20151216

सिया के राम व शांता


स्टार प्लस के धारावाहिक सिया के राम में फिलवक्त राम की बहन शांता की कहानी विस्तार से दिखाई जा रही है. निखिल सिन्हा इस लिहाज से बधाई के पात्र हैं, कि उन्होंने रामायण के अनछुए पहलुओं को दर्शकों के सामने रखने की ंिहम्मत की है.चूंकि फिलवक्त जो दौर चल रहा. हर मुद्दे को लेकर विवाद हो रहे. मुमकिन यह भी है कि इस विषय पर भी काफी विवाद हो सकते हैं. कई बुद्धिजीवी अपने तर्क रख सकते. चूंकि शो में कहानी में आगे दिखाया जा रहा है कि किस तरह दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यत् न किये. यह भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है कि दशरथ जैसे ज्ञानी भी इस तरह की बातों पर सोचते थे. उन्हें भी पुत्र रत् न चाहिए था. सिया के राम दरअसल, पुरुष अंहकार की मृथ्याओं को पूरी तरह से धाराशायी कर रहा है. एक दृश्य में सीता गौतम ऋषि से पूछती है कि ज्ञान का क्या लाभ. गौतम ऋषि कहते हैं कि ज्ञान होने से व्यक्ति अपने गुस्से और अहंकार पर नियंत्रण कर लेता है. तो सीता के सवाल होते हैं कि तो फिर आपने अपनी पत् नी अहिल्या को श्राप क्यों दिया. वर्षों से चली आ रही मृथ्या और पुरुषों को परम पूजनीय समझने वाले समाज के लिए यह सटीक जवाब है. पहली बार किसी पौराणिक कथा पर आधारित धारावाहिक दरअसल, धार्मिक नजर नहीं आ रहा. उसके किरदार पूजनीय नहीं, बल्कि तर्कसंगत लगते हैं. किसी दौर में कैकयी, सुर्पनखा जैसे किरदारों को खलनायिका समझने वाले रामायण में दशरथ और गौतम ऋषि के जीवन के भी क्या ग्रे शेड रहे हैं. यह धारावाहिक उसे भलिभांति दर्शकों के सामने प्रस्तुत कर रहा है. वह पुरुष को परमात्मा बना कर पेश नहीं कर रहा. शांता की कहानी अब से पहले किसी ने न सुनी न ही कही. जबकि शांता के पहलुओं पर भी नजर डालना आवश्यक था. इस लिहाज से वर्तमान दौर के महत्वपूर्ण धारावाहिकों में से एक है यह शो.

निर्देशक व दर्शक

इम्तियाज अली की यह खूबी है कि वह फिल्मों के प्रदर्शन के बाद भी आम लोगोंं से खूब मिलते हैं और उनसे अपनी फिल्म के बारे में राय लेते हैं. यह सिलसिला पिछले कई  सालों से चला आ रहा है. अनुराग कश्यप व अन्य निर्देशकों ने भी यह संस्कृति शुरू की थी.लेकिन धीरे धीरे वे इससे कट रहे हैं. लेकिन इम्तियाज ने अब भी यह सिलसिला जारी रखा है. उनकी हाल ही में प्रदर्शित फिल्म तमाशा को लेकर भी उन्होंने मुलाकात की. दर्शकों के मन में कई सवाल थे और इम्तियाज ने बारी बारी से सारे सवालों के जवाब भी दिये. यह फिल्म लड़कियों को बेहद पसंद आ रही है. दरअसल, यह सिलसिला बादस्तूर जारी रहना इसलिए जरूरी है क्योंकि निर्देशक और दर्शक का रिश्ता इससे मजबूत होता है. दर्शक भी इस बात को समझते हैं कि निर्देशक को उनकी फिक्र है. और उनकी राय की परवाह है. फिल्म लूटेरा की रिलीज के बाद विक्रमादित्य मोटवाणे ने भी मेल के माध्यम से दर्शकों के सारे सवालों के जवाब दिये थे. चूंकि इम्तियाज, विक्रमादित्य उन निर्देशकों