20121127

मौलिक होगी मेरी तलाश : रीमा कागती



हनीमून ट्रैवल्स की कामयाबी के बाद रीमा कागती की दूसरी फिल्म तलाश. इस फिल्म में उन्होंने मिस्टर परफेक् शनिस्ट आमिर खान को निर्देशित किया है. रीमा का मानना है कि फिल्म बिल्कुल मौलिक है. और दर्शक इसे जरूर पसंद करेंगे. बातचीत रीमा से

रीमा कागती ने इससे पहले हनीमून ट्रैवल्स निर्देशित की है. लेकिन यह फिल्म उनके लिए सबसे खास है. चूंकि वे पहली बार थ्रीलर फिल्म बना रही हैं. रीमा मानती हैं कि जोया अख्तर के लेखन से उन्हें खास सहयोग मिला है और आमिर खान ने अपने अभिनय से फिल्म को खास बना दिया है.
कैसे बनी कहानी
यह कहानी दरअसल,जोया के जेहन की कहानी है. फिल्म में कुछ ऐसी घटनाएं हैं. जो वाकई में जोया के साथ घटी हैं. उसने इस बारे में जब मुझसे चर्चा की तो हमने इस पर थोड़ा लिखना शुरू किया और धीरे धीरे कहानी बढ़ती गयी और इसने फिल्म का रूप ले लिया. इसके बाद जोया और मैंने फरहान से बात की. फरहान ने आमिर से बात की और फिर यह कहानी आगे बढ़ी. मैं यहां एक बात और स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगी कि किसी भी थ्रीलर फिल्म की अपनी जरूरतें होती हैं. कई बार ऐसा होता है कि हम किसी फिल्म के एक दृश्य को दिखाते हैं तो लोग कहने लगते हैं कि यह चोरी है. मेरी फिल्म तलाश पूरी तरह से ओरिजनल स्क्रिप्ट है. और कहीं से भी इसका संदर्भ नहीं लिया गया.
आमिर-रानी का होमवर्क
आमिर खान और रानी मुखर्जी बिल्कुल मेरी तरह हैं. वे अपने किरदारों को लेकर काफी होम वर्क करना पसंद करते हैं. काफी रिहर्सल करते हैं. खुद मैं जब भी शूट करना शुरू करती हूं तो पहले खासतौर से इस बात का ख्याल रखती हूं कि मेरी सारी तैयारियां पेपर में बिल्कुल तय हो. आमिर रानी के भी इस स्वभाव से मुझे मदद मिली. आमिर को लेकर काफी बातें हो रही थीं कि उनका मेरा विवाद चल रहा है. बल्कि सच यह है कि क्रिेयेटिव लेवल पर बातचीत को लोग झगड़े का नाम दे देते हैं , जो बिल्कुल सही नहीं है.

करीना हैं स्पॉनटेनियस
करीना कपूर को ज्यादा होम वर्क पसंद नहीं है. मुझे शुरू शुरू इस बात से डर लगा था. लेकिन करीना कमाल की एक्ट्रेस हैं. वे बिना होम वर्क किये भी जब कैमरे के सामने आती हैं तो अपना अभिनय का भाग बेहतरीन तरीके से निभाती हैं. एक सीन में जिसे लेकर मैं काफी चिंतित थी. मुझे लगा था कि काफी टेक लेने होंगे. लेकिन उन्होंने फौरन कुछ ही टेक में सीन ओके करवा दिये.सो, मैं मानती हूं कि कैमरा आॅन होते ही करीना कमाल कर जाती हैं.
खास रहा अंडरवाटर सीन
हमें एक सीन की शूटिंग अंडरवाटर करनी थी. हमने मुंबई के एक जगह पर इसे शूट किया भी. लेकिन उसमें वह एक्यूरेसी नहीं आ पा रही थी तो फिर हमने उसकी शूटिंग स्पेशली लंदन के एक स्टूडियो में की. इस शॉट के लिए हम वहां मुंबई पुलिस की वही गाड़ी लेकर गये, जो लगातार फिल्म में इस्तेमाल किये जा रहे थे. चूंकि आमिर लगातार उसी जीप में घूम रहे थे. सो, कंटीन्यूटी बरकरार रखने के लिए हम वह गाड़ी भी वहां लेकर गये. यह फिल्म का सबसे टफ शॉट है.

सिनेमाई सफ़र की सेकेंड इनिंग

श्रीदेवी खुश हैं. उत्साहित हैं. उनकी कमबैक फिल्म इंगलिश-विंगलिश को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला. उनका मनोबल बढ़ा है और अब एक बार फिर से फिल्मों की स्क्रिप्ट पढ़ रही हैं. माधुरी दीक्षित जल्द ही डेढ़ इश्किया और गुलाब गैंग में केंद्रीय भूमिका में नजर आने जा रही हैं. रवीना भी दोबारा फिल्मों में वापसी कर रही हैं. तो मनीषा कोईराला और करिश्मा ने अपनी फिल्में भूत रिटर्न और डेंजरस इश्क से उपस्थिति दर्ज करा चुकीं हैं. स्पष्ट है कि बॉलीवुड की बालाओं की यह गैंग जो कभी बॉलीवुड में अपने अभिनय से सबको चौंकाती रही हैं. एक बार फिर से सेकेंड इनिंग कर रही हैं. 


