पिछले लगभग एक वर्ष से सोशल नेटवर्किंग समेत दुनिया के तमाम अखबार व समाचार चैनलों में लगातार 12-12-12 के दिन विश्व की तबाही की बात दोहरायी जा रही है. कहीं लोगों ने इसे वाकई काफी गंभीरता से लिया तो कहीं इसे लेकर कई तरह के मजाक भी हुए. लेकिन इससे सबसे बेफिक्र अगर कोई नजर आया है तो वह है भारतीय सिनेमा जगत. इस दिन से जुड़े अफवाहों से बेपरवाह होकर सिनेमा जगत ने न सिर्फ अगले साल रिलीज होनेवाली कई फिल्मों की घोषणा की है, बल्कि हिंदी सिनेमा के 100 साल पूरे होने की खुशी में जश्न का भी ऐलान किया है. इस क्रम में अनुराग कश्यप ने 12 निर्देशकों से साथ बनी एक ँप्रयोगात्मक फिल्म द लास्ट एक्ट की घोषणा की है. तमिल सिनेमा के लोकप्रिय सुपरस्टार रजनीकांत न सिर्फ अपना जन्मदिन धूमधाम से मना रहे हैं, बल्कि उनकी बेटी सौंदर्य पिता के साथ एक फिल्म की घोषणा भी कर रही हंै. हिंदी सिनेमा जगत में आनेवाले सालों में कुछ बेहतरीन फिल्मों की घोषणा हुई है, जिनमें आशुतोष ग्वारिकर की पीरियड फिल्म की चर्चा है. दरअसल, यह हकीकत है कि निर्देशक हमेशा दूरदर्शी होता है. वह कल में जीता है. राकेश रोशन ने एक बार अपनी बातचीत में कहा था कि एक फिल्मकार के लिए किसी विषय को लेकर फिल्म बनाना इसलिए भी कठिन होता है क्योंकि एक फिल्म बनने में कई साल लग जाते हैं और यह जरूरी नहीं कि वह जिस विषय को लेकर फिल्म बनाने की शुरुआत कर रहा हो. वह विषय प्रासंगिक ही हो. इसलिए एक निर्देशक को बहुत दूर की सोच रखनी चाहिए. वाकई, अगर ऐसा न होता तो शायद राजकपूर ने कई सालों पहले मेरा नाम जोकर जो आज के दौर में प्रासंगिक है न बना दिया होता. और भी ऐसी कई फिल्में हैं, जो उस दौर में कामयाब नहीं हुईं लेकिन बाद के दौर में कामयाब रही. सिनेमा हमेशा सकारात्मक सोचता है
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20130108
12-12-12 अफवाहों से बेपरवाह
पिछले लगभग एक वर्ष से सोशल नेटवर्किंग समेत दुनिया के तमाम अखबार व समाचार चैनलों में लगातार 12-12-12 के दिन विश्व की तबाही की बात दोहरायी जा रही है. कहीं लोगों ने इसे वाकई काफी गंभीरता से लिया तो कहीं इसे लेकर कई तरह के मजाक भी हुए. लेकिन इससे सबसे बेफिक्र अगर कोई नजर आया है तो वह है भारतीय सिनेमा जगत. इस दिन से जुड़े अफवाहों से बेपरवाह होकर सिनेमा जगत ने न सिर्फ अगले साल रिलीज होनेवाली कई फिल्मों की घोषणा की है, बल्कि हिंदी सिनेमा के 100 साल पूरे होने की खुशी में जश्न का भी ऐलान किया है. इस क्रम में अनुराग कश्यप ने 12 निर्देशकों से साथ बनी एक ँप्रयोगात्मक फिल्म द लास्ट एक्ट की घोषणा की है. तमिल सिनेमा के लोकप्रिय सुपरस्टार रजनीकांत न सिर्फ अपना जन्मदिन धूमधाम से मना रहे हैं, बल्कि उनकी बेटी सौंदर्य पिता के साथ एक फिल्म की घोषणा भी कर रही