20151216

अभिनय जिंदगी से हमेशा जुड़ा रहेगा


मशहूर अभिनेत्री सारिका अब भी मानती हैं कि अभी ऐसे कई किरदार हैं जिन्हें उन्होंने नहीं निभाया है। वे हर तरह के जॉनर में काम करना चाहती हैं। और वे स्पष्ट रूप से कहती हैं कि उनके लिए टीवी या फिल्म कोई भी माध्यम हो सकता। तभी तो वह तवज्जो परफॉरमेंस को देती हैं। धारावाहिक युद्ध के बाद वे हाल ही में डर सबको लगता है का हिस्सा भी बनी। 

हाल में आप डर सबको लगता है का हिस्सा बनी। इससे पहले आपने टीवी के लिए युद्ध शो किया था। तो इन धारावाहिकों में ऐसी क्या खास बात नजर आयी?
दरअसल ऐसा नहीं है कि मैंने खुद को सीमित कर रखा है कि मुझे टीवी में नहीं सिर्फ फिल्मों में काम करना है।मैंने कभी माध्यम नहीं बांटा। जब जैसे अवसर मिले मैंने काम किया।और आगे भी करती रहूंगी। युद्ध का कॉन्सेप्ट मुझे बहुत अच्छा और अलग लगा था। और इसी वजह से मैंने शो को हां भी कहा था। जितनी मेहनत करते मैंने वहां लोगों को देखा। मैं इस बात से हताश हुई कि दर्शकों कप वह शो पसंद नहीं आया।लेकिन वह एक बेहतरीन शो था। इसी तरह जब मुझे दर सबको लगता है का ऑफर आया तो मैंने तुरंत हां कहा। साथ ही एक वजह यह भी थी कि मेरे लिए मेरे निर्देशक मैटर करते हैं। सौमिक जिन्होंने दर सबको लगता है का वह एपिसोड निर्देशित किया था। उन्हें में काफी सालों से जानती हूं और मैं जानती हूं कि वह अच्छा काम करते हैं तो ऐसे लोगों से सीखने का बहुत मौका मिलता है।
आपने खुद भी कई हॉरर फिल्मों में काम किया है। उस दौर में और अबके दौर में इस जॉनर में बनने वाली फिल्मों या धारावाहिकों में क्या बदलाव देखती हैं?
मुझे लगता है कि हर स्तर पर बदलाव आये हैं।उस दौर में सारी फिल्मों की कहानी एक सी होती थी। लेकिन मुझे लगता है कि उस दौर में वही सब कुछ चलता था।उस दौर में रामसे ब्रदर्स वैसी फिल्में भी बना पाएं यह बड़ी बात थी।चूंकि उस वक़्त तकनीक इतनी तरक्की नहीं कर पायी थी। उस दौर में रामसे ब्रदर्स की फिल्मों से लोग डरे यह बड़ी बात है।मुझे याद है हम काफी मस्ती भी किया करते थे। उस वक़्त अधिक मेहनत नहीं करनी होती थी। हम सिफोन साड़ियां पहनकर दौड़ते रहते थे और काम हो जाता था। मजेदार खाना मिलता था अयर बड़ा मज़ा आता था। मैंने तीन फिल्मों में काम किया जो हॉरर जोनर की थी। उस वक़्त लोग उसे बी ग्रेड की फिल्में मानते थे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसे बी ग्रेड फिल्मों की तरह देखा जाना चाहिए। चूंकि उस वक़्त साधन सीमित थे।और फिर भी लोगों ने फिल्में बनायी भी और लोगों को डराया भी। आज के दौर में लोग स्मार्ट हो गए हैं। एक्सपोजर उनका बढ़ा है। जाहिर है आज हॉरर जॉनर के मेकर्स के लिए बड़ी चुनौती है कि वे किस तरह कुछ नयी चीजें दिखाई जाये।कुछ नयी कहानी  कहनी जरूरी है। साथ ही यह भी आज ध्यान रखना जरूरी है कि हॉरर फिल्म कहीं कॉमेडी न बन जाये, क्योंकि आजकल दर्शक कई चीजें देखते हैं और वे सारी हकीकत और तकनीक से वाकिफ होते हैं। आप उन्हें चीट नहीं कर सकते।तो आपको हर तरह से अलर्ट रहना होगा। वैसी स्तरीय चीजें परसोनी होगी।