इंगलिश विंगलिश का फर्स्ट लुक जिस दिन लांच किया गया था. और जिस तरह श्रीदेवी को सेंसर सर्टिफिकेट के साथ बात करते हुए दिखाया गया था. और जिस तरह दर्शकों ने जम कर तालियां बजाई थीं. जाहिर हो चुका था कि दर्शक आज भी श्रीदेवी का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन असल परीक्षा फिल्म की रिलीज और उसकी सफलता पर आधारित थी. और उसमें श्रीदेवी पास हुईं. लंबे समय के बाद किसी फिल्म में एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई गयी, जो अंगरेजी सिर्फ इसलिए सीखना चाहती है ताकि वह अपने परिवार वालों को खुशियां दे सकें. श्रीदेवी ने जिस जीवंतता से शशि का किरदार निभाया. दर्शक उनकी उम्र भूल गये और श्रीदेवी को तहे दिल से स्वीकार किया. श्रीदेवी जो कभी चुलबुली सी अदाकारा होने के साथ साथ  अपनी नृत्यशैली के लिए भी जानी गयीं, उन्होंने एक हाउस ह्वाइफ की भूमिका में भी खूब रंग बिखेरे. फिल्म इंगलिश विंगलिश के आखिरी दृश्य में जिस तरह शशि अपना स्पीच देती है. थियेटर के सभी लोग रोने लगते हैं. यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसे कई लोगों ने अपनी मां को भी डेडिकेट किया. दरअसल, यह श्रीदेवी के अभिनय का कमाल था कि 14 साल की वापसी के बावजूद दर्शकों को श्रीदेवी में वही ताजगी नजर आयी. श्रीदेवी इस फिल्म को लेकर काफी नर्वस थीं. इसकी वजह यह थी कि वह जानती हैं कि बॉलीवुड के दर्शक अभिनेत्रियों को यहां दूसरी पारी खेलनी की भलिभांति इजाजत नहीं देते. कई अभिनेत्रियों ने जब भी दूसरी शुरुआत करने की कोशिश की है. नाकामयाब रही हैं. ऐसे में श्रीदेवी का नर्वस होना स्वभाविक था. लेकिन उनकी एक सफलता ने दरअसल, उन तमाम अभिनेत्रियों का मनोबल बढ़ा दिया है. जो अपनी दूसरी पारी की शुरुआत करने जा रही हैं. माधुरी दीक्षित ने अपने परिवार के लिए फिल्मों से दूरी बना ली थी. वे अमेरिका चली गयी थीं. वे अमेरिका तो गयीं. बस भी गयी थीं. लेकिन उनकी आत्मा आज भी बॉलीवुड में थी. वे वापस लौट आयीं और फिर से गुलाब गैंग और डेढ़ इश्किया से अपनी दूसरी शुरुआत कर रही हैं. लेकिन निश्चित तौर पर वे भी नर्वस हैं. चूंकि उन्होंने भी अपनी आधी जिंदगी इंडस्ट्री में ही गुजारी है. एक अभिनेत्री की उम्र इंडस्ट्री में कितने सालों की होती हैं. यह वह भी जानती हैं. श्रीदेवी लेकिन वाकई लकी रहीं कि उनकी सेकेंड इंिनंग में उन्हें कामयाबी का स्वाद चखने का मौका मिला. वरना, कम अभिनेत्रियां ही दूसरी पारी में यह स्वाद चख पाती हैं. किसी दौर में श्रीदेवी को बराबरी की टक्कर देनेवाली माधुरी भी अपनी सेकेंड इनिंग में नाकामयाब रही थीं. खुद माधुरी मानती हैं कि यह सच है कि आज भी निर्देशक उनके साथ काम करना चाहते हैं. लेकिन जब वे अपने अभिनय के आधार पर अपना मेहनताना मांगती हैं तो निर्माता चौंक जाते हैं. दरअसल, हकीकत यही है कि भले ही आज लोग माधुरी की तारीफ सार्वजनिक स्थलों पर कर दें. उनके मुस्कान के कायल हो जायें. लेकिन जब वह परदे पर आती हंैं तो लोग आज भी उनसे तेजाब वाली एक दो तीन की तरह थिरकने और अदाएं दिखाने की ही उम्मीद करते हैं. माधुरी बेहतरीन अभिनेत्री हैं. लेकिन यह भूला नहीं जा सकता कि उन्होंने शादी के बाद जब आ जा नचले जैसी फिल्म की,तो दर्शकों ने उन्हें सिरे से नकार दिया. निश्चि तौर पर वह डर आज भी माधुरी के मन में कहीं न कहीं होगा. क्योंकि एक कलाकार के लिए उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसकी लोकप्रियता व उसके दर्शक ही होते हैं. हिंदी फिल्मों में पिछले 20 सालों से लगातार कुछ पुरुष सुपरस्टार्स का ही दबदबा है. लेकिन वे सारी अभिनेत्रियां जो किसी दौर में शीर्ष पर थीं. आज उन्हें दर्शकों से वह प्यार नहीं मिल पा रहा. दरअसल, हिंदी फिल्मों की यह विडंबना है कि यहां अभिनेत्रियों की खूबसूरती को हमेशा सबसे अधिक दिलचस्पी दी गयी है. अभिनेत्रियों ने जहां घर बसाया. शादी की. बच्चे हुए. वे उनके कमबैक की कल्पना भी नहीं करते और अगर वे कमबैक करें भी तो उनकी रुचि खत्म हो जाती है. और यही वजह है कि किसी दौर में राजा हिंदुस्तानी जैसी फिल्मों से अपनी खास स्थान बना चुकीं करिश्मा कपूर जब डेंजरस इश्क जैसी फिल्मों से वापसी करती हैं और फिल्में नाकामयाब हो जाती हैं तो लोग सारा दोष अभिनेत्री पर ही मढ़ देते हैं. अक्सर जो अभिनेत्रियां कम बैक कर रही भी होती हैं. वे खुद पर कमबैक का टैग लगाने से कतराती हैं. इसकी वजह यही है कि कमबैक के तमगे से लोगों की दिलचस्पी उनमें घट जाती है. हाल ही में रानी मुखर्जी की फिल्म अय्या में जब बार बार रानी से यह बात कही जा रही थी कि यह उनकी कमबैक फिल्म है तो रानी इस बात पर ऐतराज जताती हुईं कह रही थी कि पिछले साल उनकी नो वन किल्ड जेसिका फिल्म आ चुकी है तो फिर अय्या को कम बैक क्यों माना जा रहा है. रानी की झंझलाहट इस बात को दर्शाती है कि कमबैक शब्द उनके लिए कैसे बाधा बनता है. फिल्म अय्या कामयाब नहीं रही. लेकिन फिल्म में रानी ने बेहतरीन तरीके  के कई नये डांस फॉर्म दिखाये. लेकिन फिर भी चर्चा इस बात की हुई कि अब रानी का दौर खत्म हो चुका है. रानी से हाल ही में तलाश फिल्म को लेकर मुलाकात हुई तो उन्होंने अपने मन की यह बात सामने जाहिर की, कि बॉलीवुड अभिनेत्रियों को दूसरा चांस नहीं देता. यह हरदम दिखते रहना जरूरी है. फिर चाहे फिल्में बुरी ही क्यों न हो. उन्होंने यह भी माना कि असफलता किसी भी कलाकार का मनोबल तोड़ती है. फिल्म