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20140623

बिंदास सोच की अभिनेत्रियां

हाल ही में सनी लियॉन से बातचीत हुई. उनकी एक छवि है। जिसके बारे में लोग जानते हैं. और केवल उन्हीं बातों की चर्चा करते हैं। सनी खुद जानती हैं कि उनकी उसी छवि के कारण फिलवक्त उन्हें काम मिल रहा है।  लेकिन वह इससे विपरीत अपनी छवि को सुधारने की न सिर्फ कोशिश कर रही हैं।  बल्कि वह अभिनय को भी गंभीरता से ले रही हैं. उन्होंने अपनी हिंदी भाषा पर परिश्रम किया और वे इसमें सफल भी दिख रही हैं।  सनी की एक खास बात जो और आपको प्रभावित करेंगी कि वह अपने जवाब में पोलिटिकली करेक्ट होने की कोशिश नहीं करती हैं।  सिर्फ सनी ही नहीं , हिंदी मूल से ताल्लुक न रखने वाली उन हर अभिनेत्रियों में यह बात सामान्य है कि वे सभी दिल खोल कर बातें करती हैं। हर मुद्दे पे बात करती हैं।  वे किसी भी सवाल पर भड़कती नहीं हैं।  इससे पहले नर्गिस फाकरी से भी कई बार मुलाकात होती रही हैं. वे जिस तरह बिंदास दोस्तों की तरह बात करती हैं वह उन्हें ख़ास होते हुए भी हमारे बीच का बना देता है। विदेशी मूल की ही जिसेल से भी बातचीत करने के बाद यही महसूस किया कि वे अपनी इमेज को लेकर बहुत ज्यादा परेशान नहीं रहतीं। हिंदी सिनेमा की किसी  अभिनेत्री से अगर फिल्म से इतर कोई प्रश्न पूछा जाये तो वह नाराज हो जाती हैं और वे सवालों का सही तरीके से जवाब नहीं देती।  चूंकि हकीकत भी यही है कि भारत में एक अभिनेता या अभिनेत्री  के चरित्र के आधार पर ही उनकी प्रतिभा को भी आंका जाता है। इसलिए हर कलाकार इस बात से डरता है कि उसकी नकारात्मक बातें लोगों के सामने न आये। इन दिनों स्टार्स अपने पीआर का पूरा सहारा लेते हैं ताकि अगर उनके बारे में कोई बात लोगों के सामने आ भी जाती है तो वह कोशिश करते हैं कि उसे सुधारा जा सके।  चूंकि उसी आधार पर उन्हें फिल्में भी मिलती हैं। लेकिन यहाँ के कलाकारों को विदेशी मूल की अभिनेत्रियों से जरूर सीख लेनी चाहिए। उनका बिंदासपन हमें लुभा जाता है और उनकी इमेज भी हमारे सामने अच्छी और ईमानदार बन जाती है. जबकि जो दिखावटी बातें करते हैं उनके बारे में हम गलत अवधारणा ही बनाते हैं। आज जिस तरह रियल फिल्में आ रही हैं यह जरूरी है कि अभिनेता भी अपनी वास्तविक छवि प्रस्तुत करें

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