में से एक हैं, जिनकी फिल्मों में कई परत होते हैं. उनकी फिल्म से हर दर्शक अलग अलग नजरिया बनाता है. इनकी फिल्मों में कई सवालों के जवाब फिल्म में स्पष्ट नहीं होेते. लेकिन चूंकि इनके किरदार जीवंत होते हैं, दर्शक उन्हें साथ लेकर निकलते हैं थियेटर से. सो, उनके मन ेमें कई तरह की जिज्ञासाएं होती हैं और वे उनके जवाब तलाशना चाहते हैं. इम्तियाज की फिल्म तमाशा में ही उन्होंने अपने पोस्टर पर लिखा है कि व्हाय द सेम स्टोरी... इस वाक्य को कई लोगों ने कई नजरियों से देखा है. एक नजरिया फिल्म का यह भी था कि इम्तियाज सवाल पूछ नहीं रहे, बल्कि सवाल का जवाब दे रहे हैं कि हमेशा कहानियों के एक होने की वजह क्या है. तो दूसरी तरफ किसी दर्शक के मन में सवाल बन कर भी खड़े हों. सो, यह जरूरी है कि निर्देशक उनकी प्यास बुझाए.

angry indian godess

ऐंग्री इंडियन गॉडेस महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण फिल्म है। फिल्म की कहानी 6 महिलाओं की जिंदगी से शुरू होती है जिनके पास धन की कमी नहीं है। लेकिन सभी जिंदगी से खुश नहीं है। इसी दौरान एक दोस्त की शादी में सभी एकत्रित होते हैं। और उनकी जिंदगी के गम दर्शकों के सामने एक एक कर जाहिर होने लगते हैं।एक लक्ष्मी का किरदार भी है। लक्ष्मी फ्रीडा की देख रेख करती है। उसके भाई की मौत उसकी आंखों के सामने होती है और वह तय करती है कि वह भाई के खूनी से बदला लेकर रहेगी। इस फिल्म जिस तरह से महिलाओं की जिंदगी के अहम पहलुओं को सामने प्रस्तुत करती है।वह दिल को छूती है। एक महिला कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल क्यों न कर ले। इसके बावजूद उसके किस तरह तंज़ सहने पड़ते हैं। क्यों लोग उन्हें भोग की नजर से ही देखते हैं। और वह किस हद तक उन्हें चोट पहुंचाता है।वह किस तरह टूटती हैं और खुद को निहत्था महसूस करती हैं।इस फिल्म में इसे बखूबी और बारीकी से दर्शाया गया है। गोवा में आये दिन सागर किनारे होने वाली बलात्कार के बाद हत्याओं के मुद्दे पर भी प्रकाश डालती है। और उसपर पुलिस प्रशासन का महिलाओं के प्रति गलत और बेबुनियाद कटाक्ष की दास्तां को भी दर्शाता है।इन दिनों किसी भी बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए भी महिलाओं के कपड़े और उनके देर रात तक घूमने फिरने को लेकर साधू संतों की बयानबाजी होती है। इस मसले को भी गहराई से फिल्म में दर्शाया गया है। और सारी परेशानियों से जूझते हुए , किस तरह महिला हथियार उठाने पर विवश होती है। यह भी इस फिल्म का एहम हिस्सा है। इस लिहाज से फिल्म में ऐसी कई घटनाएं हैं जो आपको आपके आस पास की लगती है। समलैंगिक के मुद्दे लेकर भी लोगों की क्या दोहरी राय है और किस तरह लोगों के मन में उन्हें लेकर दुर्व्यवहार है।इस मुद्दे पर भी निर्देशक अपनी पैनी नजर रखती हैं। एक बड़ी कामयाबी इस फिल्म की यह है कि सभी कलाकारों के चेहरे मुख्यधारा में दिखने वाले चेहरे नहीं हैं। संध्या मृदुल स्वाभिमान जो उनका पहला शो था उस दौर से लेकर अबतक खुद को बेहतरीन तरीके से साबित कर रही हैं और उन्हें अपनी सारी कलाकार का सहयोग भी बखूबी मिला है। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस से अधिक महिलाओं के दिलों में दस्तक देना जरूरी है। ऐसी फिल्मों का निर्माण होते रहना आवश्यक है।