हंै. हिंदी सिनेमा जगत में आनेवाले सालों में कुछ बेहतरीन फिल्मों की घोषणा हुई है, जिनमें आशुतोष ग्वारिकर की पीरियड फिल्म की चर्चा है. दरअसल, यह हकीकत है कि निर्देशक हमेशा दूरदर्शी होता है. वह कल में जीता है. राकेश रोशन ने एक बार अपनी बातचीत में कहा था कि एक फिल्मकार के लिए किसी विषय को लेकर फिल्म बनाना इसलिए भी कठिन होता है क्योंकि एक फिल्म बनने में कई साल लग जाते हैं और यह जरूरी नहीं कि वह जिस विषय को लेकर फिल्म बनाने की शुरुआत कर रहा हो. वह विषय प्रासंगिक ही हो. इसलिए एक निर्देशक को बहुत दूर की सोच रखनी चाहिए. वाकई, अगर ऐसा न होता तो शायद राजकपूर ने कई सालों पहले मेरा नाम जोकर जो आज के दौर में प्रासंगिक है न बना दिया होता. और भी ऐसी कई फिल्में हैं, जो उस दौर में कामयाब नहीं हुईं लेकिन बाद के दौर में कामयाब रही. सिनेमा हमेशा सकारात्मक सोचता है
साहब का नायाब सहारा सायरा
आज युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार का जन्मदिन है. आज उन्होंने अपने जीवन का 90वां बसंत पार कर लिया. हिंदी सिनेमा जगत उन्हें ट्रेजेडी किंग के रूप में जानती हैं, क्योंकि उनकी फिल्मों में प्राय: वे एक दुखी और असफल प्रेमी रहे. लेकिन वास्तविक जिंदगी में वे उतने ही भाग्यशाली भी रहे, कि उन्हें सायरा बानो जैसी संगिनी का साथ मिला. दोनों की उम्र में भले ही 22 साल का फासला हो. लेकिन दोनों के दिलों में 1 मील की भी दूरी नहीं है. सायरा जिस शिद्दत से आज भी दिलीप कुमार को प्यार करती हैं. ऐसी प्रेम कहानियां बिरले ही देखने को मिलती है. दिलीप साहब खुद मानते हैं कि उनकी अपनी कोई संतान नहीं. लेकिन सायरा और उनमें इतनी अच्छी बांडिंग है और दोनों एक दूसरे का साथ इस कदर एंजॉय करते हैं कि उन्हें किसी और की कमी महूसस ही नहीं होती. सायरा दिलाप साहब की फैन थी. फैन फिर बाद में पत् नी बनी. उम्र और वक्त के ढलान के साथ साथ प्राय: प्रेम भी औपचारिक रूप ले लेता है. लेकिन सायरा की आंखों में आज भी दिलीप साब के लिए प्यार जवां ही नजर आता है. पिछले साल आज के दिन दिलीप साहब के जन्मदिन पर न सिर्फ सायरा ने खास जश्न मनाया. बल्कि वे झूम कर नाचीं. सायरा दिलीप कुमार को सिर्फ साहब कह कर ही बुलाती हैं. आज भी वे दिलीप साहब का इस कदर ख्याल रखती हैं कि उन हर समारोह में वे दिलीप को ले कर आती हैं, जहां आना बेहद अनिवार्य है. यही नहीं दिलीप साहब की जॉगर्स पार्क में मॉर्निंग पिछले कई सालों से नियमत: सायरा की वजह से ही हो पाती है. दिलीप सायरा का हाथ पकड़ कर ही हर जगह जाते हैं. लेकिन यह हाथ यह साथ एक जोरू के गुलाम का नहीं है, या सायरा यह साबित करने की कोशिश नहीं करतीं कि वह साहब की सहारा हैं. इस प्रेम कहानी में प्यार भी है समर्पण भी और सबसे अहम एक दूसरे के लिए आदर भी.
