20151216

मैं खुद से कभी खुश नहीं होना चाहती : कृति


कृति सनोन की दूसरी फिल्म है दिलवाले. और उन्हें ही दूसरी पारी में एक बड़ी पारी खेलने का मौका मिला है. इस बात को वह खुद भी स्वीकारती हैं. उनका मानना है कि वे अभी किसी भी हड़बड़ी में नहीं हैं. वे सोच समझ कर फिल्में कर रही हैं.
 दिलवाले का संयोग कैसे बना?
मुझे रोहित शेट्ठी सर के आॅफिस में बुलाया गया था. हमारी छोटी बातचीत हुई और फिर उन्होंने दूसरे दिन ही यह बात कह दी कि मैं यह फिल्म कर रही हूं. मेरे लिए यह सोच पाना काफी इमेजनरी ही था कि मुझे इस फिल्म में काम करने का मौका मिल रहा है और मैं शाहरुख सर के साथ काम कर रही हूं. लेकिन सबकुछ बहुत जल्दी जल्दी हुआ.
शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
इससे पहले मैं शाहरुख सर से कभी मिली नहीं थी तो मुझे यह भी पता नहीं था कि वे कैसे होंगे. मैं लेकिन जब उनसे पहली बार मिली मुझे लगा कि नहीं कि मैं उनसे पहली बार मिली हूं. मैं उनकी फिल्में देखते हुए बड़ी हुई हूं और वे मेरे फेवरिट एक्टर में से एक रहे हैं. मैंने जैसे जैसे उन्हें करीब से जाना महसूस किया कि वे जो रियलिटी में हैं. वह बहुत आम इंसान हैं. उन पर स्टारडम हावी नहीं है, उन्होंने कभी यह जताने की कोशिश नहीं की है कि वह सुपरस्टार हैं और हमें उनसे कम होकर रहना है. बात करते हैं तो लगता है कि उनके मन का दिल्ली वाला लड़का बाहर आ गया है. मैं खुद भी दिल्ली से हूं इसलिए काफी कनेक्ट कर पाती हूं. कंफर्टेबल महसूस कराते हैं. पहले पांच सेकेंड में ही आपको महसूस करा देंगे कि आप उनके साथ फ्रेंडली हो सकते हैं. वह काफी चार्मिंग हैं. लोगों को इज्जत देते हैं. लड़कियों की इज्जत करते हैं. अपने स्टाफ की इज्जत करते हैं. फिर चाहे वह उनके स्पॉट ब्वॉय ही क्यों न हो. वह जितना प्यार देते हैं. इसलिए उन्हें प्यार मिलता है.
काजोल के साथ कैसा रहा अनुभव?
मैं शाहरुख सर से तो काफी फ्रेंडली हो गयी थीं. लेकिन उस वक्त तक काजोल मैम के सीन शुरू नहीं हुए थे. तो मैं उनके साथ काम करने को लेकर ज्यादा नर्वस थी. वह जब पहली बार मिली थीं. तो एकदम से हमारी बातें शुरू नहीं हुई थीं. क्योंकि काजोल मैम खुलने में वक्त लेती हैं. लेकिन धीरे धीरे जब साथ काम करने लगे तो हम में अच्छी जमने लगी. काजोल मैम काफी समझाती थी कि इस डॉयलॉग को ऐसे बोलो तो अच्छा रहेगा. तो काफी सीखती थी मैं. काजोल मैम की खास बात यह है कि वह जितनी भी मस्ती करें. कैमरा आॅन हो जाने पर वह कुछ और ही हो जाती हैं. उनके साथ मेरा पहला दृश्य काफी इमोशनल सीन था. तो काफी टफ था पहला दिन. लेकिन काफी अच्छे से वह सीन आया. तो हमारी केमेस्ट्री की शुरुआत वही से हुई.
कृति आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं. फिर यह क्षेत्र चुना, तो कहीं से महसूस करती हैं कि इस प्रोफेशन में वह पढ़ाई काम आयी है?
