20140623

आवारी प्राची देसाई


्रप्राची देसाई को अब तक लोग गुडी गुडी गर्ल के रूप में जानते हैं.लेकिन फिल्म एक विलेन में वह आवारी आयटम नंबर कर रही हैं और अचानक से इस गाने से वह काफी चर्चा में आ गयी हैं. 
टेलीविजन से शुुरुआत
प्राची देसाई ने टेलीविजन से शुुरुआत की थी. एकता कपूर के शो कसम से में वह राम कपूर के अपोजिट थीं. धीरे धीरे उन्होंने अपने कदम बढ़ाये और रॉक आॅन फिल्म से उन्हें सफलता भी मिली. बाद में उन्हें कई फिल्में मिलीं. उनकी फिल्में वन्स अपन अ टाइम इन मुंबई और बोल बच्चन सुपरहिट फिल्में रही हैं.
स्वीट चेहरे से हुई दिक्कत
प्राची खुद मानती हैं कि उन्हें बॉलीवुड में एक्सपेरिमेंटल रोल नहीं मिल पाते. चूंकि उनका चेहरा स्वीट है तो निर्देशक उन्हें स्वीट फिल्में ही देना चाहते हैं. जबकि उनकी इच्छा है कि वह विद्या बालन की तरह के किरदार प्रमुख किरदार निभायें.हालांकि उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी है.
आवारी है खास
प्राची देसाई की हमेशा से इच्छा थी कि उन्हें मोहित सूरी के साथ काम करने का मौका मिले. चूंकि मोंिहत सूरी अपनी फिल्मों को लेकर अलग सोच रखते हैं. सो, दो साल पहले जब उन्हें आवारी गाने का आॅफर आया तो वह मान चुकी थीं कि वह आयटम नंबर आम आयटम नंबर से बिल्कुल अलग ही होगा और ऐसा ही हुआ भी है. इस आयटम नंबर में प्राची बिल्कुल अलग नजर आ रही हैं. वे काफी सेंसुअस नजर आ रही हैं और उन्हें इस गाने की वजह से काफी लोकप्रियता भी मिल रही है.उन्हें उम्मीद है कि अब इस गाने के बाद लोग उन्हें अलग तरह के किरदार भी आॅफर करेंगे.
आउटसाइर्ट्स के लिए संघर्ष
प्राची मानती हैं कि बॉलीवुड में आउटसाइडर्स के लिए काफी संघर्ष होता है. लोग माने या माने लेकिन एक आउटसाइडर को अपनी पहचान बनाने के लिए हर बार खुद को प्रूव करना होता है. एक फिल्म नाकामयाब हो जाये तो दोबारा काम मिलने में काफी परेशानी होती है. इंडस्ट्री का रवैया भी बदल जाता है. सो, बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए एक आउटसाइडर्स के एक्सट्रा आउटस्टैडिंग होना बेहद जरूरी है. 

किरदारों की भूखी हूं मैं : विद्या बालन


विद्या बालन को रिस्क लेना पसंद है. वह अपने किरदारों के लिए प्रयोग करती हैं. चूंकि उन्हें भूख है. भूख अभिनय की.भूख हर बार कुछ नया करने की. हिंदी सिनेमा की सबसे सशक्त अभिनेत्रियों में से एक विद्या एक बार फिर से एक नये अवतार में आ रही हैं. इस बार उन्होंने जासूस का रूप धारण किया है. 