विज्ञापन नहीं कुबेर का खजाना
ऋतिक रोशन ने एक फोन कंपनी के ब्रांड अंबैस्डर बनने के लिए 20 करोड़ का आॅफर ठुकराया. चूंकि उन्हें इस कंपनी के विज्ञापन का कांसेप्ट ही पसंद नहीं आया. इस बात की बी टाउन में खासतौर से चर्चा हो रही है. चूंकि इन दिनों विज्ञापन के एंडॉरसमेंट के लिए हर सुपरसितारा बेचैन है और वे इसी माध्यम से गाढ़ी कमाई करते हैं. वजह स्पष्ट है कि जितनी मेहनत के बाद वे फिल्मों में करोड़ों कमाते हैं. उससे कहीं कम मेहनत और वक्त में वे विज्ञापनों से मालामाल हो जाते हैं. सो, इन दिनों फिल्मों के साथ साथ किस स्टार ने किससे कौन सा ब्रांड छीना. ये खबरें भी सुर्खियों में छायी रहती है. ऐसे में ऋतिक ने जब इतनी बड़ी रकम ठुकरायी है तो जाहिर है चर्चा होगी ही. किसी दौर में ऐसे कई लीजेंडरी अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मों के अलावा विज्ञापनों में आने से साफ इनकार कर दिया था. हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार ने साफ शब्दों में कहा था कि वे अभिनेता हैं और अभिनेता का काम सिर्फ अभिनय करना है. दिलीप आज भी अमिताभ बच्चन के विज्ञापन करने से खफा रहते हैं. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के भगवान मानेजाने वाले रजनीकांत ने तो एक कोल्ड ड्रिंक्स की कंपनी का करोड़ों का आॅफर कई सालों पहले सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था कि उन्होंने रात पर इस आॅफर के बारे में सोचा. लेकिन फिर उन्होंने महसूस किया कि लोग तो उनका नाम देख कर वह पेय पद्धार्थ पियेंगे. लेकिन अगर वह हानिकारक हुआ तो वे कितनी मौत के कारण बनेंगे. सो, उन्होंने कभी विज्ञापन से न जुड़ने की कसम खायी. अनिल कपूर ने कभी विज्ञापनों में न आने की कसम खायी थी. लेकिन इन दिनों वे भी धारा प्रवाह में बह चुके हैं. दरअसल, हकीकत यही है कि बॉलीवुड में इन दिनों विज्ञापनों से बॉलीवुड के कई सितारों ने अपनी ख्वाहिशें पूरी की हैं.विज्ञापन उनके लिए कुबेर के खजाने की तरह है.
20121208
सफल अभिनेता सफल व्यवसायी
किसी दौर में अभिनेता भरत भूषण का कद सुपरस्टार का था. लेकिन बाद के दौर में परिस्थिति ऐसी आ गयी कि उन्हें अपने मकान को बेच कर खुद की जीविका के लिए पैसे एकत्रित किये. राजेंद्र कुमार ने भी एक दौर में आसमान छुआ. लेकिन बाद के दौर में जाकर उन्होंने भी बुरी आर्थिक स्थिति से गुजरना पड़ा था. अमिताभ बच्चन का भी एक दौर ऐसा आया, जब नौबत दीवालिया होने तक आ गयी थी. लेकिन अमिताभ ने परिस्थिति का सामना करते न सिर्फ खुद को फिर से खड़ा किया, बल्कि अपनी कंपनी एबीसीएल को भी दोबारा पूरी तरह स्थापित किया. राज कपूर कभी अपनी महत्वकांक्षी फिल्म मेरा नाम जोकर की वजह से खस्ता हालात में पहुंच गये थे. गुरुदत्त ने भी बाद के दौर में मुफलिसी देखी. दरअसल, उस दौर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग व्यवसायिक रूप से