जावेद साहब की महत्वपूर्ण बातें


हाल ही में एक समारोह के दौरान जावेद अख्तर ने असहिष्णुता के विषय पर कई महत्वपूर्ण बातें रखी हैं. उन्होंने कहा है कि हम भी तालिबानी बन रहे हैं. हम हर बात पर प्रतिक्रिया दे रहे. लोग लड़ने को आतुर हो जा रहे. उन्होंने बेहद सटीक उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी कि फिल्म शोले के एक दृश्य में बसंती और वीरू के बीच के दृश्य मंदिर में फिल्माये गये हैं. लेकिन जावेद यह स्वीकारते हैं कि आज के दौर में मंदिर वाले सीन फिल्माना मुश्किल है. चूंकि उस दौर में इनटॉलरेंस जैसे मुद्दे नहीं थे. फिल्म संयोग में फिल्म के गीत में कृष्ण सुदामा की दोस्ती का पूरा विवरण है. एक फिल्म में दिलीप कुमार जो कि हकीकत में युसूफ खान है. वह मंदिर में भगवान की मूर्ति उठा कर बोलता है कि नहीं मानता मैं ऐसे भगवान को और उसे नाले में फेंक देता है. उस दौर में वह सिनेमा था. आज वह असहिष्णुता हो चुका है. आज के दौर में लोग राजू हिरानी से पूछते हैं कि उन्हें क्या हक है कि वह पीके में हिंदू भगवान की फिरकी ले रहे हैं. लेकिन मुसलिम के साथ ऐेसा कर पाते क्या. दरअसल, जावेद अख्तर की कई बातें पिछले लंबे समय से चली आ रही बहस पर कही गयी ठोस बातें ंहैं और महत्वपूर्ण भी है. हाल ही में मुंबई के एक सिनेमाघर से राष्टÑीय गान के दौरान खड़े न होने की वजह से एक मुसलिम परिवार को थियेटर से खदेड़ा गया. क्या यह उचित है. जावेद साहब ने हकीकत बयां की है कि हिंदू धर्म में खुले दिल से सबकुछ स्वीकार करने देने की अनुमति है. यह इसकी खूबसूरती है. लेकिन हम इसे ही खोते जा रहे हैं और यही हकीकत भी है. हम अपनी संस्कृति सभ्यता को भूल कर केवल जबरदस्ती करने में यकीन कर रहे हैं और बिल्कुल अनुचित है. यह जानना समझना बेहद जरूरी है कि आप किसी से न जबरदस्ती सम्मान हासिल कर सकते न उन्हें बाध्य करें. गंभीरता से इस बारे में सोचना बहुत जरूरी है.

मैं खुद से कभी खुश नहीं होना चाहती : कृति


कृति सनोन की दूसरी फिल्म है दिलवाले. और उन्हें ही दूसरी पारी में एक बड़ी पारी खेलने का मौका मिला है. इस बात को वह खुद भी स्वीकारती हैं. उनका मानना है कि वे अभी किसी भी हड़बड़ी में नहीं हैं. वे सोच समझ कर फिल्में कर रही हैं.
 दिलवाले का संयोग कैसे बना?
मुझे रोहित शेट्ठी सर के आॅफिस में बुलाया गया था. हमारी छोटी बातचीत हुई और फिर उन्होंने दूसरे दिन ही यह बात कह दी कि मैं यह फिल्म कर रही हूं. मेरे लिए यह सोच पाना काफी इमेजनरी ही था कि मुझे इस फिल्म में काम करने का मौका मिल रहा है और मैं शाहरुख सर के साथ काम कर रही हूं. लेकिन सबकुछ बहुत जल्दी जल्दी हुआ.
शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
इससे पहले मैं शाहरुख सर से कभी मिली नहीं थी तो मुझे यह भी पता नहीं था कि वे कैसे होंगे. मैं लेकिन जब उनसे पहली बार मिली मुझे लगा कि नहीं कि मैं उनसे पहली बार मिली हूं. मैं उनकी फिल्में देखते हुए बड़ी हुई हूं और वे मेरे फेवरिट एक्टर में से एक रहे हैं. मैंने जैसे जैसे उन्हें करीब से जाना महसूस किया कि वे जो रियलिटी में हैं. वह बहुत आम इंसान हैं. उन पर स्टारडम हावी नहीं है, उन्होंने कभी यह जताने की कोशिश नहीं की है कि वह सुपरस्टार हैं और हमें उनसे कम होकर रहना है. बात करते हैं तो लगता है कि उनके मन का दिल्ली वाला लड़का बाहर आ गया है. मैं खुद भी दिल्ली से हूं इसलिए काफी कनेक्ट कर पाती हूं. कंफर्टेबल महसूस कराते हैं. पहले पांच सेकेंड में ही आपको महसूस करा देंगे कि आप उनके साथ फ्रेंडली हो सकते हैं. वह काफी चार्मिंग हैं. लोगों को इज्जत देते हैं. लड़कियों की इज्जत करते हैं. अपने स्टाफ की इज्जत करते हैं. फिर चाहे वह उनके स्पॉट ब्वॉय ही क्यों न हो. वह जितना प्यार देते हैं. इसलिए उन्हें प्यार मिलता है.
काजोल के साथ कैसा रहा अनुभव?
मैं शाहरुख सर से तो काफी फ्रेंडली हो गयी थीं. लेकिन उस वक्त तक काजोल मैम के सीन शुरू नहीं हुए थे. तो मैं उनके साथ काम करने को लेकर ज्यादा नर्वस थी. वह जब पहली बार मिली थीं. तो एकदम से हमारी बातें शुरू नहीं हुई थीं. क्योंकि काजोल मैम खुलने में वक्त लेती हैं. लेकिन धीरे धीरे जब साथ काम करने लगे तो हम में अच्छी जमने लगी. काजोल मैम काफी समझाती थी कि इस डॉयलॉग को ऐसे बोलो तो अच्छा रहेगा. तो काफी सीखती थी मैं. काजोल मैम की खास बात यह है कि वह जितनी भी मस्ती करें. कैमरा आॅन हो जाने पर वह कुछ और ही हो जाती हैं. उनके साथ मेरा पहला दृश्य काफी इमोशनल सीन था. तो काफी टफ था पहला दिन. लेकिन काफी अच्छे से वह सीन आया. तो हमारी केमेस्ट्री की शुरुआत वही से हुई.
कृति आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं. फिर यह क्षेत्र चुना, तो कहीं से महसूस करती हैं कि इस प्रोफेशन में वह पढ़ाई काम आयी है?
इंजीनियरिंग की पढ़ाई में काफी याद करना पड़ता था क्योंकि एग्जाम बहुत ज्यादा होते थे. तो एक चीज अच्छी हुई  है कि मुझे अब काफी याद रहने लगी हैं चीजें. मेमोरी शार्प हो जाती है तो आप अपने सीन भी अच्छे से और जल्दी याद कर लेते हो.
आपने मॉडलिंग भी की थी?
मैंने मॉडलिंग काफी की थी. मैंने  टीवी कमर्शियल काफी किये थे और मुझे करने में मजा भी बहुत आता था. रैंप करने में मुझे इतना मजा नहीं आता था. और मेरा कभी गोल भी नहीं था कि मुझे एक्टिंग ही करना है. हां, मगर मैंने यह जरूर महसूस किया कि मेरी बॉडी है हाइट है तो मुझे एकबार ट्राइ जरूर करना चाहिए. तो मैं एक्सपीरियंस के लिए आयी थी. मुझे उस वक्त ये बात समझ आयी कि मैं कैमरे के सामने कांसस नहीं हूं और उस वक्त ही मैंने इस बारे में सोचा कि अभिनय कर सकती हूं.