आपकी छोटी बेटी अक्षरा ने हाल ही में अपने करियर की शुरुआत की है। उनके काम से कितनी संतुष्ट हैं आप?
मैं अपने बच्चों के काम में बिल्कुल दखल नहीं देती और न ही मैं कभी उन्हें कोई सलाह देती हूं। मुझे खुशी है कि वह अपनी राह खुद तैयार कर रहे हैं। उन्हें किसी तरह की सलाह की जरूरत नहीं होती।साथ ही वे बहुत स्मार्ट होते और खुद दुनिया को मुठ्ठी में लेकर चलते हैं। मुझे खुशी है कि छोटी उम्र से ही अक्षरा ने खुद को पैरों पर खड़ा करना सीख लिया है। उसे पहली ही फिल्म में  बेहतरीन कलाकारों अमिताभ बच्चन और धनुष के साथ काम किया। उसकी शुरुआत बहुत अच्छी हुई है और पूरी उम्मीद है कि आगे भी वह अच्छा काम करेगी।  मैं उन्हें किसी बजि तरह से गाइड नहीं करती। और मैं उन्हें बस एक ही सलाह देती हूं कि उन्हें बस काम करने की जरूरत है। लेकिन उनके मन लायक काम।
आपने हाल ही में हॉरर शो में काम किया वास्तविक जिंदगी में कभी किसी हॉन्टेड जगह में वह डर महसूस किया?
सच कहूं तो मैंने कई हॉरर फिल्मों में काम भी किया है लेकिन मुझे कभी उन चीजों से डर नहीं लगा। लेकिन मैं मानती हूं कि कोई शक्ति होती है।अगर ईश्वर है वो भी है।लेकिन ये इन सारी बातों पर निर्भर करता है कि आप उस नेगेटिव एनर्जी को कितना अपने पास बुलाते हैं। आप जितना डरेंगे वह एनर्जी आपको उतनी ही परेशान करेगी। इन सारी बातों को कहने का यह मतलब नहीं कि मैं अंधविश्वासी हूं। हॉन्टेड जगहों पर मुझे ये बात जरूर महसूस होती है कि वहां नेगेटिव एनर्जी होती है और आप कभी कभी वहां असहज भी महसूस करने लगते हैं। कोई कारण हो या न हो।
क्योंकि यह हकीकत है कि दर सबको लगता है।
आपकी पसंदीदा हॉरर फिल्में कौन कौन सी रही हैं
मुझे हेलेन और मेहमूद साहब की गुमनाम पसंद है। इसके अलावा वो कौन थी की कहानी बेहद पसंद है।इन सारी फिल्मों में बहुत अच्छी कहानियां रही हैं। अधिकतर हिंदी फिल्मों में जहां तक में समझती हूं कहानियों में हॉरर के साथ साथ थ्रिलर का भी अंगले अवश्य रहा है इसलिए हम हर फिल्म को हॉरर नहीं बोल पाते। लेकिन फिल्म अंतिम तक हॉरर फिल्मों के रूप में रहती है तो दर्शक काफी डरते भी हैं लेकिन बाद में फिल्म थ्रिलर बन जाती है। इसलिए लोग अब तक हॉरर और थ्रिलर को कैतेग्राईज़ नहीं कर पाये हैं।
टीवी पर किसी हिंदी शो को फॉलो करती थीं आप?
नहीं मैं ईमानदारी से कहूंगी कि हिंदी टीवी मैं नहीं देखती। हां मगर में अंगरेजी शो बहुत फॉलो करती हूं।टू डिटेक्टिव मेरा पसंदीदा शो है।में चाहती हूं कि कुछ वैसा काम हमारे टीवी में भी हो तो मैं जरूर करना चाहूंगी।
एक्टिंग के अलावा kin चीजों में दिलचस्पी रही है।
मुझे पेरफोरमंस वाली सारी विधाएं पसंद हैं और मुझे मौका मिले। अच्छे काम मिलें तो मैं इस दुनिया से कभी दूर नहीं हो सकती हूं। मेरे लिए परफॉर्मेंस का माध्यम महत्वपूर्ण है।

