पूनम ढिल्लो इन दिनों सोनी टीवी के शो एक नयी पहचान में नजर आ रही हैं. वे शो में शारदा का किरदार निभा रही हैं. एक ऐसी महिला का किरदार, जिन्हें पढ़ना लिखना नहीं आता. लेकिन फिर भी वह घर संभाल लेती हैं. लेकिन वास्तविक दुनिया में पूनम ढिल्लो काफी पढ़ी लिखी हैं और उन्हें पढ़ने लिखने के साथ साथ नयी तकनीकों और नयी चीजों से जुड़ना पसंद हैं. पूनम ने अपने दौर में बेहतरीन फिल्में की हैं. हां, भले ही वह सुपरसितारा नहीं रहीं. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान स्थापित की. बहरहाल, वास्तविक जिंदगी में वह एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं. फिल्म इंग्लिश विंगलिश में जब श्रीदेवी के किरदार को अमेरिका के अंगरेजी इंस्टीटयूट में कहा जाता है कि वह लड्डू बनाने वाली एंथरप्रेनर हैं. वह फुली नहीं समाती. उसी की तर्ज पर एक नयी पहचान की भी कहानी है. लेकिन हकीकत यह है कि पूनम ने अपनी पहचान वाकई बॉलीवुड में अलग तरीके से बनायी है. भले ही लोगों को उनके बारे में खास जानकारी न हो. लेकिन हकीकत यही है कि पूनम ने वास्तविक जिंदगी में कई तरह क ेनये प्रयोग किये. वे कई महिलाओं की स्रोत हैं. उन्होंने ही वैनिटी वैन की शुरुआत की थी. जिस दौर में मेकअप के लिए ड्रेसिंग रूम हुआ करते थे. पूनम वह पहली व्यवसायी थीं, जिनके जेहन में यह आइडिया आया और भारत में वैनिटी वैन की शुरुआत हुई. आज वैनिटी हर सुपरस्टार की जरूरत है. पूनम चाहतीं तो अन्य अभिनेत्रियों की तरह आराम की जिंदगी गुजर बसर कर सकती थीं. लेकिन उन्होंने अध्ययन करना नहीं छोड़ा. आज भी वह खुद को अपग्रेड कर रही हैं. खासतौर से वर्तमान की अभिनेत्रियां जो अभिनय के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं. उनके लिए वह बड़ी सबक हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई की ललक को खत्म नहीं किया.चूंकि पूनम मानती हैं कि शिक्षा व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद जरूरी है
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20140218
पूनम से सबक
पूनम ढिल्लो इन दिनों सोनी टीवी के शो एक नयी पहचान में नजर आ रही हैं. वे शो में शारदा का किरदार निभा रही हैं. एक ऐसी महिला का किरदार, जिन्हें पढ़ना लिखना नहीं आता. लेकिन फिर भी वह घर संभाल लेती हैं. लेकिन वास्तविक दुनिया में पूनम ढिल्लो काफी पढ़ी लिखी हैं और उन्हें पढ़ने लिखने के साथ साथ नयी तकनीकों और नयी चीजों से जुड़ना पसंद हैं. पूनम ने अपने दौर में बेहतरीन फिल्में की हैं. हां, भले ही वह सुपरसितारा नहीं रहीं. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान स्थापित की. बहरहाल, वास्तविक जिंदगी में वह एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं. फिल्म इंग्लिश विंगलिश में जब श्रीदेवी के किरदार को अमेरिका के अंगरेजी इंस्टीटयूट में कहा जाता है कि वह लड्डू बनाने वाली एंथरप्रेनर हैं. वह फुली नहीं समाती. उसी की तर्ज पर एक नयी पहचान की भी कहानी है. लेकिन हकीकत यह है कि पूनम ने अपनी पहचान वाकई बॉलीवुड में अलग तरीके से बनायी है. भले ही लोगों को उनके बारे में खास जानकारी न हो. लेकिन हकीकत यही है कि पूनम ने वास्तविक जिंदगी में कई तरह क ेनये प्रयोग किये. वे कई महिलाओं की स्रोत