नहीं चलती है तो मतलब दर्शक फिल्म देखने नहीं गये और जो भी मेहनत एक कलाकार करता है. वह बर्बाद हो जाता है. निश्चय ही रानी ने अय्या में अपने डांसिंग हुनर को एक स्तर दिया है. लेकिन फिर भी उन्हें नाकामयाबी ही मिली है और आगे उनके लिए फिल्मी रास्ते कठिन होते जायेंगे. वही दूसरी तरफ मनीषा कोईराला ने भूत रिटर्न से रिटर्न हुईं. लेकिन गुड़िया सी दिखनेवाली इस अभिनेत्री में अब न तो दर्शकों को रुचि है. न ही मीडिया को. जिस दिन मनीषा मीडिया से बात करने वाली थीं फिल्म भूत रिटर्न्स को लेकर. उस दिन करीना कपूर और यश चोपड़ा पर आधारित भी कई इवेंट्स थे मुंबई में. मीडिया ने करीना और य श चोपड़ा दोनों ही इवेंट्स को तवज्जो दी थी. मनीषा के इंटरव्यू में काफी कम मीडिया गयी थी. यह दर्शाता है कि मीडिया भी वर्तमान में ही जीता है. जबकि मीडिया के पुराने व वरिष्ठ पत्रकारों ने बताया कि कभी मनीषा से बातचीत के लिए लोगों की कतार लगी रहती थी. कोलकाता, मुंबई, दक्षिण में वे कितनी लोकप्रिय थीं. लेकिन आज दर्शक उन्हें पसंद नहीं करते. जबकि मनीषा एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं. लेकिन चूंकि अब वह पहले की तरह आकर्षक नहीं दिखतीं. दर्शकों ने उनमें दिलचस्पी लेनी छोड़ दी है. फिलवक्त मनीषा के पास कोई फिल्म नहीं है.
फिल्म मोहरा में तू चीज बड़ी है मस्त मस्त से दर्शकों के दिलों पर राज करनेवाली रवीना ने भी लंबे समय तक खुद को बरकरार रखने की कोशिश की. लेकिन वह भी नाकामयाब रहीं. हालांकि एक बार फिर से वह भी केंद्रीय भूमिका वाली फिल्म शोभना 7 नाइट्स कर रही हैं. बॉलीवुड की बबली गर्ल प्रीति जिंटा भी इश्क इन पेरिस से अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर रही हैं. लेकिन वे भी अपनी सफलता को लेकर संदेह में हैं. यही वजह है कि वे बार बार फिल्म की रिलीज को आगे बढ़ा रही हैं. मशहूर अभिनेत्री वहीदा रहमान इस संदर्भ में कहती हैं कि यह हकीकत है कि हिंदी फिल्मों में उम्रदराज अभिनेत्रियों के लिए सेंटर भूमिका वाली फिल्में कम बनती हैं. फिल्में महिलाओं को वक्त से पहले बूढ़ा बना देता है. उनकी जवानी छीन लेता है और कुछ दिनों के बाद मुख्य किरदार निभानेवाली अभिनेत्रियां भाभी, दीदी के किरदार में नजर आने लगती हैं. यह किसी भी अभिनेत्री के लिए डिप्रेशन की स्थिति हो जाती है. लेकिन फिर भी वर्तमान में कुछ निर्देशक यह हिम्मत दिखा रहे हैं कि वे पुरानी अभिनेत्रियों को लेकर भी फिल्में सोच रहे हैं तो यह एक सकारात्मक पहल हैं. अभिनेत्री जूही चावला भी किसी दौर में बेहतरीन अभिनेत्री थीं. लेकिन वे इन दिनों फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में ही नजर आती हैं. इन सबसे से परे तब्बू एक अपवाद हैं. तब्बू भी नहीं मानतीं कि वह कमबैक कर रही हैं. उनका कहना है कि वे शुरू से ही कम फिल्में करती थीं. हमेशा स्क्रीन पर न दिखने का मतलब फिल्में न मिलना नहीं होता. खुद की अपनी च्वाइस से भी वह फिल्मों से दूर रही हैं. लेकिन वे जब भी आयी हैं. कामयाब रही हैं. उनकी पिछली फिल्में चीनी कम कामयाब रही हैं और आनेवाले समय में वह क फिल्म में डाकू के किरदार में नजर आनेवाली हैं. साथ ही डेविड और लाइफ आॅफ पाइ जैसी फिल्मों का भी वह हिस्सा हैं. कमबैक अभिनेत्रियों में काजोल का नाम भी उन अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्हें दर्शक हमेशा परदे पर देखते रहना चाहते हैं. आज भी दर्शकों को काजोल और शाहरुख की जोड़ी साथ साथ परदे पर देखने की इच्छा रहती है. काजोल ने भी हाल ही में स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही एक अच्छी स्क्रिप्ट के साथ फिल्मों में काम करना शुरू करेंगी. मशहूर अभिनेत्री और अमिताभ बच्चन की बहू ऐश्वर्य राय बच्चन ने प्रेगनेंसी के बाद से फिल्मों से थोड़ी दूरी बनाई है. लेकिन वे जल्द ही वापसी करेंगे. लेकिन मीडिया व लोगों ने उन्हें भी कमबैक अभिनेत्रियों की फेहरिस्त में शामिल कर दिया है. ऐश्वर्य राय चूंकि गर्भवती होने के बाद काफी मोटी हो गयी थीं. तो लोगों ने यह कयास लगाने शुरू कर दिये थे कि अब वे फिल्मों में काम नहीं करेंगी. इस संदर्भ में भी वहीदा रहमान का कहना है कि लोग अभिनेत्रियों को जबरन मजबूर कर देते हैं कि वे काम न करें. जबकि कुछ दिनों की दूरी या ब्रेक के बाद अगर वह वापसी करें तो उन्हें कमबैक नहीं कह देना चाहिए. आखिर एक अभिनेत्री की भी अपनी दुनिया होती है. उसे भी आजादी से जिंदगी जीने का हक है. हेमा मालिनी मानती हैं कि हिंदी फिल्मों में हॉलीवुड की तरह वह हिम्मत ही नहीं है कि वह किसी महिला अभिनेत्री को लेकर मेरिल स्ट्रीप की तरह द आयरन लेडी फिल्म बनाये. अगर फिल्म बनेगी भी तो शायद दर्शक उसे पसंद नहीं करेंगे. सो, यह सच है कि बॉलीवुड में अभिनेत्रियों के काम की सीमा उनकी उम्र की सीमा पर ही आधारित होता है. बहरहाल, सेकेंड इनिंग कर रहीं अभिनेत्रियों में लोगों की निगाह माधुरी दीक्षित पर सबसे अधिक टिकी है. शीर्ष अभिनेत्रियों के साथ इन दिनों नीतू कपूर भी कई फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में नजर आ रही हैं. रेखा प्राय: राकेश रौशन की फिल्मों में नजर आती रही हैं. अनीता राज जैसी अभिनेत्रियों ने भी छोटी भूमिकाओं वाली फिल्मों से शुरुआत की है. कयास लगाये जा रहे थे कि रीना रॉय फिल्मों में वापसी करेंगी. लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ अफवाह बताया है. 