 हिंदी सिनेमा की पहली महिला जासूस बनने का अनुभव कैसा रहा. फिल्म जब आॅफर हुई तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
मुझे विश्वास नहीं हुआ. मुझे लगा कि वो लोग बोलेंगे कि बॉबी जासूस एक मेल डिटेक्टीव है.और उसमें या तो मुझे बीवी का रोल निभाना है.या फिर मंगेतर का रोल निभाना है.लेकिन जब उन्होंने मुझे बताया कि बॉबी लड़की है. मुझे विश्वास नहीं हुआ. मैं उस दिन पांडिचेरी के लिए निकल रही थी.मैं स्क्रिप्ट लेकर गयी और मैंने स्क्रिप्ट पढ़ना शुरू किया तो स्क्रिप्ट को नीचे रख ही नहीं पायी. एक झटके में पढ़ ली. फिर मैंने आकर कहा कि मुझे निर्देशक से मिलना है. चूंकि वह फर्स्ट टाइम डायरेक्टर हैं.तो किसी भी डायरेक्टर को अच्छी तरह जान लेना बहुत जरूरी होता है मेरे लिए.क्योंकि सेट पर अपने आप को मैं उनके हवाले सौंप देती हूं. तो वो अगर तभी होता है. जब पूरी तरह से विश्वास का माहौल होता है. मैं संयुक्ता और समर दोनों से मिली. मेरी हां, कहने की वजह यह भी है कि यह सिर्फ एक डिटेक्टीव स्टोरी नहीं है.यह एक लड़की की कहानी है.एक छोटे शहर की आम लड़की की कहानी है. जिसका सपना कुछ अलग करने का है. और बॉबी जिस तरह अपने सपने को साकार कराती है. मुझे बॉबी जासूस की खास बात यही लगी कि यह जासूस जासूसों से कपड़े नहीं पहनतीं. वह आम लोगों के बीच  से जासूस बनने की कोशिश करती है.
विद्या, आपकी वजह से हिंदी सिनेमा में अभिनेत्रियों को लेकर धारणा अब बदली है. तो क्या आप इसका श्रेय लेना चाहेंगी?
ये सुन कर तो वाकई बेहद अच्छा लगता है . और हां इसका श्रेय लेना भी चाहती हूं. लेकिन मैं अकेले नहीं लेना चाहती. हां, यह आप कह सकते हैं कि मैं इस बदलाव का चेहरा बन गयी हूं क्योंकि विजुअल मीडियम में एक्टर सबसे ज्यादा दिखता है और उसे क्रेडिट भी मिलता है अच्छी चीजों का. तो मेरा मानना है कि ये दौर ऐसा है कि ये चेंजेज हो रहे हैं. यह चेंजेज रातों रात नहीं होते.काफी वक्त से धीरे धीरे होता चला आ रहा है. लेकिन जब ये बदलाव का बम फूटा तो मैं वहां थी.और ये मेरी खुशनसीबी है.क्योंकि मैंने कुछ ऐसे डिसीजन लिये. कुछ ऐसी फिल्में की. लेकिन इसमें बहुत लोगों का हाथ है.
इस फिल्म में आपके कई लुक्स हैं तो उन लुक्स के बारे में बतायें?
हां, शायद जितने लुक् स मैंने इस फिल्म में बदले हैं. शायद ही किसी और फिल्म में बदले होंगे. सो बहुत मजा भी आया. मेरा पहला दिन ही था शूट का. और मैं नामपल्ली स्टेशन के बाहर बैठी थी. भिखारियों की वेशभूषा में. वहां मैंने  महसूस किया कि एक भिखारी की जिंदगी क्या होती है. किसी ने मुझे पहचाना नहीं.एक महिला स्टेशन की तरफ जा रही थी. लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ लिया क्योंकि मुझे ऐसे निर्देश मिले थे. उस महिला ने मुझे कहा कि हट्टे कट्ठे हो तो कोई काम क्यों नहीं करते. भीख क्यों मांग रहे हो. एकबारगी मेरा दिमाग ठनका, कि कोई मुझसे ऐसे बात कर रहा है. लेकिन बाद में ख्याल आया कि मैं किरदार में हूं, इस फिल्म में कई लुक्स बदले हैं. लेकिन सबसे तकलीफ मौलवी के किरदार को निभान ेमें हुई चूंकि वो लोग नाक में कुछ अलग सा पहनते हैं और उसे पहन कर मुझे काफी तकलीफ हुई.
हैदराबाद में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?
बेहतरीन रहा. वहां मैंने डर्टी पिक्चर्स भी शूट की थी. लेकिन उस वक्त और इस वक्त में काफी अंतर था. चूंकि उस फिल्म में हम हैदराबाद शहर में शूट कर रहे थे. जबकि इस बार हम हैदराबाद के बिल्कुल पुराने अंदाज वाले जगह पर शूट कर रहे थे. चारमिनार के आस पास के इलाके में. वहां के लोगों ने बेहद प्यार दिया. सभी ने कहा कि आपके लिए हैदराबाद लकी है. क्योंकि उन्हें पता था कि उनके शहर की फिल्मायी गयी फिल्म द डर्टी पिक्चर्स हिट हुई है.
विद्या आपके पास इतनी हिम्मत जिसे हम अंगरेजी में कहें तो गट्स कहां से आता है इस तरह के किरदार निभाने के लिए. आमतौर पर हिंदी फिल्मों की अभिनेत्रियों को तो सिर्फ सुंदर दिखना है परदे पर?
जी हां, सच यह है कि मैं बेहद भूखी हूं. मुझे अच्छा काम चाहिए. मैं जिंदगी में कभी अभिनय के सिवा कुछ सोचा ही नहीं. मैं कुछ नया किये बगैर नहीं रह पाती. और मेरा परिवार भी ऐसा मिला मुझे जिसने मेरे ऐसे निर्णय में हमेशा मेरा साथ दिया. तो मुझे हिम्मती बनाने का श्रेय उन्हें ही जाता है. मुझे हर बार अच्छे किरदार चाहिए, क्योंकि मैं मेहनती हूं और काम नया करना मुझे अच्छा लगता है. वो लोग कहते हैं कि प्यास है बड़ी. मैं कहती हूं भूख है बड़ी. जितना अच्छा काम मिलेगा. मैं करती जाऊंगी. 