इंजीनियरिंग की पढ़ाई में काफी याद करना पड़ता था क्योंकि एग्जाम बहुत ज्यादा होते थे. तो एक चीज अच्छी हुई  है कि मुझे अब काफी याद रहने लगी हैं चीजें. मेमोरी शार्प हो जाती है तो आप अपने सीन भी अच्छे से और जल्दी याद कर लेते हो.
आपने मॉडलिंग भी की थी?
मैंने मॉडलिंग काफी की थी. मैंने  टीवी कमर्शियल काफी किये थे और मुझे करने में मजा भी बहुत आता था. रैंप करने में मुझे इतना मजा नहीं आता था. और मेरा कभी गोल भी नहीं था कि मुझे एक्टिंग ही करना है. हां, मगर मैंने यह जरूर महसूस किया कि मेरी बॉडी है हाइट है तो मुझे एकबार ट्राइ जरूर करना चाहिए. तो मैं एक्सपीरियंस के लिए आयी थी. मुझे उस वक्त ये बात समझ आयी कि मैं कैमरे के सामने कांसस नहीं हूं और उस वक्त ही मैंने इस बारे में सोचा कि अभिनय कर सकती हूं.
आपकी फैन फॉलोइंग धीरे धीरे बढ़ रही है? तो किस तरह से प्लान कर रही हैं अपनी करियर की?
मैं प्लानिंग में बहुत बुरी हूं इसलिए बहुत प्लानिंग से नहीं चल रही. लेकिन हां, मैं खुद को प्रूव जरूर करना चाहती हूं कि जो भी करूंगी मैं बेस्ट करूंगी और बेस्ट कर सकती हूं. मैं खुद से कभी खुश नहीं होना चाहती हूं. क्योंकि मुझे  लगता है कि आप जब अपने से बहुत खुश हो जाते हो तो आप मेहनत करना बंद कर देते हो. और मैं वह नहीं करना चाहती. मुझे लगता है कि फायर होना जरूरी है.  वह हमेशा रहना चाहिए.
एक्टिंग को लेकर आपका थॉट प्रोसेस क्या है?
मुझे लगता है कि मैं मेथेड एक्ट्रेस नहीं हूं. मैं ज्यादा स्पॉनटेनियस हूं और स्पोनटेनियस में ज्यादा अच्छा कर पाती हूं. मैं ज्यादा इंटेंस हूं. मैं दूसरे एक्टर की एनर्जी से भी काफी अफेक्ट होती हूं. तो मेरी कोशिश होती है कि एक सीन में जो कैरेक्टर है वह कैसे करेगा. हर कैरेक्टर का रियेक् शन अलग होता है. तो वह सबकुछ सोचती हूं. मैं कैरेक्टर का रिलेशन क्या है. उस पर सोचती हूं.
वरुण के साथ कैसा एक्सपीरियंस रहा?
मुझे टॉकेटिव लोग पसंद हैं. वरुण काफी टॉकेटिव हैं. वरुण की एनर्जी बहुत पोजिटिव है.और जिस एनर्जी के साथ सेट पर आता है वह आपको भी एनर्जी से भरपूर कर देगा. लेकिन उसके दिमाग में यह बात है कि वह अपने सीन को बेस्ट कैसे देगा. वह काफी मेहनती है. वह अपनी कमियों को भी पोजिटिव वे में लेता है. उसकी फिल्में लगातार हिट हो रही हैं. लेकिन उसने दिमाग में स्टारडम को हावी नहीं किया है. यह बहुत अच्छी बात है.
आपकी अगली फिल्म कौन सी है.
दिनेश विजयन की फिल्म है सुशांत सिंह राजपूत के साथ कर रही हूं. मुझे जिस तरह की कहानी पसंद है. यह फिल्म भी उनमें से एक होगी. 

