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20160513

क्योंकि सास नहीं बहू नहीं ... कहानी बनी कहानी घर-घर की...


एकता कपूर टेलीविजन की क्वीन हैं. उन्होंने महज 14 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी और फिर एक लंबे सफर को तय कर उन्होंने अपना साम्राज्य फैलाया. लोग कई तरह से उनकी आलोचनाएं करते हैं. लेकिन इन बातों से बेफिक्र उन्होंने अपनी पहचान बनायी. उनके ड्रामा और टेलीविजन शोज को देख कर भले ही लोगों के जेहन में यह बातें हों कि वे सिर्फ सास-बहू के शोज गढ़ने में ही माहिर हैं. लेकिन उनकी जिंदगी का एक अहम पहलू यह भी है कि वे अपने साथ काम कर रहीं क्रियेटिव महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही हैं. यही नहीं वर्तमान दौर में कई महिला क्रियेटिव प्रोडयूसर नये आइडियाज के साथ छोटे परदे पर कमान संभाल रही हैं . वे सिर्फ निर्माता नहीं बल्कि रचियता भी हैं, जो नये कांसेप्ट गढ़ रही हैं. 


 सोनाली जाफर ( बहू हमारी रजनीकांत) रोबोटिक बहू का हिट फार्मूला
सोनाली जाफर ने लंंबे अरसे तक एकता कपूर के साथ बालाजी प्रोडक् शन में काम किया है. वे पेशे से पहले पत्रकारिता के क्षेत्र में थीं. लेकिन उन्हें अपनी क्रियेटिविटी को दर्शाना था और ऐसे में उन्हें एकता कपूर का साथ मिला. सोनाली जाफर बालाजी प्रोडक् शन के कई हिट शो के साथ काम किया और इन दिनों बतौर निर्माता बहू हमारी रजनीकांत से जुड़ी हैं. बहू हमारी रजनीकांत ने कम ही समय में दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है. वजह यह है कि यह अन्य सास-बहू शोज से बिल्कुल अलग है. शो के नाम में बहू का जिक्र है. लेकिन यह सास बहू सागा बिल्कुल नहीं. यह सोच ही अपने आप में अदभुत और अद्वितीय है कि सोनाली ने यह सोचा कि आमतौर पर समाज की हर बहू से बहुत आशाएं होती हैं. हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी बेटी परफेक्ट हो न हो. बहू परफेक्ट ही होनी चाहिए. लेकिन एक आदर्श बहू के सारे गुण किसी एक लड़की में होना संभव ही नहीं है, चूंकि अगर किसी एक बहू में सबकुछ हो तो वह इंसान नहीं मशीन ही होगी.जो सबको खुश रख सकेगी. इस शो में रजनी बार बार यह दोहराती है कि मुझे बुरा नहीं लगेगा...मुझमें यह फीचर्स है ही नहीं. कई मायनों में सोनाली व्यंग्यात्मक तरीके से दर्शकों को समझाने की कोशिश कर रही हैं कि एक बहू इंसान है तो उसे भी चीजें बुरी लग सकतीं. अगर बुरी नहीं लगे तो वह मशीन ही है. शो का यह अलग कांसेप्ट ही शो की यूएसपी है और यही वजह है कि सोनाली के इस शो को लगातार सफलता मिल रही है. उन्हें टेलीविजन को लंबे अरसे के बाद एक ताजगी दी है.
निवेदिता बासु ( मेरी आवाज ही पहचान है) 