आपकी फैन फॉलोइंग धीरे धीरे बढ़ रही है? तो किस तरह से प्लान कर रही हैं अपनी करियर की?
मैं प्लानिंग में बहुत बुरी हूं इसलिए बहुत प्लानिंग से नहीं चल रही. लेकिन हां, मैं खुद को प्रूव जरूर करना चाहती हूं कि जो भी करूंगी मैं बेस्ट करूंगी और बेस्ट कर सकती हूं. मैं खुद से कभी खुश नहीं होना चाहती हूं. क्योंकि मुझे  लगता है कि आप जब अपने से बहुत खुश हो जाते हो तो आप मेहनत करना बंद कर देते हो. और मैं वह नहीं करना चाहती. मुझे लगता है कि फायर होना जरूरी है.  वह हमेशा रहना चाहिए.
एक्टिंग को लेकर आपका थॉट प्रोसेस क्या है?
मुझे लगता है कि मैं मेथेड एक्ट्रेस नहीं हूं. मैं ज्यादा स्पॉनटेनियस हूं और स्पोनटेनियस में ज्यादा अच्छा कर पाती हूं. मैं ज्यादा इंटेंस हूं. मैं दूसरे एक्टर की एनर्जी से भी काफी अफेक्ट होती हूं. तो मेरी कोशिश होती है कि एक सीन में जो कैरेक्टर है वह कैसे करेगा. हर कैरेक्टर का रियेक् शन अलग होता है. तो वह सबकुछ सोचती हूं. मैं कैरेक्टर का रिलेशन क्या है. उस पर सोचती हूं.
वरुण के साथ कैसा एक्सपीरियंस रहा?
मुझे टॉकेटिव लोग पसंद हैं. वरुण काफी टॉकेटिव हैं. वरुण की एनर्जी बहुत पोजिटिव है.और जिस एनर्जी के साथ सेट पर आता है वह आपको भी एनर्जी से भरपूर कर देगा. लेकिन उसके दिमाग में यह बात है कि वह अपने सीन को बेस्ट कैसे देगा. वह काफी मेहनती है. वह अपनी कमियों को भी पोजिटिव वे में लेता है. उसकी फिल्में लगातार हिट हो रही हैं. लेकिन उसने दिमाग में स्टारडम को हावी नहीं किया है. यह बहुत अच्छी बात है.
आपकी अगली फिल्म कौन सी है.
दिनेश विजयन की फिल्म है सुशांत सिंह राजपूत के साथ कर रही हूं. मुझे जिस तरह की कहानी पसंद है. यह फिल्म भी उनमें से एक होगी. 

मेरे लिए दोस्ती का रिश्ता अहम है : फरहान


फरहान अख्तर फिल्म वजीर से पहली बार एक् शन करते नजर आयेंगे. वे फिल्म रॉक आॅन की शूटिंग में भी व्यस्त हैं. वजीर को वह अलग मिजाज की फिल्म मान रहे हैं.
फरहान, यूं तो आप कई विधाओं में माहिर रहे हैं. लेकिन बात जब अभिनय की आती है तो आप फिल्मों के चयन को लेकर काफी सजग हो जाते हंै. तो वजीर को हां कहने की क्या वजह रही?
