायण सिंह अपने बड़े भाई संपदा सिंह के साथ 1973 में बिहार से मुंबई आये. उस वक्त वासुदेव नारायण यह नहीं जानते थे कि उन्हें वाकई इतनी बड़ी कामयाबी मिलेगी. लेकिन भाई संपदा सिंह व कुछ लोगों के टीम की तरह काम करने की वजह से संपदा सिंह व वासुदेव नारायण की कंपनी अलकैम( दवाई की कंपनी) भारत की नहीं, बल्कि  विश्व स्तर पर ब्रांड बनी. दोनों भाईयों ने हमेशा अच्छे विजन के साथ दवाईयों का निर्माण शुरू किया. उन्होंने अपनी कंपनी में अच्छे तरह की मशीनें लगायीं. और फिर काम शुरू किया. कभी भी क्वालिटी से कोई कांप्रमाइज नहीं किया. तभी उन्हें यह कामयाबी मिली.  वर्तमान में बासुदेव नारायण सिंह इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चर एसोशियेशन के अध्यक्ष भी हैं. वे अलकैम की तरक्की की खास वजह संपदा सिंह की सोच के साथ खुद की सकरात्मक सोच व अलकैम के लोगों को आम लोग न मान कर टीम की तरह मानना ही अपनी कंपनी की यूएसपी मानते हैं. वे अपने यहां काम कर रहे लोगों को अलकैम परिवार का हिस्सा मानते हैं. अलकैम भारत की टॉप 7 फार्माशेटिकल कंपनियों में से एक है.
डॉ पीएन सिंह, समाज सेवी, एंटरप्रेनर,  ग्रेड इंडिया, लीडर्स आॅफ टूमॉरो
मैं यह मानता हूं बिहार ने कई लीडर्स दिये हैं और बिहार ने जैसे लीडर्स दिये हैं वैसे दुनिया में रहीं नहीं होंगे. फिलवक्त भी बिहार को जो लीड कर रहे हैं. वह सर्वश्रेष्ठ लीडर में से एक हैं. चूंकि उन्होंने बिहार में जो सबसे अहम चीज की है. वह यह है कि बिहार का स्वरूप बदला है और अब हम बिहार में बेफिक्र होकर अपनी बेटियों को आजादी से जाने दे सकते हैं. चूंकि वर्तमान सरकार ने लॉ एंड आॅर्डर को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया है. बिहार आज से कुछ सालों पहले क्या था और अब क्या है. इसका सीधा प्रमाण आप खुद बिहार जाकर देख सकते हैं. हाल ही में मेरी बेटी हमारे ही संस्था के एक कार्यक्रम में वहां शिरकत करने अकेली गयी. मेरी तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए. तो मैंने अपनी बेटी को सिर्फ इसलिए भेजा, क्योंकि अब वहां स्थिति बदल चुकी है. अब वहां लॉ एंड आॅर्डर के दुरुस्त होने से अब वहां लड़कियां भी सुरक्षित हैं. यह खुशी की बात है और आशा की किरण है. लेकिन एक बात जो मुझे अखड़ती है वह यही है कि पहले बिहार में जो पढ़ाई का आधार था. जो स्टैंडर्ड था. अब वह नहीं रहा. पहले बिहार में सबसे पहले लोग पढ़ाई को ही अहमियत देते थे. मुझे याद है अमेरिका ने एनपी सिंह जो कि पटना के बेहतरीन लीडर हुआ करते थे. उनके बारे में कहा था कि वह बेस्ट लीडर हैं. यह सब पढ़ाई के बल पर ही था. लेकिन अब वह खत्म हो गया है और जाहिर सी बात है कि जहां पढ़ाई दुरुस्त नहीं होगी. वहां करप् शन और राजनीति में तो कमियां आयेंगी. दूसरी बात जो मैं कहना चाहंूगा वह यह है कि बिहार के विकास