सफलता से चहक रही हूं मैं : श्रद्धा


उनकी पहले भी दो फिल्में रिलीज हो चुकी थीं. लेकिन सफलता का स्वाद चखने का मौका उन्हें फिल्म आशिकी 2 से मिला. इस फिल्म से न सिर्फ उन्होंने लोकप्रियता हासिल की, बल्कि अब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशकों को भी उनमें काफी संभावना नजर आ रही है. बात हो रही है श्रद्धा कपूर की, जिनकी अगली फिल्म है एक विलेन. 

फिल्म आशिकी 2 से आपको बड़ी सफलता मिली है तो इसका श्रेय किसे देना चाहेंगी. एक विलेन में आपका क्या किरदार है?
मैं इसका श्रेय मोहित सूरी को देना चाहूंगी. चूंकि उन्होंने आरोही को काफी लोकप्रिय किरदार बना दिया है. और मैं फिर से एक विलेन उनके साथ ही कर रही हूं तो मुझे पूरा यकीन है कि लोग आरोही को जितना प्यार करते हैं आयशा को भी करेंगे. एक विलेन में मेरा किरदार आयशा का किरदार है, जो कि काफी बोलनेवाली है. वह आरोही की तरह शांत शांत नहीं रहती. जोक्स क्रैक करती रहती है. खुद को बहुत फनी समझती है. बहुत ही एनजेर्टिक लड़की है. दूसरों की हेल्प करना चाहती है और इसके लिए वह अपने गुरु की मदद लेती है और फिर कैसे दोनों में प्यार हो जाता है. यह है आयशा का किरदार. गुरु का किरदार बिल्कुल शांत रहता है. फिल्म में गुरु के संवाद ही नहीं हैं और मेरे 90 पेज के डायलॉग हैं. अब तक इस फिल्म के लिए जितने संवाद याद किये हैं. शायद तीनों फिल्मों को मिला कर भी नहीं किया होगा.

इस फिल्म में आपको बाइक चलाया है. स्कूवा डाइविंग की है तो यह आपके लिए कितना टफ था?
 मैं स्कूवा डाइविंग की सर्टिफाइड स्टूडेंट हूं और मैं फन लविंग हूं. एंडवेंचर करना पसंद हैं तो मुझे ये सब करने में काफी मजा आ रहा था, हां मैं बाइक चलाना नहीं जानती थी. मैं हाइट में कम हूं और मुझे बुलेट चलाने को दे दिया गया था इस फिल्म में. बुलेट के साथ परेशानी ये थी कि बुलेट चलती है तो काफी स्टेबल रहती है. लेकिन रुकती है तो गिर जाती है. तो उसे बैलेंस करने में तकलीफ आयी. लोगों को लग रहा था कि मैं नहीं कर पाऊंगी. मुझसे बाइक नहीं चलेगी. लेकिन मुझे लगता  है कि जो लोग छोटे होते हैं न उनके पास ज्यादा पॉवर होता है. तभी तो मैंने कर लिया. और इस फिल्म की वजह से मुझे बाइक से प्यार हो गया है और मेरा मन है कि मैं बाइक खरीदूं. खुद के लिए.