सोच कर फिल्म निर्माण में निवेश नहीं करते थे. उस दौर में अपने बैनर की फिल्मों का निर्माण करना सिर्फ शान की बात मानी जाती थी. जबकि बाद के दौर में जितने अभिनेताओं ने भी अपने प्रोडक् शन कंपनी की शुरुआत की, वे कामयाब रहे. उस दौर में अभिनेता शौक से फिल्में निर्माण करते थे. अपने बैनर से केवल अपने परिवार के लोगों को लांच करने की परंपरा थी. जबकि बाद के दौर में शाहरुख खान, आमिर खान, अजय देवगन और अब अक्षय कुमार जैसे अभिनेताओं ने सोच समझ कर नीति के साथ प्रोडक् शन हाउस को स्थापित किया. आमिर खान फिलवक्त अभिनेता व बतौर निर्माता सबसे सफल व्यवसासियों में से एक हैं. चूंकि उन्होंने एक नीति के तहत बाहरी प्रतिभाओं को भी मौके दिये. जरूरत न हो तो अपने प्रोडक् शन की फिल्मों में काम भी नहीं किया. शाहरुख ने रेड चिल्ली नामक बड़ी कंपनी स्थापित की. अक्षय और सलमान भी इसी राह में है. चूंकि अब ये सभी बुद्धिमानी के साथ निवेश कर रहे हैं, सो वे कामयाब बी रो रहे हैं
टीम की अहमियत समझते स्टार्स
अजय देवगन की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म सन आॅफ सरदार ने कुछ दिनों पहले ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया. इससे पहले भी अजय की कई फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हुई हैं. लेकिन इस बार चूंकि वे जब तक हैं जान के साथ प्रतियोगिता कर रहे थे. सो, वे इसे अपनी बड़ी जीत मानते हैं और इस जीत की खुशी में उन्होंने जश्न के रूप में सक्सेस पार्टी रखने की बजाय अपने क्रू व टीम मेंबर को एक नायाब तोहफा दिया है. हाल ही में एक अखबार में उन्होंने पूरे एक पन्ने के विज्ञापन की जगह अपने टीम के एक एक सदस्य फिर चाहे वह स्पॉट ब्वॉय ही क्यों न हो. सभी का नाम उस विज्ञापन में शामिल कर. थैंक्यू नोट लिख कर सभी के प्रति अपना आभार प्रकट किया है. आज के दौर में जहां विज्ञापनों के स्पेस की कीमत सबसे अधिक है. ऐसे में अजय ने अपने टीम को यह आभार देकर दर्शाया है कि वे व्यवसायिक होने के साथ साथ अपने टीम मेंबर्स का कितना ख्याल रखते हैं. शायद यही वजह है कि अजय की टीम के कई लोग उनसे फूल और कांटे से लेकर अब त क जुड़े हैं. सलमान खान के साथ काम कर रहे कितने सेक्योरिटी गार्ड को बॉडीगार्ड बनाने की ट्रेनिंग के लिए सलमान ने प्रेरित किया. उनके खास बॉडीगार्ड शेरा ने सलमान की मदद से ही अपनी कंपनी शुरू कर दी है. अक्षय कुमार ने भी हाल ही में अपनी फिल्म खिलाड़ी 786 की तकनीशियन टीम को लगभग 12 लाख का बोनस दिया है. चूंकि वे उनके काम से बेहद खुश हैं. शाहरुख खान के साथ काम करनेवाले कई लोग बताते हैं कि शाहरुख किसी भी फिल्म की शूटिंग के आखिरी दिन टीम के एक एक मेंबर्स को गले लगाते हैं और उन्हें आगे के लिए बेस्ट आॅफ लक कहते हैं. दरअसल, स्टार्स की ऐसी सोच दर्शाती है कि वे भी जानते हैं कि फिल्म टीम वर्क है, सो वे टीम को खास अहमियत देते हैं.
