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20140531

होलीडे मजाकिया फिल्म नहीं : अक्षय कुमार


होलीडे नाम सुन कर भले ही आप यह अनुमान लगायें कि फिल्म हल्की फुल्की होगी. लेकिन हकीकत यह है कि होलीडे एक बेहद गंभीर मुद्दे पर बनी फिल्म है. इस फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य किरदार निभा रहे हैं. होलीडे में आंतकवाद के किस रूप का चित्रण हैं. 
अक्षय होलीडे के बारे में बतायें. लोग अनुमान लगा रहे कि यह कोई कॉमेडी फिल्म होगी?
जी नहीं. यह सोच बिल्कुल गलत है. होलीडे बेहद गंभीर फिल्म है. यह एक मोस्ट वॉच फिल्म है. यह मैं इसलिए नहीं कह रहा चूंकि यह मेरी फिल्म है. बल्कि इसलिए क्योंकि इसमें रियल टेरेरिज्म को दिखाया गया है. फिल्म के निर्देशक मुर्गुडोज ने विषय पर काफी काम किया है और फिल्म आपको एजुकेट करती है. फिल्म में कई रीयल इंसी्डेंट्स पर आधारित दृश्य है. यह एक इंटेलिजेंट थ्रीलर है.
फिल्म में आपका किरदार क्या है?
मैं फिल्म में आर्मी आॅफिसर की भूमिका में हूं और मैं होलीडे के लिए एक शहर में आता हूं और वहां मैं रियलाइज करता हूं वहां आतंकवाद के बीज हैं. मैं अपने आर्मी कलिग के साथ वहां के लोगों को बचाने की कोशिश करता हूं.  मुझे इस फिल्म की कहानी इतनी पसंद आयी थी कि मैं नैरेशन में फिल्म का सिर्फ फर्स्ट हाफ सुन कर ही फिल्म को हां कह दिया, मैं विपुल से कहा कि सेकेंड हाफ जो भी होगा आइ डोंट केयर. मुझे ये फिल्म करनी है. हम पहले ये फिल्म हिंदी में बनाने वाले थे. लेकिन निर्देशक मुर्गडोज की इच्छा थी कि पहले इसे साउथ में बनायें. तो हम राजी हो गये. मुर्गडोज की आप पहले भी गजनी फिल्म देख चुके हैं और अनुमान लगा सकते हैं कि उनकी फिल्मों में किस तरह का ट्रीटमेंट होता है. लोग कहते हैं कि अरे उनकी फिल्मों में वॉयलेंस का ओवडोज होता है. लेकिन इस फिल्म में मैंने जब उनके साथ काम कर लिया है तो मुझे यह एहसास हो गया कि वे काफी टैलेंटेड हैं. वे कई बार खुद पुलिस चॉकी चले जाते हैं और वहां जाकर वहां के केस स्टडी करते हैं. इस फिल्म में एक दृश्य है. जहां टॉर्चर होता है. हमने अब तक हिंदी फिल्मों में यही दिखाया है कि मुंह पर पानी मार दो हो गया. लेकिन इस फिल्म में ऐसा नहीं होता. जो टॉर्चर दिखाया गया है, वह रियल लाइफ में वाकई सैनिकों के साथ होता है तो यह निर्देशक की बारीकी है.
अक्षय, कुछ मसाला फिल्मों के बाद आप फिर एक ब्रेक लेते हैं और गंभीर फिल्म बनाते हैं. स्पेशल 26 की तरह. तो क्या कोई स्ट्रेजी है?
नहीं कोई स्ट्रैजी नहीं है. बस मुझे जो किरदार अच्छे लग जाते हैं. मैं कर लेता हूं. एक साल में मेरी चार फिल्में आ जाती हैं. तो हर रूप में दर्शकों को दिखना चाहिए न. बस यही ख्याल रखता हूं. और मुझे ऐसा करने में मजा भी आता है. हर फिल्म के बाद मैं 7-8 दिन का ब्रेक इसलिए लेता हूं कि फिर से दोबारा खुद को दूसरी फिल्म के लिए तैयार कर सकूं.दूसरी बात है कि यह संभव नहीं कि आप हर बार ओह माय गॉड जैसी फिल्में बनाता रहूं. चूंकि वैसी स्क्रिप्ट हर बार आपके पास नहीं आती. तो कुछ तय नहीं है. जैसे जैसे मिलते हैं मौके करता जाता हूं काम.
ेंसोनाक्षी सिन्हा के साथ यह आपकी चौथी फिल्म है. आप सोनाक्षी को लकी चार्म मानते हैं. क्या यह वजह है कि आपके साथ वह लगभग हर फिल्म में नजर आ रही हैं?
नहीं ऐसी बात नहीं है कि हर फिल्म में सोनाक्षी ही हैं. मैं तो तमन्ना के साथ भी काम कर रहा, काजल के साथ काम किया, अभी तापसी पन्नू के साथ कर रहा. सोनाक्षी के साथ फिलहाल होलीडे ही है. इसके बाद हम दोनों साथ में फिलहाल किसी फिल्म में आ रहे. ऐसी योजना नहीं. सोनाक्षी मेहनती लड़की हैं और कम वक्त में उन्होंने अच्छी पहचान बना ली है. और इसलिए उन्हें अच्छे आॅफर और काम मिल रहा है.
आपके बेटे आरव और आपकी बांडिंग के बारे में बताएं. 
आरव को फिल्मों में दिलचस्पी नहीं हैं. उन्हें मार्शल आर्ट करना पसंद है और वह गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं. हम कहीं भी घूमने जा रहे तो यह प्लानिंग उनकी होती है कि हमें कहां जाना है और क्या करना है. मैं और वह बिल्कुल दोस्त की तरह हैं. बिटियां भी धीरे धीरे बड़ी हो रहीं, फिर उनसे भी दोस्ती हो जायेगी.
मार्शल आर्ट को लेकर आप हमेशा गंभीर रहते हैं?
हां, मैं चाहता हूं कि हर स्कूल में बच्चों को मार्शल आर्ट अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाये. चूंकि यह बेहद जरूरी है. इससे व्यक्ति सेल्फ डिफेंस कर सकता और उसके पास सेल्फ कांफिडेंस भी आता है. 

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