आशिकी 2 की सफलता पर आपके पिता की क्या प्रतिक्रिया थी. 
मेरे लिए यह फिल्म इस लिहाज से खास रही कि इसे मेरी सोलो पहली हिट फिल्म रही. लोग अब पहचानने लगे हैं. कार में जाओ तो लोग पहचानते हैं तो अच्छा लगता है कि लोग पहचान रहे हैं. अब अच्छे आॅफर आ रहे हैं. निर्देशकों का विश्वास बढ़ा है. मेरे डैड मुझसे ज्यादा खुश हैं कि मुझे आशिकी 2 से इतनी बड़ी सफलता मिली है. अपने पेरेंट्स को अपने प्राउड करूं. मैं यही चाहती थी. तो अच्छा लगता है. अब अलग तरह की फिल्में आॅफर हो रही हैं. मैं अपने पिता की एक खास बात हमेशा याद रखना चाहूंगी कि वह हमेशा मुझे कहते हैं कि मैं बहुत हार्ड वर्किंग हूं और वह मेरी बहुत कद्र करते हैं. मेरी छोटी छोटी सफलता से वह जिस तरह से खुश हो रहे हैं. मुझे अच्छा लगता है. डैड हमेशा कहते हैं कि मुझमें कहीं एक लड़का छुपा हुआ है. मतलब जो काम लड़के करते हैं. मैं वह सब आसानी से कर लेती हूं. उनके अनुसार मैं बहुत टफ लड़की हूं. बाहर के  लोगों को भले ही लगे कि मैं छुई मुई सी हूं मेरी फेस की वजह से लेकिन पापा जानते हंै कि मैं कितनी टफ लड़की हूं.वो मुझे क्रिटिसाइज नहीं करते. मेरी मासी( पदमिनी कोल्हापुरे) मुझे बताती हैं कि अगर मेरी एक्टिंग में कहीं कोई गलती या कमी हो तो. पापा कभी नहीं बताते.

बॉलीवुड में नये चेहरे काफी नजर आ रहे हैं. तो क्या लगता है आपको क्या यह सुनहरा मौका है आपके लिए?
जी हां, बिल्कुल. मुझे लगता है कि यंग बिग्रेड  का दौर आ चुका है. अभी लोगों को हमारे चेहरे देखने हैं. नये चेहरे देखने हैं. आॅडियंस का माइंडसेट बदला है. अब सिर्फ सुपरस्टार्स को नहीं देखना चाहते. मेरा मानना है कि नये चेहरों के माध्यम से अच्छी स्क्रिप्ट लोगों को दिखाये जा रहे हैं तो यह सबसे बेहतरीन दौर है मेरे लिए,. मुझे खुशी है कि भले ही इससे पहले मेरी दो फिल्में हिट नहीं हुई. लेकिन आशिकी 2 बिल्कुल सही समय पर हिट हुई है और मुझे इसके बाद बेहतरीन फिल्में मिल रही हैं.

आपकी आनेवाली फिल्में कौन कौन सी हैं?
 मैं हैदर और उंगली में खास किरदार निभा रही हूं और ये सभी किरदार एक दूसरे से जुदा हैं. इसलिए इन्हें लेकर बहुत उत्साहित हूं.

मैं और मेरे स्टार्स -


इस बार विश्वजीत और चंचल पूछ रहे हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा से उनके पसंदीदा सवाल

