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20121208

डांस की एबीसीडी



पिछले कुछ सालों में रियलिटी शोज ने डांस को परफॉरमेंस का एक अहम जरिया बना दिया है. डांस के नये स्वरूप, नये कलाकार और नये गुरु सभी लोकप्रिय हैं. फिल्मों में भी अब केवल सरसो के खेत में या किसी पेड़ के पीछे आम डांस नहीं हो रहे. हर फिल्म में आयटम या अभिनेत्री या अभिनेता अपने लिए खास गीत फिल्मा रहे हैं, जिनमें उन्हें अपनी डांसिंग प्रतिभा को दिखाने का मौका मिले. और शायद इसी जुनून ने कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा को भी फिल्म एनी बडी कैन डांस जैसी फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया है. भारत में एबीसीडी पहली फिल्म होगी, जो पूरी तरह से डांस पर आधारित होगी और जिसमें हिंदी सिनेमा जगत के सारे महारथी कोरियोग्राफर एक साथ नजर आयेंगे. यह फिल्म 3डी में बन रही है. फिल्म का प्रोमो ही दर्शा रहा है कि फिल्म किस स्तर की है. पिछले कुछ सालों में रियलिटी शोज ने निकली जितनी प्रतिभाओं को डांस फॉर्म में हुनर दिखाने का मौका मिला है. शायद किसी और टैलेंट में मिला हो. फिर चाहे वह सलमान हो, शक्ति मोहन, धर्मेश, या फिर झलक दिखला जा के सारे कोरियोग्राफर. दरअसल, हिंदी फिल्मों को आज ऐसे हुनर की जरूरत है. रेमो  डांस को जीते हैं और यह उनकी फितुर का ही नतीजा है कि उन्होंने अपनी ही शैली में जैक आॅफ आॅल बनने की बजाय मास्टर आॅफ वन बन कर खुद को साबित करने की कोशिश की है. वर्ष 2006 में हॉलीवुड निर्देशक एने फ्लेचर ने स्टेप अप नामक कुछ ऐसी फिल्म बनाई थी, जिसका केंद्र विषय भी डांस ही था. किसी दौर में वी शांताराम की फिल्म गीत गाया पत्थरों ने, नवरंग जैसी फिल्मों में डांस का वह जुनून और खूबसूरती नजर आती थी.मुमकिन हो कि भविष्य में भी ऐसे विषयों के साथ फिल्मों में प्रयोग किये जायेंगे.विदेशों में तो ऐसी कई फिल्में बनती रही हैं.

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