मेरे लिए दोस्ती का रिश्ता अहम है : फरहान


फरहान अख्तर फिल्म वजीर से पहली बार एक् शन करते नजर आयेंगे. वे फिल्म रॉक आॅन की शूटिंग में भी व्यस्त हैं. वजीर को वह अलग मिजाज की फिल्म मान रहे हैं.
फरहान, यूं तो आप कई विधाओं में माहिर रहे हैं. लेकिन बात जब अभिनय की आती है तो आप फिल्मों के चयन को लेकर काफी सजग हो जाते हंै. तो वजीर को हां कहने की क्या वजह रही?
दरअसल, मुझे लगता है कि बात जब निर्देशन की आती है तो मैं अधिक चूजी हो जाता हूं. मैं वैसी ही फिल्में निर्देशित करता हूं जिनके विषय मुझे एक्साइट करते हैं. वजीर को हां कहने की वजह यह थी कि फिल्म की स्क्रिप्ट को खूबसूरत तरीके से लिखा गया है. विधु दोस्त हैं. अभिजात ने बेहतरीन तरीके से कहानी लिखी है. इस फिल्म की खूबी यह है कि फिल्म के किरदार आपको आकर्षित करेंगे.इस किरदार के साथ मैं इसलिए जुड़ा कि लगा कि वह आम है. मेरे साथ भी ऐसा सिचुएशन हो सकता है और मैं जब इस सिचुएशन में रहूंगा तो किस तरह बर्ताव करता. यह सोचने पर मजबूर करती है कहानी.
आपकी फिल्मों में दोस्ती का एक खास एंगल जरूर होता है. वजीर में भी क्या वह एंगल है?जी हां, बिल्कुल है. दोस्ती का अहम हिस्सा है. इसमें दोस्ती एक एटीएस आॅफिसर और शतरंज मास्टर के बीच होती है और जैसा कि सभी जानते हैं कि मेरी फिल्म में दोस्ती महत्वपूर्ण होती है. विधु खुद कम दोस्त बनाते हैं. लेकिन दोस्ती निभाते हैं. तो इस फिल्म में भी वह एंगल है.
वास्तविक जिंदगी में आपके लिए दोस्ती क्या मायने रखती है?
मुझे लगता है कि  मैं इस मामले में लकी रहा हूं कि मेरे जितने भी दोस्त बने हैं इंडस्ट्री से भी. वे आज भी मेरे साथ हैं. मेरे लिए खास हैं. मैं उनके लिए खास हूं.फिर वह अभिषेक हो, ऋतिक हों, प्रीति जिंटा, उदय सभी मेरे क्लोज दोस्त हैं. मुझे याद है प्रीति मेरे घर आयी थीं. क्या कहना का स्क्रीन टेस्ट देने के लिए उस वक्त मैं दिल चाहता है लिख रहा था. और उस वक्त हमारी मुलाकात हुई थी. मैंने स्क्रीन टेस्ट देखा था और काफी पसंद आयी थी मुझे उनकी एक्टिंग़,. उस वक्त ही मैंने उन्हें दिमाग में रख कर कहानी लिखनी शुरू की थी.  और प्रीति ने मुझसे कहा कि मैं यह फिल्म करूंगी. तुम जब भी बोलोगे. फिर कहानी पूरी हुई और मैंने प्रीति को कॉल किया और वह हमारे साथ जुड़ी. आज भी प्रीति से मेरी दोस्ती वैसी ही है जैसे कई सालों पहले थी. शाहरुख मेरे बहुत खास दोस्तों में से एक हैं. शाहरुख से भी मेरी दोस्ती सिर्फ फिल्मों की वजह से नहीं है. मुझे लगता है कि जब भी कभी जरूरत होगी शाहरुख खड़े होंगे. सो, मैं लकी हूं कि मेरे पास अच्छे दोस्तों की लिस्ट है. और मुझे लगता है कि मेरे दोस्त मेरी इस क्वालिटी को पसंद करते हैं कि वे मुझ पर विश्वास कर सकते हैं और वे जानते हैं कि मैं उनका और वे मेरी इज्जत करते हैं. किसी भी रिश्ते में यही दो खास बातें होती हैं.