परिणीति का नया अवतार


परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपना काफी वजन कम किया है और वह लगातार कई हेल्थ मैगजीन के कवर पर नजर आ रही हैं. उनके इस अवतार पर बॉलीवुड की कई कमसीन हसीनाओं और उनकी समकक्ष अभिनेत्रियां उन्हें लगातार बधाई दे रही हैं कि उन्होंने अपना वजन काफी कम कर लिया है और वह इस नये अवतार में कमाल की लग रही हैं. लेकिन इसके साथ ही हकीकत यह भी है कि परिणीति इन दिनों फिल्मों में कितनी नजर आ रही हैं. जब उन्होंने बॉलीवुड में दस्तक दी थी. उस वक्त उन्होंने कम वक्त में ही संभावनाएं जगाई थीं, कि वह लीक से हट कर रानी मुखर्जी सरीके अभिनय से दर्शकों को प्रभावित करेंगी. लेकिन अचानक ही उन्होंने किसी और तरफ रुख किया है. मुमकिन है कि उन्हें ऐसा उनके मेंटर आदित्य चोपड़ा ने कहा हो और उनके साथ एक फिल्म में काम कर चुकीं वाणी कपूर को जैसे उन्होंने अपनी नयी फिल्म में अभिनेत्री चुना है. परिणीति के लिए भी उन्होंने कुछ सोच रखा हो. परिणीति ने अपने करियर की शुरुआत पीआर के रूप में की थी और उन्होंने अभिनय को लेकर कभी योजना नहीं बनाई थी. इस लिहाज से उन्होंने जो कुछ अब तक हासिल किया है. वह बेहतरीन है. लेकिन साथ ही साथ एक हकीकत यह भी है कि परिणीति ने खुद को पूरी तरह से बदलने का निर्णय आखिर क्यों लिया. उन्होंने विद्या बालन की तरह रास्ता इख्तियार करना क्यों असहज लगा कि वह अपने किरदारों पर विशेष ध्यान देतीं. न कि अपनी शारीरिक बनावट पर. दरअसल, बॉलीवुड ने उन्हें बदलने पर मजबूर किया है. यहां सारी अभिनेत्रियां जब परदे पर नजर आती हैं, तो एक ही समान नजर आती हैं. खुद वहीदा रहमान ने यह बात स्वीकारी है कि आज के दौर में सारी अभिनेत्री एक ही कद काठी की नजर आती हैं. ऐसे में परिणीति का यूं बदलना भी स्वाभाविक ही है.