विश्वजीत : आप कभी मॉडलिंग भी किया करते थे क्या?
सिद्धार्थ : नहीं मॉडलिंग नहीं करता था. मैंने करन जौहर को अस्टिट किया है फिल्म माइ नेम इज खान में
चंचल : फिल्म विलेन के बारे में कैसे सोचा कि आपको नेगेटिव किरदार करना चाहिए?
सिद्धार्थ : मैं लकी हूं कि मुझे अपनी तीसरी फिल्म में कुछ ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला है जो कि बिल्कुल जुदा है. मैं इस बात से भी खुश हूं कि मोहित सूरी जो थोड़े अलग किस्म के निर्देशक हैं. उनके साथ काम करने का मौका मिल रहा है. मेरे मम्मी पापा भी हैरान हैं कि मैं इस तरह नजर आ सकता हूं क्या?
चंचल : आप अपने दोस्त आलिया और वरुण से मिलते रहते हैं या नहीं?
जी हां, बिल्कुल वे सभी मेरे क्लोज फ्रेंड्स हैं और हमारी कोशिश होती है कि हम मिलें. और फिल्मों के बारे में सबसे कम बातें करें. क्योंकि यह बेहद जरूरी है कि दोस्तों के साथ काम की बातें न हों.
चंचल : इंडस्ट्री में आपके परिवार से कोई भी है या नहीं
सिद्धार्थ : मेरे परिवार से दूर दूर तक कोई इस इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं और इसलिए मुझे इस इंडस्ट्री को समझने में काफी वक्त लगा है.धीरे धीरे सीख रहा हूं.
चंचल : आप अपना मेंटर किसे मानते हैं?
सिद्धार्थ : करन जौहर को. उन्होंने मुझे पहला ब्रेक दिया और अब भी जरूरत होती है तो मैं ुउनको कॉल कर लेता हूं और वह मुझे काफी मदद करते हैं. मैं लकी हूं कि मुझे उनका साथ मिला है.

सफलता का एहसास


 कपिल शर्मा के  शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के सितंबर में बंद होने की खबर लगातार मीडिया में छाई हुई है. लोगों को इस खबर पर विश्वास उस वक्त हुआ जब कपिल ने टिष्ट्वटर पर लिखा कि मैं सोच रहा हूं कि अपने शो को लेकर चैनल से बात करूं. और ब्रेक लूं. कपिल ने स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा था. लेकिन सबने ये अनुमान लगा लिया कि ये शो बंद हो जायेगा. कई लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि कपिल के दिमाग पर कामयाबी का भूत सवार हो गया है और चूंकि उन्हें फिल्म मिल गयी है. वह भी यशराज बैनर की. सो, वे अब अपना शो बंद कर रहे हैं. कई लोगों ने तूलना कर दी है  कि राजू श्रीवास्तव से लेकर हास्य की दुनिया के सारे दिग्गज बड़े परदे पर नाकामयाब रहे हैं. अगर कपिल अपना शो बंद करने का निर्णय ले रहे हैं तब भी यह एक उम्दा निर्णय है. चूंकि जिंदगी में संतुष्टि भी बेहद जरूरी है. वे जिस इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. वहां कई लोग बासी खीर परोस कर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं. ऐसे में कपिल को अगर ऐसा लग रहा कि उनके शो में अब ढलान आ रहा और वह एक अच्छे नोट के साथ शो को खत्म करना चाहते हैं तो कपिल की सराहना होनी चाहिए कि वे अपनी सफलता को संजोने में विश्वास कर रहे हैं. साथ ही अगर वह अन्य विधाओं में अपना हाथ आजमाना चाहते तो इस लिहाज से भी यह कपिल की सफलता है कि सफल होने के बाद भी वह अपने अंदर के कलाकार को शांत नहीं कर रहे. अगर वाकई कपिल संतुष्ट होते तो वह थम जाते और अक्सर व्यक्ति कंफर्ट जोन में जाकर थम जाता है. कपिल ने कॉमेडी सर्कस छोड़ कर अकेले यह सफर शुरू किया. कामयाब हुए. और अगर कपिल शो बंद नहीं करते और उसमें बदलाव के बारे में सोच रहे हैं तब भी यह दर्शाता है कि वह क्रियेटिव रूप से खुद को विकसित करते रहें. और यह सराहनीय है.