रईस का पोस्टर काफी रोचक नजर आ रहा है?
दरअसल, यह फिल्म 80 के दशक पर सेट है. और उस दौर में इस तरह का ही मिजाज होता था. लोगों का. तो वे सारी बातों को ध्यान में रख कर हमने फिल्म का पोस्टर जारी किया है. मुझे लगता है कि दर्शकों को भी फिल्म पसंद आनी चाहिए. लेकिन कोई दावा नहीं कर सकता अभी से.
हाल ही में आपने आइ कैन दू डैट का सफर टीवी पर तय किया. कैसा रहा अनुभव?
मुझे टीवी हमेशा इंस्पायर करता है. खासतौर से आइ कैन दू डैट बिल्कुल अलग शो रहा. इसमें दुनिया की कई नयी चीजें देखने को मिली. सीखने को मिली. यह शो देख कर कितनी प्रेरणा मिली है कि कोई इंसान जिसे बिल्कुल पता नहीं है उस विधा के बारे में. लेकिन वह किस तरह सीखता है.फिर उसको परफॉर्म करते हैं. आसान काम नहीं है. टीवी पर आकर करना बहुत कठिन है. मैं शॉक्ड था, लोगों के परफॉरमेंस को देख कर.
मर्द को लेकर किस तरह और काम किये जा रहे हैं?
और भी कई इनिशियेटिव लिये जा रहे हैं. हम दिसंबर तक एक ऐसा डियोडेरेंट लांच कर रहे हैं, जिसमें लड़कों को लड़कियों के रिस्पेक्ट की बात समझायेंगे. और उसकी कमाई से चैरिटी होगी और इस तरह के और भी कई इनिशियेटिव ले रहे हैं.
अमिताभ बच्चन से क्या क्या सीखने का मौका मिला?
लक्ष्य के वक्त भी अमितजी के साथ जुड़ा था. उस दौर से लेकर अबतक मैंने देखा है कि अमितजी की एक चीज नहीं बदली वह यह है कि वह आज भी अनुशासित हैं और उनमें सीखने की भूख अब भी जारी है. काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है. उनसे. मेरे पिताजी और उनके दौर की कई सारी कहानियां भी वे शेयर करते हैं. लेकिन मैं उन्हें यहां शेयर नहीं कर सकता.

खुश हूं अपने करियर से : अदिति शर्मा


अदिति शर्मा ने ज़ी सिने स्टार की खोज से अभिनय की दुनिया में दस्तक दी थी और एक बार फिर से वह ज़ी के ही चैनल एंड टीवी के शो गंगा में बड़ी गंगा का किरदार निभाने जा रही हैं। हाल ही में शो की शूटिंग वाराणसी के घाट पर हुई। 
अदिति आपने शुरुआत ज़ी से ही की थी। अब एक बार फिर से ज़ी से जुड़ने का मौका मिला है।इस संयोग को किस तरह देखती हैं आप?
मैं बेहद खुश हूं कि मुझे इस इस शो से ज़ी के माध्यम से ही जुड़ने का मौका मिला है।क्योंकि मैंने अपने करियर की शुरुआत इसी चैनल के साथ शुरू किया था। तब से लेकर अबतक में लगातार काम कर रही हूं और मुझे हर तरह के जॉनर में काम करने का मौका मिला है। सिने स्टार ही पहला जरिया बना. आज फिर से शो के। साथ जुड़ी हूं और वह भी इतने बेहतरीन शो से जुड़ने का मौका मिला है। तो मैं बहुत खुश हूं।
इस शो में गंगा के किरदार पहले से ही एक स्थापित किरदार है। छोटी गंगा ने दर्शकों का पूरी तरह दिल जीता है। तो ऐसे में एक चुनौती नजर आ रही?