दरअसल, मुझे लगता है कि बात जब निर्देशन की आती है तो मैं अधिक चूजी हो जाता हूं. मैं वैसी ही फिल्में निर्देशित करता हूं जिनके विषय मुझे एक्साइट करते हैं. वजीर को हां कहने की वजह यह थी कि फिल्म की स्क्रिप्ट को खूबसूरत तरीके से लिखा गया है. विधु दोस्त हैं. अभिजात ने बेहतरीन तरीके से कहानी लिखी है. इस फिल्म की खूबी यह है कि फिल्म के किरदार आपको आकर्षित करेंगे.इस किरदार के साथ मैं इसलिए जुड़ा कि लगा कि वह आम है. मेरे साथ भी ऐसा सिचुएशन हो सकता है और मैं जब इस सिचुएशन में रहूंगा तो किस तरह बर्ताव करता. यह सोचने पर मजबूर करती है कहानी.
आपकी फिल्मों में दोस्ती का एक खास एंगल जरूर होता है. वजीर में भी क्या वह एंगल है?जी हां, बिल्कुल है. दोस्ती का अहम हिस्सा है. इसमें दोस्ती एक एटीएस आॅफिसर और शतरंज मास्टर के बीच होती है और जैसा कि सभी जानते हैं कि मेरी फिल्म में दोस्ती महत्वपूर्ण होती है. विधु खुद कम दोस्त बनाते हैं. लेकिन दोस्ती निभाते हैं. तो इस फिल्म में भी वह एंगल है.
वास्तविक जिंदगी में आपके लिए दोस्ती क्या मायने रखती है?
मुझे लगता है कि  मैं इस मामले में लकी रहा हूं कि मेरे जितने भी दोस्त बने हैं इंडस्ट्री से भी. वे आज भी मेरे साथ हैं. मेरे लिए खास हैं. मैं उनके लिए खास हूं.फिर वह अभिषेक हो, ऋतिक हों, प्रीति जिंटा, उदय सभी मेरे क्लोज दोस्त हैं. मुझे याद है प्रीति मेरे घर आयी थीं. क्या कहना का स्क्रीन टेस्ट देने के लिए उस वक्त मैं दिल चाहता है लिख रहा था. और उस वक्त हमारी मुलाकात हुई थी. मैंने स्क्रीन टेस्ट देखा था और काफी पसंद आयी थी मुझे उनकी एक्टिंग़,. उस वक्त ही मैंने उन्हें दिमाग में रख कर कहानी लिखनी शुरू की थी.  और प्रीति ने मुझसे कहा कि मैं यह फिल्म करूंगी. तुम जब भी बोलोगे. फिर कहानी पूरी हुई और मैंने प्रीति को कॉल किया और वह हमारे साथ जुड़ी. आज भी प्रीति से मेरी दोस्ती वैसी ही है जैसे कई सालों पहले थी. शाहरुख मेरे बहुत खास दोस्तों में से एक हैं. शाहरुख से भी मेरी दोस्ती सिर्फ फिल्मों की वजह से नहीं है. मुझे लगता है कि जब भी कभी जरूरत होगी शाहरुख खड़े होंगे. सो, मैं लकी हूं कि मेरे पास अच्छे दोस्तों की लिस्ट है. और मुझे लगता है कि मेरे दोस्त मेरी इस क्वालिटी को पसंद करते हैं कि वे मुझ पर विश्वास कर सकते हैं और वे जानते हैं कि मैं उनका और वे मेरी इज्जत करते हैं. किसी भी रिश्ते में यही दो खास बातें होती हैं.
रईस का पोस्टर काफी रोचक नजर आ रहा है?
दरअसल, यह फिल्म 80 के दशक पर सेट है. और उस दौर में इस तरह का ही मिजाज होता था. लोगों का. तो वे सारी बातों को ध्यान में रख कर हमने फिल्म का पोस्टर जारी किया है. मुझे लगता है कि दर्शकों को भी फिल्म पसंद आनी चाहिए. लेकिन कोई दावा नहीं कर सकता अभी से.
हाल ही में आपने आइ कैन दू डैट का सफर टीवी पर तय किया. कैसा रहा अनुभव?