स्वरा कीप वॉकिंग


स्वरा भाष्कर इन दिनों फिल्म अनारकली आरावाली की शूटिंग कर रही हैं. वे फिल्म में लीड किरदार निभा रही हैं. अपने सोशल साइट्स पर वे फिल्म की शूटिंग की कुछ झलकियां व तसवीरें शेयर कर रही हैं. फिल्म में उनके साथ संजय मिश्रा जैसे सीनियर और प्रबुद्ध कलाकार भी हैं. लेकिन खुद संदजय मिश्रा ने स्वरा के बारे में अपने फेसबुक स्टेटस में यह लिखा कि स्वरा उनके लिए अभिनय की नयी इंस्टीटयूशन हैं और उनसे वे काफी कुछ नया सीख भी रहे हैं. स्वरा ने अपनी शुरुआत माधवलाल कीप वॉकिंग से की थी और वे लगातार कई फिल्मों का हिस्सा बन रही हैं. खास बात यह है कि स्वरा ने ग्लैमर और फंैटेंसी गुड़ियों के बीच भी अपनी अलग जगह बनाई है और अपने अंदाज में बनाई है. फिल्म रांझणा में वह भी एक रांझणा की ही भूमिका में थीं, जो कुंदन के प्यार में पागल थी. उन्होंने प्यार में पड़ी पागल प्रेमिका का किरदार निभा कर सबको मोहित किया. इसी फिल्म से वह सोनम के करीब आयीं और सोनम खुद स्वीकारती हैं कि उन्हें स्वरा से बातें करने में मजा भी आता है और वह खुद को सेक्योर भी महसूस करती हैं.फिल्म प्रेम रतन धन पायो ने दोनों ने फिर से साथ काम किया था. सलमान और सोनम जैसे सितारों के बावजूद आप इस फिल्म में स्वरा के अभिनय को नजरअंदाज नहीं कर सकते. यही उनकी काबिलियत है. उनके नजदीकी बताते हैं कि वे काफी समझदार और देश दुनिया के बारे में जानकारी और अपना नजरिया रखने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं. इस लिहाज से स्वरा ने कीप वॉकिंग से जिस सफर पर चलने की शुरुआत की थी.धीरे धीरे वे नयी दिशा दे रही हैं और बॉलीवुड को अब यह समझना होगा कि स्वरा जैसी अभिनेत्री के लिए अनारकली आरावाली जैसी फिल्मों के किरदार लिखे जायें. चूंकि उनमें इस तरह के विषयपरक किरदार निभाने की पूरी क्षमता नजर आती है. स्वरा के अभिनय के स्वर यूं ही बरकरार रहने चाहिए. वे धीरे धीरे ही सही लेकिन खास पहचान बना रही हैं, और जिस तरह के विषयों का वह चुनाव कर रही हैं.वे जल्द ही खास तरह के सिनेमा की पहली पसंद बनती जायेंगी. इसकी पूरी संभावनाएं हैं. 

