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20130204

फिल्मों से इतर भी एक हसीन दुनिया है मेरी : अनुपम खेर





अनुपम खेर को जितना फिल्मों से प्यार है उतना ही थियेटर से भी. वे सामाजिक मुद्दों में भी अपनी न सिर्फ रुचि रखते हैं, बल्कि जरूरत हो तो अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं और गतिविधियों में भी शामिल होते हैं. बॉलीवुड में ऐसे अभिनेता शायद ही हों जो एक साथ कई गतिविधियों में शामिल हों. अभिनेता होते हुए भी वह अपने एक्टिंग स्कूल के माध्यम से नये एक्टर भी तैयार कर रहे हैं. जल्द ही अनुपम खेर स्पेशल 26 में महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आनेवाले हैं. फिल्म के संदर्भ में व कई मुद्दों पर अनुपम खेर ने अनुप्रिया अनंत से बातचीत की.

 अनुपम खेर के एक्टिंग इंस्टीटयूट एक्ट्स प्रीपेयर्स की ही खोज है दीपिका पादुकोण. दीपिका पादुकोण के अलावा रणबीर कपूर जैसे कलाकार भी उनके एक्टिंग स्कूल में प्राय: छात्रों से मिलने आते हैं.

 अनुपम, आप मीडिया से काफी कम बातचीत करते हैं. खासतौर से फिल्मों को लेकर. कोई खास वजह.
जी नहीं, ऐसा नहीं है. आपने अगर गौर किया होगा तो मैं हमेशा अन्ना आंदोलन का अगुवाही रहा हूं और उस वक्त भी मैंने खुल कर आम लोगों से बातचीत की है. हां, फिल्मों के संबंध में बातें करने में. मेरा मतलब फिल्मों के प्रोमोशन को लेकर है. मैं फिल्मों के प्रोमोशन में थोड़ा कंजूस हूं. मुझे लगता है कि लोग सीधे तौर पर फिल्म देखें. फिल्म अच्छी होगी तो लोग पसंद करेंगे ही. मैं प्रोमोशन को अहम हिस्सा नहीं मानता. इसके साथ ही साथ मैं कई गतिविधियों में व्यस्त रहता हूं. अब भी फिल्मों से अधिक मेरे लिए मेरा इंस्टीटयूट, मेरा देश और थियेटर अहम है.
स्पेशल 26 में आपके किरदार के बारे में बताएं. नीरज पांडे के साथ यह आपकी दूसरी फिल्म है?
स्पेशल 26 मेरे लिए वाकई स्पेशल है. चूंकि मैं कई सालों से इंडस्ट्री में हूं. लेकिन ऐसी कहानियों की कमी देखता हूं मैं. जैसी नीरज ने बनाई है. और इस बार जो उसने मुझे किरदार दिया है. इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि मेरा किरदार मुख्य किरदार के बिल्कुल पैरेलल है. हिंदी फिल्मों में अब भी सुपरसितारों को ही तो अहमियत मिलती है. फिर हमें तो लोगों ने कैरेक्टर आर्टिस्ट ही बना दिया है. लेकिन नीरज पांडे जैसे निर्देशक जब आपको ध्यान में रख कर किरदार लिखते हैं तो लगता है कि चलो किसी निर्देशक ने तो आपकी क्षमता का भरपूर इस्तेमाल किया है. स्पेशळ 26 में मेरा किरदार एक ठग का ही किरदार है, जो दूसरे ठग के साथ मिल कर सारी साजिश रचता है और जीतता जाता है. लेकिन एक टर्न ऐसा आता है कि वह फंस जाता है. इस फिल्म में मेरा किरदार कॉमिक भी है, जो कि मेरा पसंदीदा जॉनर है. नीरज पांडे के साथ यह मेरी दूसरी फिल्म है. पहली फिल्म वेडनेस डे में भी उसने जो संजीदगी भरा किरदार दिया था. वह काबिलेतारीफ था. लोगों नें उसे पसंद किया था. इस लिहाज से नीरज पांडे मेरे पसंदीदा निर्देशकों में से एक हो गये हैं.
लेकिन ठग पर आधारित और भी फिल्में आती रही हैं, स्पेशल 26 में अनोखा क्या है?
ये हमारी आपकी सबकी प्रॉब्लम है. हम फिल्म देखे बिना कैसे अनुमान लगा लेते हैं कि अरे ये तो वैसी फिल्म है. सिर्फ किसी फिल्म के कुछ सीन मिल जायें या कोई एक ही अंदाज मिल जायें तो आप पूरी फिल्म को नकल बोल देते हैं. स्पेशल 26 उन सबसे अलग है. यह सिस्टम के अंदर बाहर चल रहे तमाशे को लोगों के सामने लाती है. साथ ही दर्शाती है कि हम तमाशबीन लोग कैसे मुर्ख बनते जाते हैं. काले धन की सच्चाई क्या होती है. क्यों ठगे जाने पर भी लोग शिकायत दर्ज नहीं करते. कोई बनावटी बातें नहीं कह रहा मैं. ऐसा होता है.