मुझे टीवी हमेशा इंस्पायर करता है. खासतौर से आइ कैन दू डैट बिल्कुल अलग शो रहा. इसमें दुनिया की कई नयी चीजें देखने को मिली. सीखने को मिली. यह शो देख कर कितनी प्रेरणा मिली है कि कोई इंसान जिसे बिल्कुल पता नहीं है उस विधा के बारे में. लेकिन वह किस तरह सीखता है.फिर उसको परफॉर्म करते हैं. आसान काम नहीं है. टीवी पर आकर करना बहुत कठिन है. मैं शॉक्ड था, लोगों के परफॉरमेंस को देख कर.
मर्द को लेकर किस तरह और काम किये जा रहे हैं?
और भी कई इनिशियेटिव लिये जा रहे हैं. हम दिसंबर तक एक ऐसा डियोडेरेंट लांच कर रहे हैं, जिसमें लड़कों को लड़कियों के रिस्पेक्ट की बात समझायेंगे. और उसकी कमाई से चैरिटी होगी और इस तरह के और भी कई इनिशियेटिव ले रहे हैं.
अमिताभ बच्चन से क्या क्या सीखने का मौका मिला?
लक्ष्य के वक्त भी अमितजी के साथ जुड़ा था. उस दौर से लेकर अबतक मैंने देखा है कि अमितजी की एक चीज नहीं बदली वह यह है कि वह आज भी अनुशासित हैं और उनमें सीखने की भूख अब भी जारी है. काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है. उनसे. मेरे पिताजी और उनके दौर की कई सारी कहानियां भी वे शेयर करते हैं. लेकिन मैं उन्हें यहां शेयर नहीं कर सकता.

खुश हूं अपने करियर से : अदिति शर्मा


अदिति शर्मा ने ज़ी सिने स्टार की खोज से अभिनय की दुनिया में दस्तक दी थी और एक बार फिर से वह ज़ी के ही चैनल एंड टीवी के शो गंगा में बड़ी गंगा का किरदार निभाने जा रही हैं। हाल ही में शो की शूटिंग वाराणसी के घाट पर हुई। 
अदिति आपने शुरुआत ज़ी से ही की थी। अब एक बार फिर से ज़ी से जुड़ने का मौका मिला है।इस संयोग को किस तरह देखती हैं आप?
मैं बेहद खुश हूं कि मुझे इस इस शो से ज़ी के माध्यम से ही जुड़ने का मौका मिला है।क्योंकि मैंने अपने करियर की शुरुआत इसी चैनल के साथ शुरू किया था। तब से लेकर अबतक में लगातार काम कर रही हूं और मुझे हर तरह के जॉनर में काम करने का मौका मिला है। सिने स्टार ही पहला जरिया बना. आज फिर से शो के। साथ जुड़ी हूं और वह भी इतने बेहतरीन शो से जुड़ने का मौका मिला है। तो मैं बहुत खुश हूं।
इस शो में गंगा के किरदार पहले से ही एक स्थापित किरदार है। छोटी गंगा ने दर्शकों का पूरी तरह दिल जीता है। तो ऐसे में एक चुनौती नजर आ रही?
जी हां चुनौती तो है ही। बच्चे ऐसे भी जो किरदार निभाते हैं। उनके किरदारों में इतनी सच्चाई और मासूमियत होती है कि वे दर्शकों के दिलों को छूते भी हैं।सो चुनौती है मेरे लिए। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि जिस तरह शो के निर्देशक ने इसे बनाया है और कहानी में नए नए एंगल दिखाए जाएंगे। उनके लिए मैं पूरी तरह से तैयार हूं।जिंदगी में एक पड़ाव आता ही है जब आगे की कहानी भी दिखाई जानी जरूरी है।सो बिल्कुल सही वक़्त पर एक नयी शुरुआत हो रही है।
इस किरदार में ढलने के लिए किस तरह की तैयारी की है आपने?