स्थापित शोज की घटती लोकप्रियता



सलमान खान ने बिग बॉस सीजन 6 का तेवर बदला. उन्होंने इस शो में अपशब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगायी. शो का समय निर्धारित किया. लेकिन अफसोस यह शो इस वर्ष उतनी लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाया. अब बिग बॉस के मेकर्स इसे लोकप्रिय बनाने के लिए वे हर हथकंडे अपना रहे हैं. जिससे शो को कुछ लोकप्रियता मिल जाये. बिग बॉस के घर को पहले तो टूरिज्म के नाम पर प्रमोट किया गया. फिर इस शो में नये नये प्रतिभागियों की एंट्री करवाई जा रही है. तो शो के प्रतिभागियों को मड से बने घरों में कुछ दिन बिताने पड़े. इमाम जैसे प्रतिभागियों को लाकर शो में जबरन रुचि बढ़ाने की कोशिश की जा रही है और अब इस शो में दुनिया की सबसे छोटी महिला बिग बॉस के घर में आ चुकी हैं. मसलन, बिग बॉस वे तमाम कोशिशें कर रहा है. ताकि दर्शकों की रुचि बरकरार रहे. कुछ इसी तरह सोनी टीवी का लोकप्रिय रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति भी इस वर्ष अपनी लोकप्रियता खो रहा है. हालांकि इस वर्ष भी सोनाली मुखर्जी जैसी महिलाओं को लाकर ह्मुमन टच देने की कोशिश की तो जा रही है. लेकिन आम दर्शकों में इस वर्ष केबीसी को लेकर खास उत्सुकता नहीं है. दरअसल, हकीकत यह है कि ये तमाम शो हर वर्ष अपने नये कलेवर में आने की कोशिश तो करते हैं. नये सीजन का इन्हें नाम तो मिलता है. लेकिन शो का अंदाज बहुत हद तक एक सा होता है और यही वजह होती है कि दर्शक भी इस तरह के शो से बोर हो जाते हैं. निस्संदेह पिछले कई सालों से केबीसी और बिग बॉस ने कामयाबी हासिल की. लेकिन वे सारे सीजन कुछ न कुछ नया लेकर आते थे या यह भी कहा जा सकता है कि बिग बॉस व केबीसी ने अपना सर्वश्रेष्ठ अब दे दिया है. अब ऐसे शोज पर विराम लगना चाहिए. रामायण, महाभारत के भी सीक्वल आज भी टेलीविजन पर दिखाये जा रहे हैं.कुछ महीनों पहले मेरी सिद्धार्थ काक से बात हुई थी. सिद्धार्थ काक सुरभि जैसे शो के रचयिता थे. मैंने उनसे पूछा कि वे सुरभि का सीक्वल या नया सीजन लेकर क्यों नहीं आये. उन्होंने मार्के की बात कही थी कि कुछ चीजें एक बार हो तो उसका एहसास जिंदगी भर रह जाता है. जो माइलस्टोन बन चुके होते हैं. उन पर बार बार रगड़ दी जायेगी तो वे भी आम पत्थर हो जायेंगे. सुरभि आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है, क्योंकि उसका कोई सीक्वल नहीं बना. वह स्थापित रहेगा. सिद्धार्थ की यही बात काश, टेलीविजन के मेकर्स को भी समझ आये और वे कुछ नये प्रयोग करने की सोचें. न कि पुराने शोज को दोहराते रहे.