नीरज पांडे बतौर निर्देशक अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर रहे हैं इस फिल्म से. अब तक उनमें आपको क्या क्या विशेषताएं नजर आयीं?
सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि वह किसी की नहीं सुनता. वह अपनी सोच. अपनी अप्रोच में बिल्कुल स्पष्ट है. फिर चाहे अक्षय कुमार जैसा सुपरस्टार ही क्यों न हो. वह स्पॉनटेनिस चेंजेज के लिए कोई जगह नहीं छोड़ता. यह दर्शाता है कि आपका होमवर्क कितना तगड़ा है. मुझे ऐसे निर्देशकों के साथ काम करने में मजा आता है जो पहले पेपरवर्क पर सबसे ज्यादा समय देते हैं और शूटिंग में बिल्कुल कम. इससे स्पष्ट होता है कि उनका विजन कितना दूरदर्शी है.
अनुपम आप कई दशकों से हिंदी सिने जगत के अहम हिस्से रहे हैं. क्या क्या बदलाव नजर आये हैं इस दौरान बॉलीवुड में. क्या कमियां या खूबियां देखते हैं.
खूबियां तो काफी हैं कि नये लोगों को मौके मिल रहे हैं. जब हम फिल्मों में आये थे या हम सक्रिय रहे तो उस वक्त घिसी पीटी कहानियों पर ही काम होता था. केवल सुपरस्टार के बच्चों की लांचिंग पैड के रूप में आती थीं फिल्में. लेकिन अब दौर बदला है. देखिए नीरज ने केवल एक ही फिल्म से पहचान बना ली. हमारे वक्त संघर्ष ज्यादा थे. आॅप्शन कम थे. हां, लेकिन जो कमी अब भी है वह यही कि फिल्मों के पोस्टर में हम अधिक नजर आते हैं. लेकिन फिल्मों में तो मेहनताना हमें मिलना चाहिए वह मिलता नहीं, उस पर हर दिन नये कानून सामने होते हैं कि एक्टर्स को इतना टैक्स भरना पड़ेगा. उतना टैक्स भरना पड़ेगा. तो ये सारी परेशानियां तो है हीं. एक बीच की खाई है जो तब भी थी अब भी है. अब फिल्मों में काम के लिए नहीं, मेहनताना के लिए संघर्ष करना पड़ता है. जैसा कि आप लोगों को पता ही है कि हाल ही में एक फिल्म के निर्देशक व निर्माता ने मेरे मेहनताना नहीं दिया था. उन्हें बार बार फोन किया. फोन पिक ही नहीं किया. अंतत: मुझे कोर्ट के माध्यम  से उन तक पहुंचना पड़ा और यह सिलसिला जारी है. लोगों को लगता है कि बस फोकट में काम करा लो.
एक बार आपके एक इंटरव्यू में मैंने पढ़ा था कि शिमला में जब आप अपने पूरे परिवार के साथ रहते थे. एक कमरे के मकान में. वहां एक पार्क में एक बेंच थी. जिस पर आपने कई बार अनुपम खेर लिखा था. सिर्फ इसलिए ताकि जब आप बहुत बड़े आदमी बन जायें और दोबारा वहां आयें और उसे देखें तो आपको याद रहे कि आपकी जमीन क्या है? आप मानते हंैं कि आज भी आप अपनी जमीन से जुड़े हैं.
निस्संदेह. इसमें कोई शक नहीं. मैंने जो भी हासिल किया है. मेहनत से किया है. परिवार का साथ मिला और जानता हूं कि मैं कहां से आया हूं. तो बिल्कुल जमीन पर ही रहता हूं. मेरा मानना है कि जड़ से कटना इंसान को खुद से काट देता है. पिछले साल जब मेरे पिता की मृत्यु हुई तो हमने इसका जश्न इसलिए मनाया कि पापा खुद ही कहते थे जिंदगी जश्न का नाम है. जो जिंदगी मुझे जीनी थी. वह मैंने जी. अब मेरे जाने के बाद तुम लोग मातम में न बैठ कर अपने काम में लगो. क्योंकि निरंतर चलते रहना जरूरी है. यही सारी बातें हैं जो मुझे जड़ से जोड़े रखती हैं. खासतौर से पापा की बातें. ये सारी चीजें जिंदा हैं तभी तो थियेटर को भी अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाये रख पाने में अब भी कामयाब हूं.