हैं. उन्होंने ही वैनिटी वैन की शुरुआत की थी. जिस दौर में मेकअप के लिए ड्रेसिंग रूम हुआ करते थे. पूनम वह पहली व्यवसायी थीं, जिनके जेहन में यह आइडिया आया और भारत में वैनिटी वैन की शुरुआत हुई. आज वैनिटी हर सुपरस्टार की जरूरत है. पूनम चाहतीं तो अन्य अभिनेत्रियों की तरह आराम की जिंदगी गुजर बसर कर सकती थीं. लेकिन उन्होंने अध्ययन करना नहीं छोड़ा. आज भी वह खुद को अपग्रेड कर रही हैं. खासतौर से वर्तमान की अभिनेत्रियां जो अभिनय के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं. उनके लिए वह बड़ी सबक हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई की ललक को खत्म नहीं किया.चूंकि पूनम मानती हैं कि शिक्षा व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद जरूरी है
तानों से तुलना
परिणीति चोपड़ा इन सवालों से पूरी तरह से खींझ जाती हैं जब उन्हें कहा जाता है कि वे अपनी बड़ी बहन प्रियंका चोपड़ा की वजह से फिल्मों में आने का मौका मिला या फिर यह कि वे अपनी बहन से प्रेरित हैं. वे इन बातों का साफ साफ खंडन करती हैं. अभिषेक बच्चन हमेशा अपना दुख जाहिर करते रहे हैं कि उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं कि उनकी तूलना हमेशा उनके पिता से की जाये. भले ही सभी कलाकार की इच्छा हो कि वे अमिताभ बच्चन की तरह अभिनय करें, लेकिन अभिषेक नहीं चाहते कि उनकी तूलना उनके पिता से हो. परिणीति ने कुछ महीनों पहले घोषणा की थी कि वे सिंगिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं. तो उस वक्त भी उनकी तूलना प्रियंका से की गयी और लोगों ने कहा है कि वे बहन की देखा देखी करती हैं. दरअसल, यह हकीकत है कि फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं हर क्षेत्र में अगर आपसे पहले आपकी परिवार के किसी सदस्य ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया हो तो दूसरी पीढ़ी के लिए उस मुकाम तक पहुंचना कठिन हो जाता है. कठिन इस संदर्भ में कि लोग उन्हें उस मुकाम तक पहुंचने का मौका ही नहीं देते. वे कितनी भी कोशिश कर लें. उन्हें तुलनाओं से छुटकारा नहीं मिलता. चूंकि एक वक्त के बाद बेटे को भी अपने पिता की छांव में हवा लेना रास नहीं आता. उसे वह तुलना किसी ताने से कम नहीं लगती. हर व्यक्ति चाहता है कि वह अपनी पहचान से आगे बढ़े. अपनी खुद की पहचान बना पाये.दरअसल, हमारी यह मानसिकता है कि हम इस बात को स्वीकार ही नहीं पाते कि कोई व्यक्ति खुद की अपनी पहचान जिसे हम अंगरेजी के शब्द में इंडिविजुअल कहते हैं बनने की प्रयास कर सकता. परिवार के हर सदस्य में एक ही गुण हो सकते हैं. और वे उसे निखार भी सकता है. उसे इसका हक है. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में खासतौर से उन्हें पूरी तरह निखरने के मौके नहीं मिले
बातों बातों में प्रोमोशन