को बिहार के गांव के विकास से देखिए. अभी कुछ दिनों पहले गुजरात गया था. संस्था के काम से. वहां के गांव कई गुना विकास कर चुके हैं. वहां के लोग घूस नामात्र लेते हैं और वहां विकास हो रहा है. जबकि बिहार में मैं जहां रहता हूं छपरा से कुछ दूरी पर स्थित है गंजपर. वहां आज भी बिजली, सड़क नहीं है और तो और रहने के लिए घर नहीं है. मैंने अपनी संस्था से लगभग 51 पक्के घर बनवाये हैं. वहां. मेरा मानना है कि बिहार को आगे ले जाने की अगर सोच रखते हैं तो सबकुछ सरकार पर मत सौंपिये. सरकार पर तो और भी कई जिम्मेदारियां हैं. आपको खुद रुचि दिखानी होगी. एक बात मैंने गौर की है कि बिहार के लोग बिहार में रह कर बातें ज्यादा करते हैं और बिहार से बाहर आकर वही लोग खूब काम करते हैं. ऐसा क्यों? वहां भी रह कर बातें बनाने की बजाय काम करते रहना चाहिए न. मेरा मानना है कि आज के दौर में बिहार को कई अच्छे एंटरप्रेनर की जरूरत है. बिहार में अब भी लोग या तो आइपीएस या मेडिकल या ब्यूरोकेसी जैसे अवसर ही तलाशते हैं. जबकि जरूरत है कि वहां पढ़े लिखे लोग मिल कर छोटे ही सही नये उद्योगों की शुरुआत करें. जरूरी नहीं कि सभी आइएस ही बन जाये.  वहां के गांव के लिए कुछ किया जाये. और यह कोई बाहर वाला नहीं करेगा. बिहार के लोगों को ही करना होगा. जो भी बिहार से बाहर आते हैं. बिहार को भूल जाते हैं, जबकि जरूरत है कि बिहार के लिए छोटे छोटे ही सही लेकिन प्रयास हो. हर कोई व्यक्तिगत रूप से मदद करे. संभव हो तो अपने घर के आसपास के गरीबों की मदद करें. जरूरत पड़ने पर उन्हें किताबें दे दें. पढ़ाएं. उद्योगों में उन्हें काम करने के मौके दें. तभी हम पूर्णरूप से बिहार के विकास की बात कर सकते हैं. वरना, बिहार का जो भविष्य है. वह ग्रोथ मुझे सस्टेन करता हुआ नहीं दिखता. मैं मानता हूं कि वर्तमान की स्थिति बहुत अच्छी है. लेकिन स्थिति को बनाये रखने के लिए जरूरी है कि काफी काम किया जाये.
जरूरी यह भी है कि केवल सतही स्तर पर बिहार के विकास या कमियों का आंकलन न करें. तभी हम डेवलपमेंट की बात कह सकते हैं. बिहार से करप्शन भी पूरी तरह तभी हटेगा. जब वहां शिक्षा को महत्व दिया जायेगा. सो, जरूरी है कि वहां के स्कूलों पर, कॉलेज पर खास ध्यान दिया जाये और लोगों के विकास की बातें हों. लोग खुद जुझारू हों और खुद काम करें. बिहार के लोग उद्यमी होते हैं. मेहनती हैं. वे जहां भी जाते हैं आसानी से रह लेते हैं और यही वजह है कि वह काफी मेहनत करके अपना नाम बनाते हैं तो यह जागरूकता व जुझारूपन हमेशा बरकरार रहे. तभी हम बेहतर बिहार की कामना कर सकते हैं. बिहार से बाहर काम करें लेकिन बिहार को भी भूलें नहीं. अपनी मिट्टी को न भूलेें. जिस क्षेत्र में भी उसे बढ़ावा दे सकते हैं. वह दिया जाना चाहिए. उच्चस्तरीय शिक्षा की भी जरूरत है. लेकिन इसके हमें खुद को जागरूक रखना होगा.