जी हां चुनौती तो है ही। बच्चे ऐसे भी जो किरदार निभाते हैं। उनके किरदारों में इतनी सच्चाई और मासूमियत होती है कि वे दर्शकों के दिलों को छूते भी हैं।सो चुनौती है मेरे लिए। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि जिस तरह शो के निर्देशक ने इसे बनाया है और कहानी में नए नए एंगल दिखाए जाएंगे। उनके लिए मैं पूरी तरह से तैयार हूं।जिंदगी में एक पड़ाव आता ही है जब आगे की कहानी भी दिखाई जानी जरूरी है।सो बिल्कुल सही वक़्त पर एक नयी शुरुआत हो रही है।
इस किरदार में ढलने के लिए किस तरह की तैयारी की है आपने?
मेरी कोशिश होगी कि गंगा की जो अपनी मासूमियत है वह बरकरार रहे। ऐसा न हो कि दर्शक बोर हो जाएं तो मैं अपने एक्सप्रेशन को लेकर इन बातों का ख्याल रखूंगी। इसके अलावा कोशिश होगी कि स्वाभाविक नजर आऊं।
बनारस से गंगा का नत खास रहा है। आप अभी वाराणसी के घाट पर ही शूटिंग कर रही हैं।यह अनुभव कैसा है?
बनारस मैं पहले भी आती रही हूं। मेरे दादा दादी यही रहते थे और बचपन की कई यादें जुड़ी हैं।लेकिन घाट पर जाकर शूटिंग करने का एक्सपीरियंस बिल्कुल अलग है। यहां एक ही घाट पर कई चीजें होती रहती हैं। तो जिंदगी के कई पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिलता है। आप एक झटके में जिंदगी की कई चेहरे से आमना सामना करते हैं। एक तरफ आरती है तो दूसरी तरफ मसान है। आप जिंदगी की कई हकीकत से आमना सामना करते हैं।बनारस उस लिहाज से भी काफी खास है।
आपने जिस तरह शुरुआत की और आपको जिस तरह की लॉन्चिंग मिली थी आपको लगता है उस तरह से काम करने का मौका आपको नहीं मिला ?
नहीं मुझे किसी बात का दुख नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुझे अच्छे मौके नहीं मिले हैं। मैंने भी लगातार काम किया है। अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है।और फिर मैंने हमेशा किरदारों को एहमियत दी है।और उन किरदारों में भी दर्शकों ने मुझे याद रखा है। यही मेरे लिए खास बात है।
किसी टीवी शो में यह आपकी पहली शुरुआत है। कैसा लग रहा अनुभव?
काफी अलग अनुभव है। अब जब पहली बार डेली सोप में काम कर रही तो समझ आ रहा की किस तरह यहां फिल्मों से अधिक मेहनत है। हर दिन एपिसोड्स को पूरा करने और बैंक बनाने की कितनी जरूरत होती है। मेरे को स्टार विशाल जोकि शो में सागर की भूमिका में हैं। उनसे मैंने सीखा कि किस तरह भीड़ की बीच भी आपको काम करना होता है।किस तरह भीड़ को नियंत्रित करना होता है और किस तरह अगर फैन आपसे बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें भी अटेंशन देना होता है। फिल्मों का सेट अप अलग तरीके का होता है। वहां सारा काम प्रोडक्शन कन्ट्रोलर करते। आपको सिर्फ एक्ट करना होता है।लेकिन यहां चूंकि आप हर दिन लोगों से मिलते हो तो आपको आम आदमी से कनेक्ट होना पड़ता है। इसलिए आम लोगों को आप इग्नोर नहीं कर सकते। यह सारी बातें मैं विशाल से सीख रही हूं। अब धीरे धीरे इस दुनिया को भी समझने की कोशिश कर रही हूं