बड़ी हो गयी बेबो
बबीता की तरह उनकी बेटियां भी शादी नहीं निभा पायेंगी.लोगों की यह मानसिकता बन चुकी है. लेकिन कपूर खानदान की बेटी और सैफ अली खान की नयी नवेली दुल्हन करीना कपूर ने इसे गलत साबित कर दिया है. शादी के बाद न वह अब और अधिक आत्मविश्वासी नजर आ रही हैं, बल्कि वे लगातार चुनौतीपूर्ण किरदारों में भी नजर आ रही हैं. फिल्म हीरोइन में सशक्त भूमिका निभाने के बाद तलाश में भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण और लीक से हट कर किरदार निभा कर खुद को साबित कर दिया.जल्द ही प्रकाश झा की फिल्म सत्याग्रह में नजर आयेंगी. दरअसल, इन दिनों दौर करीना का ही है. करीना न केवल फिल्मों में बल्कि पब्लिक अपीयरेंस में भी खूब उपस्थिति दर्ज करा रही हैं. यह वही बेबो हैं, जो कभी दीदी करिश्मा और मां बबीता का आंचल पकड़ कर इस इंडस्ट्री में आयी थीं.बार बार ठेस खाने के बाद अब वह परिपक्व हो चुकी हैं. वे सोच समझ कर किरदार निभा रही हैं.जरूरत होने पर वे आयटम सांग का भी हिस्सा बन रही हैं. कुछ दिनों पहले करीना से फिल्म सिटी में मुलाकात हुई थी. करीना प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया से बातचीत करने में व्यस्त थीं. जाहिर है वे मेकअप में ही होंगी. लेकिन एक बात गौर करनेवाली थीं कि करीना को हाइ हिल्स से काफी परेशानी है. वह चैनल को शॉट देने के बाद प्रिंट से बात करते वक्त अपने हिल्स उतार कर बात कर रही थीं. अपने अस्टिट को उन्होंने आदेश दिया कि उनके हिल्स को साफ कर गाड़ी में रखें. यह दर्शाता है कि करीना के मन में भी एक आम लड़की की तरह ही अपने श्र्ृांगार की वस्तुओं को संभाल कर रखनेवाले भी गुण हैं. कई लोगों को आशंका थी कि करीना लापरवाह हैं और अपनी शादीशुदा जिंदगी में वे सफल नहीं हो पायेंगी. लेकिन जिस अंदाज में बेबो सबकुछ सुव्यवस्थित तरीके से कर रही हैंं. दर्शा रहा है कि बेबो अब बड़ी हो गयी हैं
डांस की एबीसीडी
पिछले कुछ सालों में रियलिटी शोज ने डांस को परफॉरमेंस का एक अहम जरिया बना दिया है. डांस के नये स्वरूप, नये कलाकार और नये गुरु सभी लोकप्रिय हैं. फिल्मों में भी अब केवल सरसो के खेत में या किसी पेड़ के पीछे आम डांस नहीं हो रहे. हर फिल्म में आयटम या अभिनेत्री या अभिनेता अपने लिए खास गीत फिल्मा रहे हैं, जिनमें उन्हें अपनी डांसिंग प्रतिभा को दिखाने का मौका मिले. और शायद इसी जुनून ने कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा को भी फिल्म एनी बडी कैन डांस जैसी फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया है. भारत में एबीसीडी पहली फिल्म होगी, जो पूरी तरह से डांस पर आधारित होगी और जिसमें हिंदी सिनेमा जगत के सारे महारथी कोरियोग्राफर एक साथ नजर आयेंगे. यह फिल्म 3डी में बन रही है. फिल्म का प्रोमो ही दर्शा रहा है कि फिल्म किस स्तर की है. पिछले कुछ सालों में रियलिटी शोज ने निकली जितनी प्रतिभाओं को डांस फॉर्म में हुनर दिखाने का मौका मिला है. शायद किसी और टैलेंट में मिला हो. फिर चाहे वह सलमान हो, शक्ति मोहन, धर्मेश, या फिर झलक दिखला जा के सारे कोरियोग्राफर. दरअसल, हिंदी फिल्मों को आज ऐसे हुनर की जरूरत है. रेमो डांस को जीते हैं और यह उनकी फितुर का ही नतीजा है कि उन्होंने अपनी ही शैली में जैक आॅफ आॅल बनने की बजाय मास्टर आॅफ वन बन कर खुद को साबित करने की कोशिश की है. वर्ष 2006 में हॉलीवुड निर्देशक एने फ्लेचर ने स्टेप अप नामक कुछ ऐसी फिल्म बनाई थी, जिसका केंद्र विषय भी डांस ही था. किसी दौर में वी शांताराम की फिल्म गीत गाया पत्थरों ने, नवरंग जैसी फिल्मों में डांस का वह जुनून और खूबसूरती नजर आती थी.मुमकिन हो कि भविष्य में भी ऐसे विषयों के साथ फिल्मों में प्रयोग किये जायेंगे.विदेशों में तो ऐसी कई फिल्में बनती रही हैं.
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