शाहरुख खान इस बात से खुश हैं कि उनकी फिल्म का नाम हैप्पी न्यू ईयर है. और चूंकि नये साल की शुरुआत हो चुकी है तो लोग हैप्पी न्यू ईयर कहेंगे और इसी बहाने उनकी फिल्म की पब्लिसिटी हो जायेगी. दरअसल, हकीकत यही है कि फिल्मी मार्केटिंग इस कदर कलाकारों पर हावी है कि वे कोई मौका नहीं चूकते अपनी फिल्मों की प्रशंसा या चर्चा करने में. क्या इससे पहले कभी नये साल का स्वागत लोग कुछ और कह कर करते थे. लेकिन इस बार शाहरुख ने हैप्पी न्यू ईयर को अपना कॉपी राइट ही बना लिया है. आमिर खान इन दिनों हर जगह धूम की चर्चा करते नजर आते हैं. वे अपने बेटे के बारे में बातें करते हैं तो यही कहते हैं कि उनका बेटा भी धूम के गाने पर ही डांस करने लगता है. इससे पहले आमिर कहा करते थे कि उनके बेटे को तलाश के गाने बेहद पसंद हैं. सलमान खान ने बिग बॉस में कई बहानों से अपनी फिल्म जय हो का प्रोमोशन किया. जबकि उन बातों का ज़य हो फिल्म से कोई जुड़ाव भी नहीं. कोई कनेक् शन भी नहीं. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जिक्र के बहाने प्रोमोशन कर लिया. अनिल कपूर जब फिल्म 24 का प्रोमोशन कर रहे थे तो वे हमेशा इन बातों को दोहराते रहते थे कि दिन के 24 घंटे आप 24 के बारे में सोचें. तो क्या अनिल कपूर के शो के आने से पहले दिन के 25 घंटे हुआ करते थे. हाल ही में लेखक कमलेश पांडे से बात हुई. उन्होंने बिल्कुल सटीक बात कही कि आज हमारी विशेषका मार्केटिंग बन चुकी है. आप खुद को किस तरह से लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं और किस तरह से इसकी मार्केटिंग करते हैं. सारी चीजें उसी पर आधारित है. यही वजह है कि विज्ञापनों में भी कलाकारों की फिल्मों के किरदार को प्रोमोट करने की कोशिश की जाती है. चूंकि वे लोकप्रिय हैं और दर्शक उससे सीधे तौर पर जुड़ जाते हैं. यह कुछ और नहीं बातों बातों में भी प्रोमोशन का खेल ही है
असफलता में मिला प्रेम
मशहूर अभिनेत्री तनूजा की बेटी तनीषा आज तक फिल्मों को लेकर उतनी चर्चा में नहीं रही होंगी. जितनी चर्चा उनकी अब हो रही है. बिग बॉस की वजह से. बिग बॉस में वह अरमान कोहली के साथ प्रेम प्रसंग की वजह से पूरे सीजन में चर्चे का विषय रहीं. तनीषा के बारे में लोगों ने कई तरह की अवधारणाएं बना ली हैं. लोगों का कहना है कि तनीषा ने जो बिग बॉस के घर में किया है उससे उनके परिवार का नाम खराब हुआ है. तनीषा ने बिग बॉस के घर से लिखे एक पत्र में यह बात साफ कर दी थी कि वे अरमान से प्रेम करने लगी हैं और उनकी इच्छा है कि वे शादी उनसे ही करेंगी. अरमान घर से बाहर आ चुके हैं और अब जल्द ही बिग बॉस का यह सीजन समाप्त हो जायेगा. देखना अब यह होगा कि वाकई जिसे तनीषा प्यार समझ बैठी हैं. अरमान उस पर कोई मुहर लगाते हैं या नहीं. चूंकि बिग बॉस के घर में अब तक कोई भी प्रेम पूरा नहीं हो पाया है. इससे पहले अश्मित पटेल और वीना मल्लिक, सना खान-राजीव व कई जोड़ियां बनी हैं. सारा खान ने तो व्याह भी रचा लिया था. लेकिन यह हकीकत सभी जानते हैं कि बिग बॉस के घर में पनपा प्यार टीआरपी का प्यार है. लेकिन तनीषा जिस तरह अरमान को लेकर गंभीर नजर आयी हैं. निश्चित तौर पर उनका प्रेम प्यार से कहीं आगे हैं. तनीषा कामयाब अभिनेत्री नहीं रही हैं और वह अपने जीजाजी अजय के साथ प्रोडक् शन का काम संभाल रही थीं. ऐसे में जाहिर है, जब इंसान असफलताओं से जूझता रहता है तो जिंदगी में किसी व्यक्ति का आगमन उसके लिए संजीवनी की तरह साबित होता है.असफलता से घिरे रहने पर मिलने वाला प्यार सच्चा होता है. सो, उम्मीद अरमान इस प्यार को समझेंगे और मुहर लगायेंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो तनीषा को ठोकर लगेगी. चूंकि उनके प्यार में सच्चाई और गहराई नजर आ रही है.