परिचय : डॉ पी एन सिंह बिहार के एक छोटे से इलाके गंज के रहनेवाले हैं. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव में रह कर ही पूरी की. शायद यही वजह है कि वे हमेशा गांव से जुड़े रहे और वहां की मिट्टी उन्हें  हमेशा अपनी ओर खींचती रही.  उन्होंने पढ़ाई तो पेट्रोलियम इंजीनियरिंग कॉलेज से पूरी की. फिर नौकरी करने लगे. लेकिन 11 साल  इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन में काम करने के बाद एमबीए  की पढ़ाई के लिए मनीला चले गये. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ कर एंटरप्रेनर की तरह एक संस्था की शुरुआत की. जिसका नाम जननी जन्मभूमि व कर्मभूमि रखा. इस ट्रस्ट के तहत वे गरीबों को शिक्षा, लाइब्रेरी रिसोर्स, ह्वाटर कंजरवेशन, वोकेशनल ट्रेनिंग, व गरीबों के आवास के लिए काम करता है. फिलवक्त डॉ पीएन सिंह मुंबई के ग्रीड कंसलटेंट के चेयरमैन हैं. साथ ही उन्होंने अब तक लगभग 22 किताबें लिखी हैं. उन्होंने आदित्य बिड़ला, मैनेजमेंट स्कूल आॅफ श्रीलंका जैसे स्थानों के साथ भी काम किया है.
एनबी पांडे, को फाउंडर व निर्देशक, पेंटागन मरीन
पहले जब मैं अपने घर जाता था. उस वक्त मुझे काफी सुरक्षा के साथ जाना होता था, क्योंकि पटना उतना सुरक्षित नहीं था. मुझे आइजी को बोल कर जाना होता था. लेकिन अब वहां के लॉ और आॅर्डर के सुधर जाने से काफी कुछ बदला है. लोग बेखौफ होकर कहीं भी आने जाने को तैयार होते हैं. वहां की सड़कें ऐसी हो गयी हैं कि सड़क मार्ग से कहीं भी आया जाया जा सकता है. बिहार में भी अब कई तरह के कॉलेज की शुरुआत हो रही है. कई गर्वमेंट कॉलेज की दशा बदली है. अब वहां की इंटरनल इकोनॉमी पर भी ध्यान दिया जा रहा है. हाल ही में बिहार ने राइस( चावल के उत्पादन में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है, अब वहां भी नाइट सर्विसेज शुरू हुए हैं. पहले जहां लगभग लोग बिहार से बाहर जदाते थे. अब वह भी वापस आकर बिहार में कुछ करना चाहते हैं.  प्रत्येक साल लगभग 12 हजार करोड़ रुपये जो लोग बाहर निवेश करके पढ़ाई करते थे. अब यहां कर करना चाहते हैं. हमें बिहार के भूतकाल को भूल जाना चाहिए. अब यहां के वर्तमान की राइजिंग के बारे में सोचा जाना चाहिए और यह हो रहा है. अच्छी बात यह है कि बिहार ने क्राइम से खुद को बहुत हद तक अलग किया है. अब लोग इज्जत से बिहार का नाम लेते हैं. धीरे धीरे यहां इंडस्ट्री की शुरुआत हो रही है. बिहार ने खुद को लगभग पोलियो मुक्त कर लिया है. इससे स्पष्ट है कि यहां की स्थिति बदली है. और स्वास्थ्य संबंधी कामों पर ध्यान दिया जा रहा है. अब लोग केवळ नौकरी नहीं कर रहे, वहां के लाइफस्टाइल में भी बदलाव आया है और लोग अब मेट्रो की तरह खुद को अपडेट रखते हैं. किसी भी राज्य का आइटीआइ उस राज्य का बैकबोन होता है तो वह भी सुधर रहा है. दरअसल बिहार को फिलहाल एंटरप्रेनर की जरूरत है. जो कि खुद सोचें और बिहार के विकास के लिए वहां आकर कुछ करे. तभी माइग्रेशन कम होगा. क्योंकि माइग्रेशन भी बिहार की बड़ी समस्या है. वहां रोजगार उपलब्ध नहीं तो लोग वहां से बाहर चले जाते हैं. इसलिए बहुत जरूरी है कि यहां पलायन रोकने की रोजगार के माध्यम जेनरेट किये जायें.बिहार को लेकर जो लोगों में गलत अवधारणा है. वह इसी तरह बदलेगी. जब धीरे धीरे पूरा भारत खुद अपनी आंखों से इसकी तरक्की होते हुए देखेगा. इसके लिए जरूरत है कि सरकार के साथ साथ हम खुद भी इसके बारे में सोचे. एंटरप्रेनरशीप को बढ़ावा दें. वैसी सुविधाएं दें. नयी युवा पीढ़ियों को. लोगों को काम दें. ज्यादा से ज्यादा. साथ ही लॉ एंड आॅर्डर का रिस्पेक्ट करें. तभी हम आगे बढ़ पायेंगे और बिहार तरक्की कर पायेगा.