सोशल नेटवर्किंग पर मौत का जश्न


विगत 23 नवंबर को हिंदी सिनेमा जगत के लींजेडरी अभिनेता प्राण साहब की तबियत बेहद गंभीर थी. 92 वर्षीय प्राण साहब उधर जिंदगी और मौत से लड़ रहे थे और इधर खबरें आनी शुरू हो चुकी थी कि प्राण साहब नहीं रहे. कई लोगों ने धराधर अपने सोशल नेटवर्किंग साइट पर स्टेटस डालना शुरू कर दिया कि नहीं रहे शेर खान...प्राण साहब को श्रद्धांजलि और इन दिनों अंगरेजी का एक नया शब्द जो काफी प्रचलन में है. वह है आर आइ पी यानी रेस्ट इन पीस... मुझे मुंबई से बाहर के कई मित्रों व आम मित्रों के टेलीफोन आये. प्राण साहब नहीं रहे न...जब मैंने कहा कि अभी वह ठीक हैं. तो लोगों ने कहा अच्छा, ऐसा कुछ हो तो प्लीज बता दीजियेगा. आखिर स्टोरी तो बनानी पड़ेगी न. कुछ ऐसा ही अभिनेता दारा सिंह के निधन पर भी हुआ था. अभी दारा सिंह अस्पताल में थे और लोगों ने उनके मौत का प्रचार शुरू कर दिया था. कुछ दिनों पहले ही मैंने एक व्यक्ति के फेसबुक स्टेटस पर पढ़ा कि हाइ फ्रेंड्स मेरे  ब्रदर इन लॉ का निधन हो गया है. सो, मैं कुछ दिनों के लिए फेसबुक पर नहीं रहूंगा. दरअसल, यह सोशल नेटवर्किंग साइट्स भी दर्शाते हैं कि वर्तमान में हमारी मानसिकता क्या है. हमारे समाज की मानसिकता. आज हम किसी की मौत का मातम नहीं, जश्न मनाते हैं. हम कितने असंवेदनशील हो चुके हैं, यह हमारे स्टेटस से ही पता चल जाता है. जरा सोच कर देखें दुनिया के किसी भी व्यक्ति के लिए उसकी मौत से पहले ही उसका मातम मनाया जाना, क्या बीतती होगी उस व्यक्ति पर. ऐसे में प्राण साहब की बेटी ने मीडिया पर अपने कड़े शब्द से ऐतराज जताया तो क्या बुरा किया. उधर बेटी पिता की लंबी आयु की कामना कर रही है और दुनिया के लोग उनकी मौत का जश्न मना रहे हैं. सच्चाई यही है कि आज हम खुद को सबसे पहले और सबसे तेज बनने की होड़ में खुद को असामाजिक प्राणी बना चुके हैं.

जानवर-इंसान के बीच बोते रिश्ते



निर्देशक एंग ली की लाइफ आॅफ पाइ एक ऐसे लड़के की जिंदगी पर आधारित है. जो तूफान की वजह से अपने परिवार से बिछुड़ चुका है. लेकिन वह एक लाइफ बोट और अपनी उम्मीदों व कोशिशों के कारण जिंदा है. साथ ही उस विरान जिंदगी में उसका एक साथी है. टाइगर. जो कि उसी तरह खुद को बचाने के प्रयत् न में जुटा रहता है. पाइ जो इस फिल्म का मुख्य किरदार है. फिल्म में उसके साथ ही साथ उस टाइगर को भी मुख्य केंद्र में रख कर फिल्म की कहानी बुनी गयी है. एक इंसान के एक जानवर से डर फिर उससे प्रेम और फिर अलगाव पर विलाप करने की यह कहानी दिल को छूती है. कुछ इसी तरह निर्देशक एस एस राजोबली की फिल्म मक्खी में भी मक्खी मुख्य किरदार में है. एस एस राजोबली ने फिल्म में अपनी परिकल्पना को उड़ान देकर इतनी खूबसूरती से मक्खी को एक नायक के रूप में प्रस्तुत किया है. दरअसल, हकीकत यह है कि यह सारी फिल्में कोई एनिमेटेड या बच्चों की फिल्में नहीं हैं. लेकिन इसके बावजूद निर्देशक ऐसे जीव जन्तुओं के साथ भी ह्मुन स्टोरी दिखा रहे हैं.  जो लाजवाब है. किसी दौर में फिल्मों में जब जानवरों का प्रयोग होता था. तो वे केवल अपने नायक या नायिका के लिए सिर हिलाने वाले जानवर या नौकर की तरह ही दिखाये जाते थे. राजेश खन्ना की हाथी मेरे साथी, तेरी मेहरबानियां का जैकी श्राफ का कुत्ते से प्यार हो. उन फिल्मों में जानवरों की उपस्थिति मूक होती थी. लेकिन अब निर्देशकों ने अपनी परिकल्पना को इतनी ऊंचाई और नवीनता प्रदान कर दी है कि लोग मक्खी जैसी फिल्में भी सोच सकते हैं. यह दर्शाता है कि अब इस तरह की फिल्में केवल डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का विषय नहीं है. फीचर फिल्मों में भी ऐसे विषयों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया जाये तो भाषा कोई भी हो. हर वर्ग के दर्शक को यह फिल्म प्रभावित करती है.