टिवटर पर रणबीर


 रणबीर कपूर उन चुनिंदा सुपरस्टार्स में से हैं, जो अब तक टिष्ट्वटर या किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर नहीं हैं. लेकिन खबर है कि अब उन्होंने भी इसमें दिलचस्पी दिखानी शुरू की है. वे अपने प्रिय दोस्त करन जौहर से हाल ही में इस बारे में चर्चा कर रहे थे कि क्या उन्हें इस तरह के सोशल नेटवर्किंग साइट पर आना चाहिए या नहीं. रणबीर की इस दिलचस्पी की खास वजह यह है कि वे अपने और कैट के रिश्ते को लेकर हो रही बातों पर अपना टेक रखना चाहते हैं. हालांकि अब तक यह तय नहीं है कि रणबीर वाकई आयेंगे या नहीं. रणबीर अब तक कई बार इस बात को दोहराते रहे हैं कि उन्हें अपनी निजी जिंदगी में किसी की दखलअंदाजी पसंद नहीं.वे चाहते हैं कि जिस तरह दिलीप साहब ने खुद को मिस्ट्री बना कर रखा. वह भी रखें. लेकिन शायद धीरे धीरे वे भी इस बात को समझ चुके हैं कि वर्तमान में सोशल नेटवर्किंग साइट किस तरह जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. हालांकि अब तक कपूर परिवार से किसी ने भी यह अगुवाही नहीं की है. करीना, करिश्मा ने भी टिष्ट्वटर से दूरी ही बना कर रखी है. लेकिन हो सकता है कि धीरे धीरे वे भी ट्विटर पर आ जायें. रणबीर इस बात से तो वाकिफ हैं ही किस तरह टिष्ट्वटर के माध्यम से वह अपनी बात बिना किसी पीआर के सहारे, बिना किसी लाग लपेट के रख सकते हैं. रणबीर अगर टिष्ट्वटर पर आते भी हैं तो इतना तो तय है कि वह कभी अपने पल पल की खबर नहीं देंगे. अर्जुन कपूर ने भी कुछ दिनों पहले यही कहा था कि वह टिष्ट्वटर पर नहीं आयेंगे. लेकिन अब वह भी अपना मन बना रहे हैं. दरअसल, तकनीक के पीछे भाग रही इस दुनिया में ये युवा कलाकारों के मन में कहीं न कहीं यह लालसा जरूर होती होगी कि क्यों सोशल नेटवर्किंग साइट्स इतने पॉपुलर हैं. और क्यों इसके साथ कदम ताल जरूरी है.

बॉलीवुड में शादियां


 विद्या बालन  से हाल ही में मुलाकात हुई. विद्या ने फिल्मों के अलावा कई मुद्दों पर भी बातचीत की. विद्या ने बताया कि जब उनकी शादी हुई तो उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि अब उन्हें अपने माता पिता को छोड़ कर किसी और के साथ रहना होगा. वे कभी हॉस्टल में नहीं रहीं और शादी से पहले कभी बिना काम के वह कभी अपने माता पिता को छोड़ कर नहीं रहीं. तो शादी के बाद किसी के साथ रूम शेयर करना उन्हें यह सोच कर काफी चिंता थी. लेकिन शादी के बाद वे काफी खुश हैं कि उनके पति के साथ मिल कर वह न सिर्फ यह तय करती हैं कि आज घर में खाने में क्या बनेगा. बल्कि अब उनके पूरे दिन की प्लानिंग एक दूसरे से पूछ कर सामंजस्य से तय होती है. विद्या मानती हैं कि उन्हें शादी के बाद भी वह आजादी मिली है और इसलिए वे खुद को सुरक्षित मानती हैं. करीना कपूर खान ने शादी के बाद खुद में बस यही बदलाव किया है कि अब वह थोड़ा बहुत नॉन वेजीटेरियन खाना खाने लगी हैं. वरना, खाना पकाना उन्हें आज भी पसंद नहीं हैं. और वह सैफ के लिए कभी कुछ भी पकाने की कोशिश नहीं करती हैं. आमतौर पर यह अवधारणा है कि महिलाओं की जिंदगी शादी के बाद बदल जाती हैं और लड़कियां आजाद नहीं रह जातीं. लेकिन हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार्स के ख्यालात बिल्कुल अलग हैं. वे शादी से खुश हैं. वे इत्तमिनान से हैं. लेकिन दूसरी तरफ फिल्म इंडस्ट्री में पुरुष वर्ग के लिए ही शादी एक बंधन की तरह है. हाल ही में एक निर्देशक ने स्वीकारा है कि उनके लिए शादी किसी कैद के समान थी और इसलिए उन्होंने शादी तोड़ दी. दरअसल, हकीकत यही है कि यह दोषारोपण करना कि केवल महिलाओं को स्वछंद होना पसंद है. ऐसा सही नहीं. दरअसल, आजादी हर किसी को चाहिए और हर किसी के लिए आजादी के मायने अलग हैं