20120329

अभिनेत्री-अभिनेत्री आमने-सामने

मधुर भंडारकर की राजनीति पर आधारित फिल्म में अभिनेत्री विद्या बालन ने काम करने के लिए हामी भर दी है. खबर है कि इस फिल्म की कहानी दो महिला राजनीतज्ञों पर होगी. और दो महत्वपूर्ण महिला किरदार होंगी अभिनेत्री विद्या बालन और प्रियंका चोपड़ा. वाकई, अगर मधुर इन दोनों अभिनेत्रियों को अपने इस प्रोजेक्ट के लिए राजी कर लेते हैं तो यह बेहतरीन फिल्म होगी.वर्तमान में फिलहाल यही दो अभिनेत्रियां हैं, जो विभिन्न किरदारों को निभा रही हैं और वाकई अपने अभिनय क्षमता का प्रमाण दे रही हैं. ऐसे में अगर मधुर भंडारकर इन दोनों ही अभिनेत्री को आमने सामने लाते हैं तो यह फिल्म दिलचस्प होगी. गौर करें, तो प्रियंका चोपड़ा ही वह पहली अभिनेत्री हैं, जिन्होंने फिल्म फैशन से कई बंदिशें तोड़ीं व महिला प्रधान फिल्मों की दोबारा वापसी हुई. हालांकि विद्या बालन की फिल्में द डर्टी पिक्चर और कहानी की सफलता के बाद वे शीर्ष पर हैं. लेकिन प्रियंका चोपड़ा की क्षमता को भी कमतर नहीं आंका जा सकता. उन्होंने सात खून माफ, कमीने, जैसी फिल्मों में खुद को साबित किया है. ऐसे में अगर मधुर अपनी सोच से इन दो अभिनेत्रियों को बिल्कुल अलग अवतार व अलग तेवर के सामने प्रस्तुत करते हैं तो यह उनके लिए चुनौती होगी. लेकिन उतना ही रोमांच करनेवाला भी अनुभव होगा. दरअसल, हिंदी फिल्मों में जब भी ऐसे संयोग बने हैं, जब दो भावपूर्ण व सशक्त अभिनेत्री को किसी फिल्म में आमने सामने प्रस्तुत किया गया है. वह फिल्म दिलचस्प बनी है. लोगों ने उन्हें पसंद किया है. फिर वह बिमल रॉय का देवदास हो या फिर संजय लीला भंसाली का आधुनिक देवदास. सुचित्रा सेन, बैजयंतीमाला, ऐश्वर्य-माधुरी दीक्षित जैसी अभिनेत्रियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है. महेश भट्ट की फिल्म अर्थ में जितना ध्यान शबाना आजिमी खींचती हैं उतना ही स्मिता पाटिल भी.फिल्म फायर में नंदिता दास व शबाना आजिमी ने बेहतरीन अभिनय किया है. राजकुमार गुप्ता की फिल्म नो वन किल्ड जेसिका में भी उन्होंने रानी मुखर्जी व विद्या बालन दो बेहतरीन अभिनेत्रियों को एक ही फ्रेम में लाया. और फिल्म में जितनी चर्चा रानी के किरदार की हुई. उतनी ही कामयाबी विद्या के सबरीना किरदार को भी मिली. निश्चित तौर पर ऐसी फिल्में करते वक्त अभिनेत्रियां इस लिहाज से भी अधिक मेहनत करती होंगी कि उन्हें अपने सामने खड़ी अभिनेत्री से श्रेष्ठ करना है. ऐसे माहौल में चुनौती की गुंजाईश अधिक होती है. जाहिर है वे मेहनत करेंगी और संभव कोशिश करेंगी कि वह खुद को प्रूव कर सकें. ऐसे में उनका श्रेष्ठ अभिनय निखर कर सामने आता है और वह साफतौर पर परदे पर भी नजर आता है. लेकिन वर्तमान दौर में ऐसी कहानियां गढ़नेवाले कम ही निदर्ेशक हैं जो दो अभिनेत्रियों को केंद्र में रख कर फिल्में बना सकें. हालांकि इन दिनों आपको एक ही फिल्म में कई अभिनेत्रियां नजर आ जायेंगी. हाउसफुल 2 में चार अभिनेत्रियां हैं. लेकिन इन मल्टीस्टारर फिल्मों में अभिनेत्रियां केवल पाउडर थोपी हुई गुड़िया नजर आती हैं, या फिर मस्ती करती दिखाई देती हैं. लेकिन इन फिल्मों में महिला अभिनेत्रियों की अभिनत क्षमता निखर कर सामने नहीं आ पाती.

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