एक नयी चुनौती है सागर:विशाल
सागर का किरदार काफी चुनौती भरा हुआ है। चूंकि स्थापित किरदार हैं।मुझे खुशी है कि वीरा के बाद मैंने छोटा सा ब्रेक लिया और फिर से मुझे एक अच्छा सा किरदार निभाने का मौका मिल गया। सागर का बच्च्पन काफी शरारती रहा है। मेरी भी शरारतें जारी रहेंगी। हर बार नए लोगों के साथ काम करने का Pअनुभव नया होता है। अदिति का भी साथ मिला है। हमारी कोशिश होगी कि विधवाओं को लेकर जिस तरह की सोच है। उस सोच को नई दिशा देने में यह शो किस हद तक सहायक हो सकती यही मोटिव होगा ।साथ ही एक प्रेम कहानी भी दिखाने की कोशिश होगी। मुझे उम्मीद है कि जिस तरह बलदेव को दर्शकों का प्यार मिला है। आगे वह प्यार सागर को भी मिलेगा। सागर और गंगा के बीच भी किस तरह का प्यार संभव है। यह शो दर्शायेगा।

अभिनय जिंदगी से हमेशा जुड़ा रहेगा


मशहूर अभिनेत्री सारिका अब भी मानती हैं कि अभी ऐसे कई किरदार हैं जिन्हें उन्होंने नहीं निभाया है। वे हर तरह के जॉनर में काम करना चाहती हैं। और वे स्पष्ट रूप से कहती हैं कि उनके लिए टीवी या फिल्म कोई भी माध्यम हो सकता। तभी तो वह तवज्जो परफॉरमेंस को देती हैं। धारावाहिक युद्ध के बाद वे हाल ही में डर सबको लगता है का हिस्सा भी बनी। 

हाल में आप डर सबको लगता है का हिस्सा बनी। इससे पहले आपने टीवी के लिए युद्ध शो किया था। तो इन धारावाहिकों में ऐसी क्या खास बात नजर आयी?
दरअसल ऐसा नहीं है कि मैंने खुद को सीमित कर रखा है कि मुझे टीवी में नहीं सिर्फ फिल्मों में काम करना है।मैंने कभी माध्यम नहीं बांटा। जब जैसे अवसर मिले मैंने काम किया।और आगे भी करती रहूंगी। युद्ध का कॉन्सेप्ट मुझे बहुत अच्छा और अलग लगा था। और इसी वजह से मैंने शो को हां भी कहा था। जितनी मेहनत करते मैंने वहां लोगों को देखा। मैं इस बात से हताश हुई कि दर्शकों कप वह शो पसंद नहीं आया।लेकिन वह एक बेहतरीन शो था। इसी तरह जब मुझे दर सबको लगता है का ऑफर आया तो मैंने तुरंत हां कहा। साथ ही एक वजह यह भी थी कि मेरे लिए मेरे निर्देशक मैटर करते हैं। सौमिक जिन्होंने दर सबको लगता है का वह एपिसोड निर्देशित किया था। उन्हें में काफी सालों से जानती हूं और मैं जानती हूं कि वह अच्छा काम करते हैं तो ऐसे लोगों से सीखने का बहुत मौका मिलता है।
आपने खुद भी कई हॉरर फिल्मों में काम किया है। उस दौर में और अबके दौर में इस जॉनर में बनने वाली फिल्मों या धारावाहिकों में क्या बदलाव देखती हैं?