एक्टर्स प्रीपेयर्स का अनुभव कैसा रहा है आपका. नये बच्चों से क्या सीखने की कोशिश करते हैं? और नये बच्चे जब कई उम्मीदें लेकर आते हैं तो आप कैसा महसूस करते हैं. क्या वाकई अभिनय का हुनर किसी इंस्टीटयूट से मिल सकता है.
हम यह कतई दावा नहीं करते कि हम बच्चों को कैंपस सेलेक् शन के रूप में काम दिलवा देंगे. और ऐसा इस क्षेत्र में है भी नहीं. मैं यह भी मानता हूं कि अभिनय का हुनर आपको ईश्वर से ही मिलता है. लेकिन हमारा संस्थान उससे मांझता है और कुछ नहीं. जिनमें कोई बात नहीं होती फिर भी वह एक्टिंग में आना चाहते हैं तो हम उन्हें समझाते हैं कि यह करियर उनके लिए नहीं. जहां तक बात मेरे अनुभव की है तो मैं जब भी नये बच्चों से मिलता हूं मुझे लगता है कि मैं अपने भूतकाल में चला गया हूं. हर दिन कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है. हाल ही में रणबीर आये थे मेरे इंस्टीटयूट में. उन्होंने बच्चों से न सिर्फ बातें की. बल्कि कई एक्ट करके भी दिखाये. उन्हें देख कर मैं फिर से अपनी जवानी में खो गया. मैं भी इतना ही ऊर्जा से भरपूर अभिनेता था.
कभी ऐसा नहीं लगा कि अब बहुत हो गया. रिटायर हो जाना चाहिए?
मैं किसी सरकारी नौकरी में तो हूं नहीं. उम्र से काम नहीं करता मैं. मैं दिल से काम करता हूं. जब दिल और शरीर दोनों थक जायेंगे तो आराम कर लूंगा.
अनुपम, आपने अब तक कई फिल्मों में काम किया है. लेकिन आपके दिल के करीब अब तक की आपकी सबसे पसंदीदा फिल्म और पसंदीदा किरदार कौन है.
मैं हम आपके हैं कौन को आज भी जब भी देखता हूं तो खुशी होती है कि मैं इस फिल्म का हिस्सा हूं. चूंकि जिस संस्कार को, फैमिली बांडिंग में मैं रहा हूं. यह फिल्म उन सारी चीजों को दर्शाती है. इसके अलावा मुझे अपना वेडनेस डे का किरदार, अभी जो स्पेशल 26 में किरदार है वह, दिल फिल्म का किरदार सब काफी पसंद है.
इन दिनों खलनायकों की भूमिका में कम नजर आ रहे हैं आप?
दरअसल, आपका प्रश्न यह होना चाहिए था कि मैं फिल्मों में ही इन दिनों कम नजर आ रहा हूं. अब वह दौर नहीं कि मुझे जो पसंद न हो. वह भी काम करूं. सो, मैं चूजी हो चुका हूं, वैसे भी फिल्मों से इतर मेरी एक दुनिया है. जिसमें मैं बेहद खुश हूं.
आप खुद को पारिवारिक व्यक्ति मानते हैं. इतने व्यस्त होने के बावजूद परिवार के लिए कितना वक्त निकाल पाते हैं?
यह तो आपको किरन ने पूछना चाहिए.
किरन खेर फिल्मों से अधिक टीवी में सक्रिय हैं. तो बतौर अभिनेता या गाइड आप उन्हें भी कुछ गाइड करते हैं?
अरे वह मेरी स्टूडेंट नहीं मेरी बीवी है. हां, यह जरूर है कि जब वह मुझसे कुछ डिस्कस करती है. तो मैं अपनी राय देता हूं. वैसे वह जो भी निर्णय लेती हैं सही ही लेती हैं. काम को एंजॉय करना बेहद जरूरी है. और कम समय में उन्होंने अपने जितने फैन बना लिये हैं. इतने सालों में तो मेरे भी नहीं हुए.
आप जिस फिल्म ( सिल्वर लाइनिंग प्लेबुक) का हिस्सा है, वह आॅस्कर में मनोनित हुई है. कैसा महसूस कर रहे हैं आप?
मेरे दोस्त अनिल कपूर स्लमडॉग के वक्त आॅस्कर का हिस्सा बने थे. अब मेरी बारी है. मैं बेहद खुश हूं कि इस फिल्म से जुड़ने का मौका मिला. मैं बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहा हं. फिलहाल कुछ खास तैयारी नहीं है. नर्वस हूं मैं.
आपकी आनेवाली फिल्में?
चश्मे बद्दूर.



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