परिचय : बिहार के रहनेवाले एनबी पांडे वर्तमान में पेंटागान मरीन सर्विसेज के फोर्ट डायरेक्टर हैं व फाउंडर हैं.  पैंटागन मरीन सर्विसेज की शुरुआत 2004 में हुई थी और फिलवक्त शिपिंग व अलायड एक्टिविज में यह एक जानी मानी संस्था है. उन्होंने सिसको, मॉटे कार्लो जैसी कंपनियों में भी काम किया है.

ँपदमश्री ब्रह्मदेव राम पंडित
मेरा मानना है कि बिहार की प्रगति को केवल शहर की प्रगति या सिर्फ पटना की प्रगति के आधार पर न आंका जाये. जरूरत है कि बिहार के गांव तक लोग जायें और वहां जाकर भी वहां के लोगों की सुने. आज भी बिहार में जहां सड़क बिजली पानी नहीं है. वहां लोगों को यह मुहैया कराया जाना चाहिए. मेरा मानना है किग्राम उद्योग कला से गांवों का काफी विकास हो सकता है और बिहार जैसे गांवों का तो खास तौर पर, क्योंकि यह बहुत जरूरी है कि अपनी कला को भी हम संजोयें और इसके लिए वहां के कलाकारों को भी बढ़ावा दे. बिहार का इतिहास काफी समृद्ध रहा है. सो, हमें उन्हें संजोना होगा. कला को भी महत्वपूर्ण दर्जा देना होगा. जैसे मैं खुद पोटरी के काम में हूं. और मैं बिहरा से बाहर यह काम कर रहा हूं और मुझे यह सम्मान मिल रहा है. जरूरत है कि वहां रह कर वहां के जो लोग इस काम में पारंगत हैं. उन्हें महत्व दिया जाये और उनको प्रोत्साहन मिले. वहां कई ट्रेनिंग प्रोगाम  भी हों, ताकि ऐसी चीजों को बढ़ावा मिले. वहां ग्रामोउद्योग शुरू हो. गृह उद्योग शुरू हो. क्योंकि वहां के लोगों में लगन की कमी नहीं है. वहां के लोगों को बस मार्गदर्शन चाहिए,बिहार के गांवों पर भी सरकार ध्यान दे तो बिहार विकासशील कहलायेगा

परिचय : बिहार के आम कुम्हार परिवार से संबंध रखनेवाले पंडित ब्रह्मदेव ने अपनी मेहनत व लगन से अपनी कला से पूरे भारत में अपनी पहचान बनायी. ेपंडित ब्रह्मदेव मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में अंतरराष्टÑीय स्तर की पहचान बना चुके हैं.  इन्होंने, आम तौर पर मिट्टी से बर्तन बनाने की कला को धीरे धीरे अपने हुनर से स्टूडियो में इस्तेमाल किये जाने वाले डिजाइनर बर्तनों की मेकिंग तक का सफर तय किया है आगामी 6 अप्रेल को उन्हें राष्टÑपति के हाथों पदमश्री का सम्मान हासिल होगा.