नए कलाकार और म्यूजिक अल्बम


टी सीरीज ने फिर से एक नयी शुरुआत की है। एक बार फिर से वे एल्बम मेकिंग पर विशेष रूप से कार्य कर रहा। हाल ही में सोनू निगम एक नए एलबम के साथ आये हैं। उनके गाने यू ट्यूब पर काफी पसंद भी किये ज रहे हैं। यह हकीकत है कि सोनू निगम सारेगामा से अपनी पहचान बनायी। लेकिन वे दर्शकों के चहेते अपने म्यूजिक वीडियो एल्बम की वजह से ही बने। सोनू निगम एक दौर में किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं थे। उनकी लड़कियों की फैन फॉलिंग बेहद खास थी। उस दौर में उनके वीडियो कसेट काफी महंगे दामों में बिकते थे। उसी दौर में बिपाशा बसु को भी बड़े मौके मिले। निश्चित तौर पर उस दौर के म्यूजिक वीडियो के सुपरस्टार रहे कलाकार वह दौर मिस करते होंगे। लेकिन टी सीरीज ने फिर से उन्हें सांस लेने के मौके दिये हैं। टी सीरीज प्रमुख का मानना है कि नए कलाकारों को मौके देना बेहद जरूरी हैं। और सभी को फिल्मों में मौके देना और वह भी एक साथ यह संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने तय किया है कि एक बार फिर से वे इस माध्यम को प्रोत्साहित करेंगे। और इसी क्रम में उन्होंने शुरुआत की है। ऋतिक रोशन और सोनम कपूर के वीडियो गीत काफी पसंद भी किये गए हैं। आने वाले समय में नयी प्रतिभाओं को मौके देने के लिए यह सहायक होंगे।सो बेहद जरूरी है कि बाकी प्रोडक्शन हाउस को भी इस तरीके की शुरुआत करनी ही चाहिए। ताकि नई प्रतिभाओं को अधिक अवसर मिले। सनम, बादशाह, हनी सिंह जैसे नाम टी सीरीज की वजह से बड़े नाम बने हैं। बड़े निर्देशक भी पहले की तरह अगर वीडियो निर्माण में फिर से आएं तो नई प्रतिभाएं अधिक प्रोत्साहित होंगी। सो इंटरनेट वीडियो के रूप में भी इसे बढ़ाना जरूरी है।

20151130

एक महत्वपूर्ण विषय पर बनी हैं एयरलिफ्ट : अक्षय कुमार


 अक्षय कुमार फिल्म एयरलिफ्ट से एक अलग तरह की कहानी कहने दर्शकों के सामने आ रहे हैं. हाल ही में मुंबई के फिल्मीस्तान स्टूडियो में स्थित सेट पर अक्षय कुमार से  बातचीत हुई. उन्होंने फिल्म के विषय व कई पहलुओं पर खास बातचीत की.