निष्पक्ष प्रतिक्रिया
नसीरुद्दीन शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि भाग मिल्खा भाग एक फर्जी फिल्म है. चूंकि उनके अनुसार फिल्म में फरहान अख्तर ने केवल बॉडी बनायी है. न तो वह मिल्खा की तरह नजर आ रहे हैं और न ही उन्होंने अच्छा अभिनय किया है. जहां एक तरफ भाग मिल्खा भाग की वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा तारीफ हुई. वही नसीरुद्दीन शाह जैसे वरिष्ठ कलाकार का मानना है कि यह अभिनय नहीं. नसीरुद्दीन शाह की इस बात को सुन कर पूरे बी टाउन में लोग उन्हें खरी खोटी सुना रहे हैं. लोगों का कहना है कि यह नसीरुद्दीन शाह का बड़बोलापन है. जबकि खुद राकेश ओम प्रकाश मेहरा और फरहान ने इस पर चुप्पी साध रखी है. दरअसल, नसीरुद्दीन शाह ने अपनी बात स्पष्ट शब्दों में कही है और उन्होंने फरहान अख्तर की निजी जिंदगी पर कुछ कटाक्ष नहीं किया है. वे आॅडियंस हैं और उन्हें भी हक है कि वे अपनी निष्पक्ष राय रख सकें. फिल्म एक बिल्कुल व्यक्तिगत पसंद है. आपको जो फिल्म अच्छी लग रही हो. वह जरूरी नहीं कि आपकी सीट के बगल में बैठे व्यक्ति को भी अच्छी लगे. लेकिन बी टाउन में इन दिनों रिश्ते इसी तरह बनते बिगड़ते हैं. कुछ सालों पहले जब करन जौहर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पर कटाक्ष किया था. तब से दोनों के रिश्तों में कड़वाहट है. सलमान खान और ऋतिक रोशन के रिश्ते आज भी सामान्य नहीं हो पाये हैं. चूंकि सलमान ने गुजारिश के बारे में अपशब्द कह दिये थे. जबकि फिल्मी कलाकारों को भी चाहिए कि वे निष्पक्ष राय लें और सुनें. आमिर खान को दबंग जैसी फिल्में पसंद नहीं और वे सलमान को हमेशा कहते भी रहे हैं. विधु विनोद ने भी कई बार सलमान की फिल्मों की बुराई की है. सो, फरहान और राकेश की चुप्पी बताती है कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ा है और पड़ना भी नहीं चाहिए चूंकि तमाम दर्शक की तरह नसीर को भी हक है अपनी राय देने का.