निवेदिता बासु भी लंबे समय से बालाजी प्रोडक् शन से जुड़ी रही हैं और उन्होंने हाल ही में मेरी आवाज ही पहचान है नामक शो से अपने प्रोडक् शन हाउस की शुरुआत की. खास बात यह है कि उन्होंने भी सास-बहू सागा चुनने की बजाय दो ऐसी बहनों की कहानी चुनी, जो एक ही क्षेत्र में होने के कारण एक दूसरे की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी हैं. हालांकि इस शो को लेकर काफी चर्चा रही कि यह शो मशहूर गायिका लता मंगेशकर और आशा भोंसले की जिंदगी पर आधारित है. लेकिन कभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई. इस शो की खासियत यह है कि इसे पारंपरिक रूप प्रदान किया गया है. पल्लवी जोशी, दीप्ति नवल, जरीना वहाब जैसे वरिष्ठ कलाकार शो का हिस्सा हैं. इस शो की कहानी ने भी छोटे परदे को नयापन दिया है. निवेदिता ने भी दर्शकों की नब्ज को समझा है और विषयपरक शो लाकर साबित किया है कि छोटे परदे पर भी अच्छी कहानियां कही जा सकती है. इस शो के लोकेशन्स, कलाकारों के परिधान सबकुछ विषय के अनुसार मुनासिब नजर आते हैं. शायद यही वजह है कि धीरे-धीरे ही सही दर्शकों तक यह कहानी पहुंच रही है.
 भागे रे मन( मीतू) 
जिंदगी पर कुछ महीने पहले प्रसारित होने वाले शो  भागे रे मन ने दर्शकों का दिल जीता. इस शो में एक ऐसी महिला की कहानी दिखायी गयी, जिसे अपनी जिंदगी किसी और की मरजी से नहीं जीनी थी. सो, वह अपनी शादी से भाग जाती है. और पूरी दुनिया की सैर करके वापस अपने घर आती है तो किस तरह उसका नजरिया बदलता है. इस शो की सबसे खास बात यह थी कि इस शो की निर्माता मीतू ने शो के लिए किसी ऐसे कलाकार का चयन बतौर लीड नहीं किया, जो हमेशा लीड किरदारों में नजर आती रही हैं. बल्कि उन्होंने करुणा पांडे को चुना, जो टेलीविजन पर लंबे अरसे से जुड़ी रही हैं. मगर वे सहयोगी कलाकारों में नजर आती थीं. पहली बार मीतू ने उन्हें इस तरह का किरदार निभाने का मौका दिया तो करुणा पांडे ने कमाल कर दिया. वे बेहद स्वाभाविक तरीके से अपना किरदार निभाती गयीं और दर्शकों की चहेती बनीं. इस शो ने भी वाकई दर्शकों को ताजगी दी. फिलवक्त शो ने सीजनल ब्रेक लिया है. लेकिन उम्मीदन शो की जल्द ही वापसी होगी.
अरुणा ईरानी के भी  रहे सार्थक कदम
अरुणा ईरानी बेहतरीन अभिनेत्री तो रही ही हैं. लेकिन छोटे परदे पर भी बतौर महिला निर्मात्री उन्होंने  एक अलग मुकाम हासिल किया है. उन्होंने एक दौर में मेहंदी तेरे नाम की जैसे शो का निर्माण किया था. इस शो में एक ऐसी लड़की की कहानी थी, जो अपने पैरों से लाचार थी. लेकिन उसे अपनी जिंदगी जीने का मौका किस तरह एक मां देती है और अपनी बेटी के साथ खड़ी रही थी. यह शो की कहानी थी. इस लिहाज से अरुणा ईरानी ने भी एक नयी सोच दी थी.
ममता यश पटनायक
ममता यश पटनायक भी बतौर लेखिका व प्रोडयूसर अलग तरह के कांसेप्ट लेकर आ रही हैं. उनका वर्तमान शो कुछ रंग प्यार के ऐसे भी अलग तरह की प्रेम कहानी है और दर्शकों को शो पसंद आ रहा है. उनका सुपरहिट शो वीरा भी काफी लोकप्रिय रहा.
सृष्टि आर्या
सृष्टि आर्या ने भी टेलीविजन को कई नये शोज दिये हैं. कहता है दिल जीले जरा...जैसे शो में उन्होंने एकरूपता वाली कहानी को न दर्शाते हुए अलग तरह की कहानी चुनी.

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