 अक्षय, एयरलिफ्ट की कहानी का विषय बिल्कुल अनसुना सा है. जबकि यह उस दौर की बड़ी खबरों में से एक रही होगी?
जी हां, यह उस दौर की बड़ी खबरों में से एक थी. लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि इस घटना की चर्चा उस दौर में भी न तो किसी अखबार में थी. न ही किसी चैनल पर दिखाई गयी थी. इसके पीछे वजह यही थी कि इस घटना से संबंधित राजनैतिक इश्यू बहुत थे. उस दौर में हम सद्दाम हुसैन के नजदीक थे. तो यह खबर दबा दी गयी थी.वरना, उस दौर में आम सिविलियन   1लाख 70 हजार से अधिक लोगों को बचा कर ले आते हैं. वह भी 59 दिन में और इतनी बड़ी खबर लोगों को पता ही नहीं. हाल ही में यमन की खबर के बारे में सभी जानते हैं. लेकिन इस खबर के बारे में किसी को जानकारी नहीं. तो मुझे लगा कि यह कहानी दर्शकों के सामने तो आनी ही चाहिए.
अगर अधिक दस्तावेज मौजूद नहीं हैं तो रिसर्च करने में परेशानी तो आयी होगी?
खास बात यह है कि हमारे निर्देशक के कई रिलेटिव्स उस दौर में इस घटना में फंसे थे. वे लोग केरल से हैं और उन्होंने इसके बारे में सारी जानकारी दी तो हम सच्चाई के बहुत करीब इसी वजह से पहुंच पाये हैं.
फिल्म में हमने सुना है गाने भी हैं.ऐसी गंभीर फिल्म में गानों की गुंजाईश बनती है?
यह फिल्म गंभीर होने के साथ साथ इमोशनल फिल्म भी है. और इमोशन को दिखाने के  िलए गानों की जरूरत होती ही है. टीसीरिज के भूषण ने चार गाने दिये हैं और बेहतरीन गाने हैं. इमोशनल गाने हैं. दर्शकों को पसंद आयेंगे.
आपने कहा कि उस दौर में पॉलिटिकल इश्यू की वजह से यह खबर दब गयी थी. तो अब जबकि यह फिल्म आ रही है तो कहीं न कहीं उन्हें परेशानी नहीं होगी?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो हर किसी के पास है. आप लोगों को भी मनाही के बावजूद आप वही लिखते हैं. जो आप लिखना चाहते हैं. तो फिर उस वक्त भी तो कोई कुछ कर नहीं पाता. स्पष्ट है कि हम हकीकत पर आधारित रियल स्टोरी दिखा रहे हैं. जाहिर है, हम झूठ का सहारा नहीं ले रहे और न ही किसी पब्लिसिटी के लिए कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं तो मुझे नहीं लगता कि कोई परेशानी होनी चाहिए. यह एक देशभक्ति की फिल्म है कि किस तरह तीन आम लोगों ने मिल कर जो कि एक बिजनेसमैन थे लेकिन ेदश के लिए इतना बड़ा कदम उन्होंने उठाया. और उसे सफल करके दिखाया.
फिल्म में उस दौर को क्रियेट करना कितना कठिन रहा?
यह जिम्मेदारी निर्देशक ने ही उठायी है. हां, मगर मैंने अपने लुक में और अभिनय में वैसी चीजें रखने की कोशिश की है कि वह इस दौर का नजर न आये. कई विटेंज चीजों का इस्तेमाल हुआ है.
अक्षय, आप सिंह इज ब्लिंग, हाउसफुल जैसी फिल्में भी करते हैं फिर बेबी, हॉलीडे जैसी भी करके लोगों को चौंकाते हैं. आपको खुद का कौन सा किरदार अधिक पसंद है?
मैं तो हर तरह के किरदारों को निभाने में यकीम रखता हूं. जैसे मैं सिर्फ बेबी जैसी फिल्में भी नहीं करते रह सकता. चूंकि यह फिल्में काफी गंभीर हो जाती हैं तो फिर मुझे ब्रेक की जरूरत हो जाती है. अभी मैं एयरलिफ्ट की शूटिंग खत्म करके हाउसफुल 3 की शूटिंग में लग जाऊंगा और मैं काफी खुश रहूंगा चूंकि वैसी फिल्मों में भी अलग मस्ती होती है और हम तो काफी मजे भी कर रहे हैं वहां.तो मुझे हर तरह के किरदार चाहिए.
इनटॉलरेंस को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. आपकी क्या राय है?
मैं तो बस इतना जानता हूं कि शूटिंग  कहीं भी करूं. मुझे अपने देश मुंबई लौटने में काफी खुशी मिलती है. मैं कोई हॉलीवुड की फिल्में नहीं कर रहा. न ही दिलचस्पी है . क्योंकि मुझे मेरे वतन से प्यार है. और मैं खुश हूं.
इस दौर में आकर जबकि आप सुपरस्टार हैं, सबकुछ हासिल कर लिया है. फिर भी चुनौती क्या लगती है?
मैं कुछ सालों में 50 साल का हो जाऊंगा. तो इस वक्त भी खुद को फिट रखना, अच्छा काम करना. लगातार खुद को मांझना, लगातार मेहनत करना और अपना 100 प्रतिशत देना कठिन है. अच्छा लगता है जब कोई 27 साल का व्यक्ति आकर मुझे बोले कि मैं उनसे अधिक फिट नजर आता हूं. तो यह चुनौती है कि दर्शकों की डिमांड पर मैं किस तरह खरा उतरूं. 