विकास वर्मा, सीइओ, जी-7 सेक्योरिटीज
 मैं अपने पुराने बिहार को भी बेहतरीन मानता हूं और आज के बिहार को भी बेहतरीन मानता हूं. चूंकि उस वक्त का जो बिहार था. वह भी काफी खूबसूरत था. उस वक्त के लोग काफी मासूम थे. अब बिहार में टीवी, कंप्यूटर, तकनीक सभी चीजों को बढ़ावा मिला है.  बिहार भारत की सोने की चिड़िया है. वहां जो प्रतिभाएं हैं, वहां के लोगों के पास जो सोच है. जो लगन है. वह हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दम रखते हैं. वे सक्षम हैं. इसलिए अब धीरे धीरे जिस बिहार से कई जीनियस बाहर चले जाते थे. अमेरिका चले जाते थे. लंदन चले जाते थे. अब एक बार फिर से वह बिहार लौटना चाहते हैं.  अब बिहार के बढ़ने के वे सारे आसार नजर आने लगे हैं. चूंकि बिहार के यंग जेनरेशन के हाथों में बिहार की डोर आ गयी है और अगर पूरी तरह नहीं आयी है तो भी जरूरत है कि हम बिहार के होनहार लोगों को मौके दें. वहां ज्यादा से ज्यादा रोजगार के माध्यम  तैयार किये जायें. बिजली की समस्या आज भी बिहार की बड़ी समस्या है. गांव गांव तक बिजली पहुंचायी जाये. मेरा मानना है कि अगर नयी युवा पीढ़ी को सही निर्देशन  मिले तो वह वहां काफी तरक्की करेगी. साथ ही यह भी जरूरी है कि हम अपने यहां के कल्चर को और बढ़ावा दें, उसकी इज्जत करें. अगर बिहार में नहीं हैं. कहीं बाहर भी हैं तो वहां की सारी पूजा, त्योहार मनाएं. तभी हम उज्जवल बिहार की सोच रख पायेंगे. जातिवाद के नाम पर हो रहे विवाद को खत्म करना जरूरी है. अपर कास्ट लोअर कास्ट सबको मिल कर काम करना होगा. बिहार में जो अच्छी चीजें हो रही हैं. उनमें यह भी एक बात है कि वहां की सड़कें सुधरी हैं. लोगों ने अब शिक्षा को अधिक महत्व देना शुरू किया है. वहां कंप्यूटर की लिटरेसी बढ़ी है.  सरकारी संस्था अब काफी मेंटन हो गये हैं. इससे बहुत फर्क पड़ा है. लोग अब सरकारी संस्थाओं पर भी विश्वास करने लगे हैं.  एग्रीकलचर के क्षेत्र में भी काम हो रहे हैं. जरूरत है कि सरकार  पशुपालन को महत्व दें. गृह उद्योग जो कि पूरी तरह से हमारे बिहार की सोच है. अब चीन ने इसे आजमा कर तरक्की कर ली है. जरूरत है कि बिहार में भी गृह उद्योगों की शुरुआत तो इससे लोगों को रोजगार मिलेगा. हालांकि इसके लिए साधन की जरूरत है. और बिजली जैसी चीजें जरूरत हैं. तो जरूरत है कि बिजली की स्थिति को दुरुस्त किया जाये. अब बिहार को किसी पंचवर्षीय और लंबी खींची जानी वाली योजनाओं की नहीं, आधुनिक योजनाओं की जरूरत है. बिहार के टूरिज्म को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि इससे बिहार में इकोनॉमी आयेगी. जो लोग बिहार छोड़ कर बाहर जाकर पढ़ाई कर रहे हैं. वे बिहार वापस आकर काम करें तो बिहार को अपना निवेश मिलेगा.  एअरपोर्ट भी बनने चाहिए. रेल रोज चाहिए. मोनो रेल है जैसे प्रोजेक्ट शुरू हो. और बिहार ये चीजें जरूर कर लेगा. चूंकि वहां आज भी लोग एक दूसरे की मदद करते हैं. महामारी हो या बाढ़ हो. लोग मदद करते हैं. बिहार की मासूमियत और लगन जिंदा रहे तो विकास होता रहेगा बिहार का.
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ारिचय : बिहार के पटना शहर के रहनेवाले विकास वर्मा ने कई वर्षों पहले मुंबई आकर सेक्योरिटी सर्विस की छोटी सी शुरुआत की थी. लेकिन अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने जी-7 सेक्योरिटिज कंपनी को अंतरराष्टÑीय स्तर पर पहचान दिला दी. जी 7 वर्तमान में सेक्योरिटी गाडर््स, बॉडीगार्ड व तमाम सेक्योरिटी से जुड़े सर्विसेज में अपनी सेवाएं देता है. जी 7 के इतिहास में अंतरराष्टÑीय शख्सियतों के भी नाम हैं, जिन्हें इस कंपनी ने अपनी सेवाएं दी हैं, रिकी मार्टिन,स्टीवन सेगल, बिल क्लिंटन जैसे नाम प्रमुख हैं. अपनी ईमानदारी व बेखौफ काम के लिए ही जी सेवन विख्यात है.

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