जज्बाती कहानियां छूती हैं मेरे दिल को : आमिर खान




दर्शकों को आमिर का दीदार साल में एक बार ही होता है. लेकिन उनके काम का असर लंबे समय तक बरकरार रहता है. शायद यही वजह है कि आमिर की भी पूरी कोशिश रहती है कि वे जब भी परदे पर आयें. नये अवतार में आयें. नया विषय लेकर आयें. इस बार भी वे फिल्म तलाश से दर्शकों से रूबरू होने जा रहे हैं. तलाश आमिर की पहली सस्पेंस थ्रीलर होगी.

 आमिर, बॉलीवुड में आप जल्द ही अपने करियर के 25 साल पूरे  करने वाले   हैं. फिर सस्पेंस थ्रीलर की फिल्म जाकर अब क्यों की? क्या इससे पहले कोई स्क्रिप्ट पसंद नहीं आयी थी. या कोई और खास वजह रही?
हां, यह सच है कि मैं जल्द ही इंडस्ट्री में अपने 25 साल का सफर पूरा करनेवाला हूं. और इन 25 सालों में. शुरुआती दौर को छोड़ दूं तो मेरी हर बार यही कोशिश रही है कि मैं दर्शकों को कुछ नया जरूर दूं. आप मेरी शुरू से लेकर अब तक की सारी फिल्मों को देख लें. आपको हर फिल्म में मैं अलग नजर आऊंगा. कोई किसी से मैच नहीं करता. जबकि बॉलीवुड में तो अब भी आप बाकी कलाकारों को देख लें. तो उन्होंने सारे काम एक ही जॉनर के किये हैं. लेकिन मैंने हमेशा नया करने की सोची. न सिर्फ  मैंने अपने फिल्म की कहानियों को अलग तरह से दर्शाई है. बल्कि मैंने अपने लुक में भी कभी एकरसता नहीं लायी. यार, मैं तो यह बात बिल्कुल मानता हूं कि एक्टर हूं तो काम करूं न कुछ अलग अलग़ ,मुझसे एक जैसा काम हो ही नहीं सकता. रीमा ने जब मुझे यह कहानी सुनायी. तो मैं इसमें दिल से इनवॉल्व हो गया था. मुझे फिल्म में वह दिल नजर आ रहा था. और मैं स्क्रिप्ट का दिल ही देखता हूं.  मुझे तलाश के किरदार इंटरेस्टिंग लगे. रीमा और जोया ने जिस तरह डेवलपेंट किया है. वह प्लॉट अच्छा है. अलग तरह का सस्पेंस है. सस्पेंस को जिस तरह से डेवलप किया है. जितने लेयर्स हैं. वह फिल्म की कहानी को कहीं और ले जाते हैं. आमतौर पर सस्पेंस फिल्मों में बहुत ज्यादा जज्बात नहीं होता. इस फिल्म में वह जज्बात भी है. इमोशन भी है और सस्पेंस भी है. जब रीमा मुझे कहानी सुना रही थी. नैरेट कर रही थी. मैं इन्वॉल्व हो गया था उसमें.  तो. मुझे यह सस्पेंस इंगेजिंग काइंड आॅफ जर्नी लगी. यूं तो सस्पेंस की कई कहानियां आयी हैं. लेकिन वे सस्पेंस थ्रीलर होकर रह जाती है. तलाश में कुछ अलग बात होगी. जो आप देखेंगे तो खुद समझ जायेंगे.

फिल्म में आपके किरदार के बारे में थोड़ा बताएंगे?
देखिए, यह फिल्म चूंकि सस्पेंस थ्रीलर है. तो किरदार के बारे में तो बहुत नहीं बता सकता. लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हर हर वक्त अपने किसी अपने को खोने के डर से ग्रसित रहते हैं या हर किसी ने जिंदगी में किसी न किसी अपने को खोया है. यह डर हमेशा बना रहता है. लेकिन उस डर के साथ स्थिति के साथ समझौता करके आगे बढ़ना. लेकिन दिल में कहीं बुरी तरह अकेलापन महसूस करना. यह फिल्म की कहानी का अहम पहलू है.  यही हर्ट आॅफ द स्टोरी है. फिल्म में ऐसा नहीं है कि कोई मार धाड़ हो रहा है. और अचानक पता चलता है. अच्छा तो हम जैसा सोच रहे थे. वैसा नहीं है. मुझे इस फिल्म में कई लेयर्स नजर आ रहे हैं और उम्मीद करता हूं कि दर्शक उन्हें पसंद करेंगे.