सेलिब्रिटीज और विवाद


आमिर खान ने हाल ही में एक बयान दिया है, जिसे लेकर देशभर में उनका विरोध हो रहा है. यह पहली बार नहीं, जब किसी सेलिब्रिटी को उनकी बयानबाजी के लिए इस तरह के विरोध का सामना करना पड़ा हो.


आमिर खान का विरोध
आमिर खान ने हाल ही में एक अवार्ड समारोह में कहा कि मेरी पत् नी किरण राव इस देश की परिस्थिति को लेकर चिंता में रहती है और जब वह मुझसे कभी यह सवाल करती है कि क्या हमें यह देश छोड़ना पड़ेगा तो मैं किरण के ऐसे सवालों को लेकर अचंभित हो जाता हूं. आमिर ने अपनी चिंता व्यक्त की और इसे लेकर देशभर में उनका विरोध हो रहा है. उन्हें टिष्ट्वटर पर तरह तरह के ताने सहने पड़ रहे हैं. खुद फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग उनकी ऐसी बयानबाजी पर नारे लगा रहे हैं, जिनमें अनुपम खेर और परेश रावल प्रमुख  हैं. यहां तक कि ऋषि कपूर ने उनके विरोध में भाषणबाजी की है. वही रणबीर कपूर ने उन्हें सपोर्ट किया है. आमिर खान के घर के बाहर काफी विरोध हो रहा है. कई राजनैतिक पार्टियां उन्हें बार बार परेशान कर रही हैं.
एआर रहमान
कुछ महीनों पहले एआर रहमान के भी बयान पर उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. और एक बार फिर एआर रहमान ने आमिर को सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा है कि वे भी आमिर की तरह ही सोचते हैं. उन्होंने भी परेशानी झेली है. उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन हिंसा के साथ नहीं लड़ा जाना चाहिए. आखिर हम महात्मा गांधी के देश से हैं और उन्होंने हमें सिखाया है कि किस तरह हिंसक न बने. लेकिन आज परिस्थिति बहुत अलग है.
सलमान खान का विरोध
हाल ही में सलमान खान ने यकूब मेनन की फांसी पर कुछ बयानबाजी की थी. जिसका अभिप्राय लोगों ने यह लगा लिया कि सलमान नहीं चाहते कि यकूब को फांसी हो. उन्हें गद्दार और कई नामों से पुकारा गया. उनके देश से निकाले जाने की बात उनके ही फैन्स ने की. बाद में काफी मुश्किलों से यह विवाद शांत हुआ.
शाहरुख खान
हाल ही में शाहरुख खान ने अपने जन्मदिन के मौके पर इनटॉलरेंस को लेकर काफी बातचीत की. लेकिन शाहरुख खान की पूरी बातचीत को सुने बगैर ही उन पर काफी विवाद होने शुरू हो गये. एक पाकिस्तानी राजनेता ने जब उन्हें अपने देश आने का बुलावा भेजा तो विवाद ने और अधिक तूल पकड़ ली थी. सोशल साइट्स पर शाहरुख को काफी नाराजगी झेलनी पड़ी. लेकिन यह शाहरुख की खूबी है कि वह अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. उन्होंने इस विषय पर अपनी राय यह रखी थी कि देश में कला को सम्मान मिलना चाहिए और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस धर्म के हो या कहां से आये हो. लेकिन लोगों ने बिना पूरी बात जाने उन पर बहस शुरू कर दी थी.
तीनों खान बनते रहे हैं निशाने
यह हकीकत है कि बॉलीवुड में इन तीनों खानों को अधिकतर फोकस किया जाता रहा है. उनको निशाना बनाया जाता रहा है. इस वजह से एक विशिष्ट धर्म के लोग यह मान लेते हैं कि चूंकि वे उस धर्म से हैं इसलिए उन्हें परेशानियां होती हैं. सबसे बुरी स्थिति तब आती है, जब स्टार्स के घर पर जाकर लोग विवाद खड़ी करते हैं और उनके परिवार वालों को खरी खोटी सुनाने लगते हैं. इस बार आमिर की पत् नी किरण राव पर बहुत तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं. उनके बच्चों के बारे में कई बातें कही जा रही हैं. जाहिर है आमिर को यह बातें बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही होंगी. लेकिन उन्होंने अब तक इस बारे में कोई सफाई नहीं दी है. दुख की बात यह है कि इंडस्ट्री के कई लोग जिनमें अनुपम खेर, परेश रावल, राम गोपाल वर्मा जैसे नाम शामिल हैं. वे लोग आमिर के बारे में आग उगल रहे हैं. शाहरुख खान को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ी हाल में. उनके घर के बाहर भी काफी विवाद हुआ. यह पहली बार नहीं है जब सेलिब्रिटीज निशाना बनते रहे हैं. उनकी कही कोई भी बात को आम लोग अलग तरीके से लेते हैं और काफी हंगामा बरप जाता है. सेलिब्रिटीज को तो टिष्ट्वटर पर भी छोटी सी गलती के लिए काफी ताने सुनने पड़ते हैं . यही वजह है कि सेलिब्रिटीज आम मुद्दों पर बात नहीं करते. वे सिर्फ अपनी फिल्म पर ही बातचीत करना चाहते हैं.