मेरी कोशिश होगी कि गंगा की जो अपनी मासूमियत है वह बरकरार रहे। ऐसा न हो कि दर्शक बोर हो जाएं तो मैं अपने एक्सप्रेशन को लेकर इन बातों का ख्याल रखूंगी। इसके अलावा कोशिश होगी कि स्वाभाविक नजर आऊं।
बनारस से गंगा का नत खास रहा है। आप अभी वाराणसी के घाट पर ही शूटिंग कर रही हैं।यह अनुभव कैसा है?
बनारस मैं पहले भी आती रही हूं। मेरे दादा दादी यही रहते थे और बचपन की कई यादें जुड़ी हैं।लेकिन घाट पर जाकर शूटिंग करने का एक्सपीरियंस बिल्कुल अलग है। यहां एक ही घाट पर कई चीजें होती रहती हैं। तो जिंदगी के कई पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिलता है। आप एक झटके में जिंदगी की कई चेहरे से आमना सामना करते हैं। एक तरफ आरती है तो दूसरी तरफ मसान है। आप जिंदगी की कई हकीकत से आमना सामना करते हैं।बनारस उस लिहाज से भी काफी खास है।
आपने जिस तरह शुरुआत की और आपको जिस तरह की लॉन्चिंग मिली थी आपको लगता है उस तरह से काम करने का मौका आपको नहीं मिला ?
नहीं मुझे किसी बात का दुख नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुझे अच्छे मौके नहीं मिले हैं। मैंने भी लगातार काम किया है। अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है।और फिर मैंने हमेशा किरदारों को एहमियत दी है।और उन किरदारों में भी दर्शकों ने मुझे याद रखा है। यही मेरे लिए खास बात है।
किसी टीवी शो में यह आपकी पहली शुरुआत है। कैसा लग रहा अनुभव?
काफी अलग अनुभव है। अब जब पहली बार डेली सोप में काम कर रही तो समझ आ रहा की किस तरह यहां फिल्मों से अधिक मेहनत है। हर दिन एपिसोड्स को पूरा करने और बैंक बनाने की कितनी जरूरत होती है। मेरे को स्टार विशाल जोकि शो में सागर की भूमिका में हैं। उनसे मैंने सीखा कि किस तरह भीड़ की बीच भी आपको काम करना होता है।किस तरह भीड़ को नियंत्रित करना होता है और किस तरह अगर फैन आपसे बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें भी अटेंशन देना होता है। फिल्मों का सेट अप अलग तरीके का होता है। वहां सारा काम प्रोडक्शन कन्ट्रोलर करते। आपको सिर्फ एक्ट करना होता है।लेकिन यहां चूंकि आप हर दिन लोगों से मिलते हो तो आपको आम आदमी से कनेक्ट होना पड़ता है। इसलिए आम लोगों को आप इग्नोर नहीं कर सकते। यह सारी बातें मैं विशाल से सीख रही हूं। अब धीरे धीरे इस दुनिया को भी समझने की कोशिश कर रही हूं
एक नयी चुनौती है सागर:विशाल
सागर का किरदार काफी चुनौती भरा हुआ है। चूंकि स्थापित किरदार हैं।मुझे खुशी है कि वीरा के बाद मैंने छोटा सा ब्रेक लिया और फिर से मुझे एक अच्छा सा किरदार निभाने का मौका मिल गया। सागर का बच्च्पन काफी शरारती रहा है। मेरी भी शरारतें जारी रहेंगी। हर बार नए लोगों के साथ काम करने का Pअनुभव नया होता है। अदिति का भी साथ मिला है। हमारी कोशिश होगी कि विधवाओं को लेकर जिस तरह की सोच है। उस सोच को नई दिशा देने में यह शो किस हद तक सहायक हो सकती यही मोटिव होगा ।साथ ही एक प्रेम कहानी भी दिखाने की कोशिश होगी। मुझे उम्मीद है कि जिस तरह बलदेव को दर्शकों का प्यार मिला है। आगे वह प्यार सागर को भी मिलेगा। सागर और गंगा के बीच भी किस तरह का प्यार संभव है। यह शो दर्शायेगा।