वास्तविक सुपरस्टार
हाल ही में खबर आयी कि रजनीकांत किसी मंदिर में दर्शन करने के लिए गये थे. तो यूं ही मंदिर के बरामदे में आकर बैठ गये. उन्होंने शॉल ओढ़ रखी थी. सो, वहां एक बुढ़ी औरत आयी और उन्हें 10 रुपये थमा कर जाने लगी. रजनीकांत के बॉडीगार्ड ने जब उस महिला को कुछ कहना चाहा तो रजनीकांत ने उनके हाथ पकड़ लिये और कहा कि यह भगवान का तरीका है, मुझे समझाने का कि मैं न भूलूं कि मैं कौन हूं. रजनीकांत भारत के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं. इस बात से सभी वाकिफ हैं. लेकिन रजनीकांत आज भी आम लोगों की तरह ही अपने जीवन का निर्वाह करते हैं. किसी सुपरस्टार का किसी मंदिर के बरामदे में जाकर बैठना और वह भी आम आदमी की तरह दर्शाता है कि वह आज भी जमीन से जुड़े हैं. यह किसी सुपरस्टार के लिए निंदा की ही बात होती कि उन्हें कोई पहचान नहीं पा रहा और उन्हें भगवान की तरह पूजनेवाले लोग ही उन्हें भिखारी समझ ले रहे हैं. लेकिन रजनीकांत दरअसल, सुपरस्टार हैं, जो जानते हैं कि उनकी हकीकत क्या है. किसी हिंदी सिनेमा के सेलिब्रिटी से ऐसे व्यवहार की उम्मीद करना संभव ही नहीं. चूंकि बॉलीवुड में सेलिब्रिटिज और फैन के बीच एक ऐसी खाई है, जो कभी भर नहीं सकती. यहां हर सेलिब्रिटिज इस तरह अपनी छवि प्रस्तुत करना चाहता है कि वह लोगों की नजर में झूठी तारीफ बटोर सके. लेकिन वह कभी वास्तविक रूप में नजर नहीं आता. हिंदी सिनेमा के सेलिब्रिटी अपनी छवि, अपने रंगरूप, लुक और हर बातों को लेकर इतने सजग होते हैं कि वे हमेशा बनावटी ही नजर आना पसंद करते हैं और अब यही उनकी नीयत भी बन चुकी है. हालांकि दक्षिण सिनेमा में भी जो आचार विचार रजनीकांत ने कायम रखा है. वह हर किसी के वश की बात नहीं. दरअसल, फिल्मों में ही नहीं वास्तविक जिंदगी में ही असली सुपरहीरो रजनीकांत ही हैं.
20140217
सीक्रेट सांता
इस बार बी टाउन में सीक्रेट सांता की धूम है. यहां हर आॅफिस में सीक्रेट सांता दिवस मनाया जा रहा है. क्रिसमस के एक हफ्ते पहले से हर कार्यालय में लोग एक दूसरे को उनकी पसंदीदा चीजें तोहफे के रूप में दे रहे हैं. लेकिन तोहफा देने वाला व्यक्ति अपना नाम सुरक्षित रख रहा है. यही है सीक्रेट सांता. बॉलीवुड में भी ऐसे कई सीक्रेट सांता हैं, जो आम लोगों की मदद तो करते हैं. लेकिन वह कभी नहीं चाहते कि उनका नाम सामने आया. अभी हाल ही में एकता कपूर के बारे में मैंने इसी स्तंभ में लिखा था कि किस तरह वह बुजुर्ग महिलाएं जिनके परिवार ने उन्हें छोड़ दिया है.उनकी मदद करती हैं. सलमान खान के बारे में पूरी दुनिया जानती है कि उन्हें मदद करना पसंद है. हाल ही में उन्होंने एक पत्रकार के पड़ोसी की मदद की. उस पत्रकार ने सलमान से जाकर पड़ोसी की परेशानी के बारे में बताया, जिसे सुनने के बाद सलमान ने थोड़ी भी देर नहीं लगायी, पिछले दिनों रणबीर कपूर से बातचीत करके लौट रही थी. आॅटो वाले ने अपने लहजे में पूछा...किसका शूटिंग चल रहा था? मैंने कहा रणबीर तो उसने साफतौर पर कहा अपन को तो सलमान पसंद है. वह भाभा हॉस्पीटल में मेरे भाई के बच्चे को बचाया. वह तो मसीहा है अपना. उसके जैसा कोई नहीं. सुष्मिता सेन भी उन अभिनेत्रियों में से एक हैं, जो जरूरतमंद बच्चों के लिए कई तरह के कार्य करती हैं. दिलीप कुमार और सायरा बानो भी अपनी तरफ से आज भी चैरिटी करते हैं. सायरा बानो मानती हैं कि अगर किसी के लिए कुछ करो और उसका खुलासा करो या जगजाहिर कर दो तो आपको दुआएं नहीं मिलती. दरअसल, हकीकत भी यही है कि उपकार करने वाला हमेशा सीक्रेट सांता ही बना रहे, तभी उसको वह बरक्कत मिलती है. बॉलीवुड में ऐसे कई सीक्रेट सांता हैं, जो इसी उद्देश्य से मदद करते हैं.
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