दिल के करीब है लाजो : अंकिता


जीटीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक लाजवंती को दर्शकों का बेहद प्यार मिला है. उपन्यास पर आधारित किसी धारावाहिक को अरसे बाद इस तरह की प्रतिक्रिया मिली है. शो में लाजवंती का लीड किरदार निभा रहीं अंकिता का यह पहला शो है और वे अपनी पहली शानदार शुरुआत से काफी खुश हैं.
अंकिता, यह आपका पहला शो है. पहला मौका कैसे मिला?
मैं चंडीगढ़ से हूं और इस बात के बारे में जानती थी कि इस तरह के किसी शो का आॅडिशन होने वाला है. चूंकि मेरी भाषा को लेकर मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं थी. इस शो की यह डिमांड थी तो मैंने तय किया कि मैं आॅडिशन दूंगी. मैंने आॅडिशन दिया और उसके बाद भूल भी गयी थी. लेकिन बाद में मुझे प्रोडक् शन हाउस से फोन आया कि मेरा सेलेक् शन हो गया है और वह भी मुझे शो में लीड किरदार निभाने का मौका मिला है.
इस शो के किस तरह तैयारी की थी आपने?
मुझे बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हुई थी. क्योंकि मेरी भाषा पर अच्छी पकड़ है. और खास बात यह रही कि कास्टिंग होने के 20 दिनों के बाद हमने शूटिंग शुरू की थी. तो उन 20 दिनों में हमारा अच्छा वर्कशॉप हो गया था. सो, मेरे और मेरे को स्टार के बीच की केमेस्ट्री को अच्छा बनाने के लिए हम दोनों को एक दूसरे के साथ वक्त बिताने का मौका मिला. फिर इस शो से जुड़ी तो यह उपन्यास पढ़ी. यह एक बेहतर प्रेम कहानी के साथ साथ विभाजन के दौरान की स्थिति को खूबसूरती से दर्शाया गया है.
हमने सुना आपने अभिनय के लिए इंजीनियरिंग  छोड़ दी?
हां, क्योंकि मैं शुरू से एक्टिंग ही करना चाहती थी. और कुछ नहीं करना चाहती थी. तो मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है. मैंने एक शो भी जीता था एनडीटीवी का टिकट टू बॉलीवुड. उस वक्त से मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया था. हां, लेकिन मेरे पापा ने कहा कि तुम्हे जो करना है करो. लेकिन पहले पढ़ाई पूरी करो, क्योंकि मेरे घर में सभी बहुत पढ़े लिखे हैं. सो, इसलिए मैंने पहले पढ़ाई पूरी की. मेरे परिवार में सभी डॉक्टर हैं.
आपने कहा कि आपको एक्टिंग में हमेशा से दिलचस्पी रही तो आपने इसके लिए क्या तैयारियां बचपन से कर रखी थीं?
मैंने अपने शरीर का ख्याल रखा है. लुक का ख्याल रखा है. साथ ही मैंने क्लासिकल डांसिंग भी सीख रखा है. नेशनल लेवल पर भी मैंने काफी अवार्ड हासिल किये हैं. मैंने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई थी जो टोरंटो फिल्म फेस्ट में सेलेक्ट भी हुई थी. सो, मुझे पता था कि मैं अभिनय भी कर सकती हूं.
इस शो के लेखन से राजिंदर सिंह बेदी की पोती भी जुड़ी हुई हैं तो उनका सहयोग कितना मिलता है?
काफी मिलता है, वह हमें सारी बारीकियों से वाकिफ कराती है. इस शो की सबसे बड़ी चुनौती थी कि वह दौर क्रियेट किया जाये. लेकिन हमें बहुत सपोर्ट मिला जीटीवी का भी उन्होंने कोई बंदिशें नहीं रखी हैं. सो, सेट काफी अच्छा बना है. पीरियोडिक चीजें रचना तो कठिन होता ही है. लेकिन इला बेदी दत्ता के होने से हम विषय के साथ न्याय कर पा रहे हैं. इस बात को लेकर हम बिल्कुल स्पष्ट थे. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे पहला मौका ही इस तरह के शो से मिला है. चूंकि मैं हमेशा से इसी तरह के किरदारों को निभाना चाहती थीं.
लाजो से अंकिता कितना मेल खाती हैं?
हां, मैं लाजो जैसी ही हूं. आत्मविश्वास मेरा भी ऐसा ही रहा है. जैसा लाजो का रहा है. साथ ही मैं बातूनी भी काफी हूं.
इस इंडस्ट्री को जब नजदीक से जानने का मौका मिलेगा तो कैसा अनुभव महसूस कर रही हैं?
मुझे लगता है कि इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के बाद ही आपको पता चलता है कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है एक्टर्स को. लोग दूर से देख कर इसे सिर्फ ग्लैमर की दुनिया माने. लेकिन नजदीक जाकर ही जब अब काम कर रही तो पता चलता है कि काफी मेहनत करते हैं स्टार्स.