20120516

बेबस, अकेला, बेजुबां चुपचाप रोया

आमिर खान ने अपने शो ‘सत्यमेव जयते’ में बीते रविवार बाल यौन शोषण का मुद्दा उठाया था. शो के पहले एपिसोड से ज्यादा उन्हें इस बार प्रतिक्रियाएं मिलीं. इस शो के प्रसारण के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कई लोगों ने आकर लगातार इस मुद्दे पर चर्चा की. इन लोगों में कई सेलिब्रिटी भी शामिल थे. अभिनेत्री व गायिका सोफिया हयात ने ट्वीट किया और अपने ब्लॉग पर लिखा है कि उनके साथ भी कभी बचपन में ऐसा हादसा हुआ था. सेलिब्रिटीज के अलावा चौंकानेवाली बात यह थी कि कई लड़कियों व लड़कों ने जिनके साथ बचपन में कभी ऐसी घटना घटी, उन्होंने ने भी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आकर अपना स्टेटस अपडेट दिया. सोमवार व मंगलवार के दिन मैंने नोटिस किया. ऐसे स्टेटस लिखनेवाले कई लोग नजर आये. यह आंक.डें साफतौर पर बताते हैं कि कितने लोगों ने अपना मासूम बचपन इस हैवानियत की वजह से खोया है. आमिर खान के इस खास एपिसोड व खास मुहिम की सराहना की जानी चाहिए. इससे लोगों में न सिर्फ जागरूकता आयी है, बल्कि कई खामोश आवाजों ने अपनी चुप्पी भी तोड़ी है. आमिर के शो का गीत वाकई इस रूप में सार्थक है कि अब पीड़ित लोगों ने धीरे-धीरे ही सही पर इस चुप्पी को तोड़ा है. कई वर्षों पहले मीरा नायर की फिल्म आयी थी ‘मॉनसून वेडिंग’. इस फिल्म का केंद्रीय विषय बाल यौन शोषण का मुद्दा तो नहीं था, लेकिन शेफाली छाया व रजत कपूर के किरदारों में मीरा नायर ने एक अहम बात कहने की व दिखाने की कोशिश की थी. इस फिल्म को जिन दर्शकों ने भी गौर से देखा होगा, वे निश्‍चित तौर पर निर्देशक के उद्देश्य को समझ पाये होंगे. आज से लगभग 11 साल पहले मीरा ने यह फिल्म भारतीय दर्शकों के लिए बनायी थी. शायद मीरा ने महसूस किया होगा कि उस वक्त इस विषय को शायद न स्वीकारा जाये, लेकिन संकेत के रूप में ही सही उन्होंने इस विषय पर बातचीत का एक माहौल तैयार किया था. मधुर भंडारकर ने भी फिल्म ‘पेज 3’ में चौंकानेवाले दृश्य दिखाये थे. जिनमें एक कंपनी का सीइओ बाल यौन शोषण करता है. फिल्म ‘आइएम’ में भी इस मुद्दे पर प्रकाश डालने की कोशिश की गयी है. इन फिल्मों के माध्यम में बाल यौन शोषण के ही विभित्र रूपों को दर्शाया गया है. आमिर खान की इस मुहिम के बाद इस संवेदनशील विषयों पर और फिल्में बने तो शायद और लोगों की आंखें खुलेंगी.

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