अपनो को खोने का डर क्या आपको कभी ऐसा डर लगता है ? आप क्या कभी व्यक्तिगत  एहसास से गुजरे हैं.
जी हां, मैं गुजरा हूं.  और मुझे लगता है कि हर कोई गुजरा है.  मैं तो खुद ही बहुत फिक्रमंद रहता हूं. हर वक्त मुझे मेरे परिवार की फिक्र लगी रहती है. जब मैं फ्लाइट से उतरता हूं तो अचानक किरन का मेसेज आता है कि फोन करो, तो मैं बहुत डर जाता हूं कि सबकुछ ठीक ठाक तो है न. कभी मैं दब शूटिंग कर रहा होता हूं तो मेरे परिवार को पता है कि मुझे डिस्टर्बएंस पसंद नहीं. लेकिन उनका मेसेज आता है कि फोन करो. तो मैं डर जाता हंू कि खुदा न खास्ते कहीं कुछ बुरा तो नहीं हुआ है. मैं डरता हूं  इन चीजों से. तो इस किरदार में भी मुझे ऐसा लगा कि मेरा जो किरदार है वह परिवार से बेहद प्यार करता है. लेकिन उसे जब किसी अपने को खोना पड़ता है तो उसके जिंदगी में क्या मोड़ आते हैं. पड़ाव आते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है. और मुझे लगता है कि हर कोई इस कहानी से कनेक्ट कर पायेगा. चूंकि हर किसी की जिंदगी में ऐसे पल आते ही हैं. जोया ने तो खुद यह अपने एक पर्सनल एक्सपीरियंस पर चार लाइन की कहानी लिखी थी. तो मुझे लगता है कि एक कनेक् शन होगा फिल्म से लोगों का.

पिछले लगभग 10-12 सालों से लगातार आप जब भी कुछ लेकर आते हैं. फिर चाहे वह फिल्म हो या फिर सत्यमेव जयते जैसे शोज. लोगों को उम्मीद हो जाती है कि किसी मेसेज के साथ आ रही है फिल्म. तलाश के साथ भी ऐसा कुछ होगा क्या?
 (हंसते हुए ) देखिए, इस बारे में तो मैं बस इतना ही कहना चाहंूगा कि ऐसा नहीं है कि मेरा चुनाव  ही बेहद निराला होता है. डेली बेली भी मैंने ही चुनी थी. लेकिन उसमें कोई मेसेज नहीं था. बल्कि वह तो बिल्कुल ही अलग फिल्म थी. गजनी भी एंटरटेनर फिल्म थी. बाकी कई फिल्में मैंने भी की है. जिसमें कोई सलाह या कोई संदेश नहीं होता. हां, लेकिन आप यह जरूर कह सकती हैं कि बाकी कलाकारों की अपेक्षा मैंने जितनी फिल्मों में काम किया है. उनमें से अधिकतर में मैंने उद्देश्यपूर्ण काम किया है. फिर चाहे वह रंग दे बसंती हों. लगान हो. पीपली लाइव हो.  तो लोगों ने मान लिया है कि मैं मेसेज वाली फिल्में ही करता हूं. लेकिन मेरा मानना है कि एक्टर हूं तो हर तरह की फिल्म करूंगा. एंटरटेनर वाली भी. मस्ती वाली भी. मेसेज वाली थी. जहां तक तलाश की सवाल है. यह भी आपको इमोशनल करेगी. यह आम मेनस्ट्रीम फिल्मों की तरह नहीं है.  अलग है. और मैं चाहूंगा कि लोग कहानी का मजा लें. सस्पेंस का मजा लें.फिल्म का जो इमोशनल कोर है. वह लोगों के दिल को छुएगी.

 प्राय: किसी भी फिल्म की स्क्रिप्ट उसके कलाकार को चुनती है तो इस फिल्म में आपने स्क्रिप्ट को चुना या स्क्रिप्ट ने आपको. 
 मेरा मानना है कि कोई भी स्क्रिप्ट जिस हिसाब से लिखी जाती है. एक लेखक की, निर्देशक की सोच और विजन और साथ साथ प्रोडयूसर की डिमांड होती है कि उन्हें किस एक्टर के पास जाना है. लिखते वक्त ही उन्हें आइडिया मिल जाता  है कि आप किस एक्टर के पास आप जायें. तो मेरा मानना है कि स्क्रिप्ट ही एक्टर को चुनता है.जहां तक इस फिल्म का सवाल है. मैंने पहले भी कहा कि मुझे स्क्रिप्ट पसंद आयी थी. मैं किसी भी फिल्म की स्क्रिप्ट काफी केयरफुली चुनता हूं तो इस फिल्म ने तो मेरा दिल जीत लिया था. तो मैंने हां कहीं. लगान के वक्त भी मुझे स्क्रिप्ट पसंद आयी थी. लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया था शुरुआत में. सरफरोश के लिए फौरन हां कह दी थी मैंने.

लेकिन हमने सुना कि रीमा से आपके काफी मतभेद रहे. रीमा ही क्यों. प्राय: आपके सारे निर्देशकों के साथ आपकी मतभेद की बातें आती हैं. आरोप लगते हैं कि आप निर्देशकों के निर्देशन में काफी दखल देते हैं.
ये सारी बातों को मैं डिनाये करता हूं.  रीमा के साथ कोई अनबन नहीं हुई है. देखिए एक तो मैं किसी भी फिल्म को हां नहीं कहता. फिर जब मैं नैरेशन सुनने के बाद ही उससे संतुष्ट हो जाता हूं. तो फिर मेरे दखल की बात ही कहां से होती है. मैं संतुष्ट होता हूं तो अपनी हामी भरता हूं न. मैं तो नैरेशन सुनने के बाद ही अपनी पूरी बात कह दी होती है. तो फिर मैं क्यों चेंज करूंगा. दूसरी बात यह भी है कि आप बाकी कलाकारों के काम देख लें. कैरेक्टर एक से लगेंगे आपको. मेरी फिल्म में ऐसा नहीं है. अगर मैं अपनी हर फिल्म में अपने ही इनपुट्स देता तो सारी एक जैसी नहीं होती. मैं तो डायरेक्टर विजन को फॉलो करता हूं. हर डायरेक्टर अपनी जान देता है फिल्म में. तो निश्चित तौर पर मैं उनकी सोच को परदे पर दर्शाता हूं. जहां तक रीमा की बात है तो वह लेखक भी हैं और मुझे लगता है कि इसकी वजह से वे पेपर पर ही फिल्म खड़ी कर लेती हैं. उन्हें पता है कि उन्हें क्या चाहिए. कब चाहिए. इन 20 सालों में मैं भी लगातार काम कर रहा हूं. लेकिन रीमा ने इस फिल्म के दौरान जिस तरह से मुझे कुछ सीन सुनाये. उनके लेयर्स बताये.  मैं हैरत में पड़ जाता था. नयी चीज लेकर आती थीं वह हर बार. मुझे भी ताज्जुब होा था कि काफी बारीकी से काम करती है. मुझे लगता है कि रीमा जो बनाने चली थी. फिल्म उसके काफी करीब पहुंच पायी है. मुझे उसके साथ काम करके बहुत मजा आया. तो फिर मुझे संदेह क्यों होगा. तलाश की शूटिंग आराम से चल रही है तो लोग लिखेंगे नहीं इसके बारे में . तो लोग बात बनाते हैं कि कंनवर्शेशन इंटरेस्टिंग करने के लिए.
 लेकिन आपकी  फिल्मों को  आने में काफी वक्त लग जाता है. इतना वक्त क्यों लेते  हैं आप?
मैं वक्त लगाता हूं तो आप सभी ऐसा न सोच लें कि हम रजाई ओढ़ कर घर पर सो जाते हैं. दरअसल, मैं हड़बड़ी में काम बर्बाद नहीं कर सकता. मैं खुद जी लगाकर काम करता हूं और मेरे साथ जितने निर्देशक काम करते हैं फिर चाहे वह राजू हो, आशु हों, फरहान हो. सभी मेरी तरह ही अपने काम को परफेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं. फिल्म का मतलब हमारे लिए सिर्फ करोड़ों की कमाई नहीं है. शिद्दत से बनाते हैं तो लोगों को पसंद भी आती है. मैंं यह नहीं चाहता कि हड़बड़ी में कुछ बना दूं और पता चला कि रिलीज के बाद खुद ही लगे कि अरे कुछ कमी रह गयी. बस यही वजह है.
तलाश कई एक्टरों को आॅफर हुई थी?
हां, यह सच है. हर फिल्म कई कलाकारों को आॅफर तो होती ही है. लेकिन बाकियों को पसंद नहीं आयी. वैसे भी मैं जो फिल्में करता हूं वे बाकियों को ुपसंद नहीं ही आती हैं. लोग मुझे भी सलाह देते हैं कि मैं वह न करूं. लेकिन मैं तो हमेशा अलग ही करता हूं.सो, मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे फिल्में कितने लोगों को आॅफर हुईं. मेरे हां कहने के बाद वह मेरी फिल्म हो जाती है और मैं शिद्दत से उस में जी लगा कर काम करता हूं.
हमने यह भी सुना कि आप पर तलाश का किरदार इतना हावी हो गया था कि आप वास्तविक जीवन में काफी संदिग्ध हो गये हैं. यह सच है या सिर्फ मार्केटिंग के लिए अफवाह 
(हंसते हुए) अच्छा?? ऐसी भी खबरें आ रही हैं. वैसे आपने अच्छा बताया कि मार्केटिंग के लिए ऐसी भी बातें इस्तेमाल की जा सकती हैं. हाहाहा, नहीं नहीं. ऐसा नहीं है. किरदारों को वास्तविक जीवन पर हावी नहीं होने देता मैं. वरना, आज भी लगान का भुवन ही रह जाता. वह मेरा पसंदीदा किरदार था और सबसे अधिक मुझे उसी फिल्म में वक्त लगा था.
सत्यमेव जयते का सीक्वल भी आयेगा?
हां, अगले साल तक़ . शो को कामयाबी मिली है तो मेरा भी हौसला बढ़ा है.

20121122

ऑटो मीटर : क्या खूब बदले तुमने भी अपने तेवर



ऑटो मीटर 
क्या खूब  बदले तुमने भी अपने तेवर 
न चाहते हुए भी अकसर तुम्हारी बक बक सुना करती थी,

कलिना से अँधेरी तक सिग्नल पर 
जब तुम फंस जाते थे 
टप टप पसीने बहते थे
मैं भी तो थक के चूर हुआ करती थी 

तुमने ब्रेकर्स पे मुझे कितने ब्रेक दिये
मेरे क्रोकरी  के  कितने बर्तन क्रैक  किये 

"ओवर नाईट" काम मैं करती लेकिन 
"नाईट चार्ज" कमाते तुम थे 

तुमने कई बार " Don't Touch Me "कहकर धमकाया 
फिर भी हमें कभी गुस्सा न  आया।

मेरी जेब ( ऑटो का किराया देकर ) हो रही है खाली 
और तुम खरीद रहे हो नवी मुंबई में फ़्लैट 2 रूम किचन वाली 

लगातार तुम करते रहे मनमानी 
हमने फिर भी तुम्हारी हर जिद्द मानी 

लेकिन हर हठ( जिद्द )  की भी होती है हद 
मेरे दिल में हाँ मेरे दिल में घट चुका  है  तुम्हारा कद 


जाओ अब सच में नहीं आता है तुम पर प्यार 
तुम्हें देख कर आता है रेड बुखार 


अगर तेरा है ये इमोशनल अत्याचार 
तो जाओ मैं भी करुँगी अबसे प्रोफेशनल रूप इखितियार।