मुझे लगता है कि हर स्तर पर बदलाव आये हैं।उस दौर में सारी फिल्मों की कहानी एक सी होती थी। लेकिन मुझे लगता है कि उस दौर में वही सब कुछ चलता था।उस दौर में रामसे ब्रदर्स वैसी फिल्में भी बना पाएं यह बड़ी बात थी।चूंकि उस वक़्त तकनीक इतनी तरक्की नहीं कर पायी थी। उस दौर में रामसे ब्रदर्स की फिल्मों से लोग डरे यह बड़ी बात है।मुझे याद है हम काफी मस्ती भी किया करते थे। उस वक़्त अधिक मेहनत नहीं करनी होती थी। हम सिफोन साड़ियां पहनकर दौड़ते रहते थे और काम हो जाता था। मजेदार खाना मिलता था अयर बड़ा मज़ा आता था। मैंने तीन फिल्मों में काम किया जो हॉरर जोनर की थी। उस वक़्त लोग उसे बी ग्रेड की फिल्में मानते थे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसे बी ग्रेड फिल्मों की तरह देखा जाना चाहिए। चूंकि उस वक़्त साधन सीमित थे।और फिर भी लोगों ने फिल्में बनायी भी और लोगों को डराया भी। आज के दौर में लोग स्मार्ट हो गए हैं। एक्सपोजर उनका बढ़ा है। जाहिर है आज हॉरर जॉनर के मेकर्स के लिए बड़ी चुनौती है कि वे किस तरह कुछ नयी चीजें दिखाई जाये।कुछ नयी कहानी  कहनी जरूरी है। साथ ही यह भी आज ध्यान रखना जरूरी है कि हॉरर फिल्म कहीं कॉमेडी न बन जाये, क्योंकि आजकल दर्शक कई चीजें देखते हैं और वे सारी हकीकत और तकनीक से वाकिफ होते हैं। आप उन्हें चीट नहीं कर सकते।तो आपको हर तरह से अलर्ट रहना होगा। वैसी स्तरीय चीजें परसोनी होगी।
आपकी छोटी बेटी अक्षरा ने हाल ही में अपने करियर की शुरुआत की है। उनके काम से कितनी संतुष्ट हैं आप?
मैं अपने बच्चों के काम में बिल्कुल दखल नहीं देती और न ही मैं कभी उन्हें कोई सलाह देती हूं। मुझे खुशी है कि वह अपनी राह खुद तैयार कर रहे हैं। उन्हें किसी तरह की सलाह की जरूरत नहीं होती।साथ ही वे बहुत स्मार्ट होते और खुद दुनिया को मुठ्ठी में लेकर चलते हैं। मुझे खुशी है कि छोटी उम्र से ही अक्षरा ने खुद को पैरों पर खड़ा करना सीख लिया है। उसे पहली ही फिल्म में  बेहतरीन कलाकारों अमिताभ बच्चन और धनुष के साथ काम किया। उसकी शुरुआत बहुत अच्छी हुई है और पूरी उम्मीद है कि आगे भी वह अच्छा काम करेगी।  मैं उन्हें किसी बजि तरह से गाइड नहीं करती। और मैं उन्हें बस एक ही सलाह देती हूं कि उन्हें बस काम करने की जरूरत है। लेकिन उनके मन लायक काम।
आपने हाल ही में हॉरर शो में काम किया वास्तविक जिंदगी में कभी किसी हॉन्टेड जगह में वह डर महसूस किया?
सच कहूं तो मैंने कई हॉरर फिल्मों में काम भी किया है लेकिन मुझे कभी उन चीजों से डर नहीं लगा। लेकिन मैं मानती हूं कि कोई शक्ति होती है।अगर ईश्वर है वो भी है।लेकिन ये इन सारी बातों पर निर्भर करता है कि आप उस नेगेटिव एनर्जी को कितना अपने पास बुलाते हैं। आप जितना डरेंगे वह एनर्जी आपको उतनी ही परेशान करेगी। इन सारी बातों को कहने का यह मतलब नहीं कि मैं अंधविश्वासी हूं। हॉन्टेड जगहों पर मुझे ये बात जरूर महसूस होती है कि वहां नेगेटिव एनर्जी होती है और आप कभी कभी वहां असहज भी महसूस करने लगते हैं। कोई कारण हो या न हो।
क्योंकि यह हकीकत है कि दर सबको लगता है।
आपकी पसंदीदा हॉरर फिल्में कौन कौन सी रही हैं
मुझे हेलेन और मेहमूद साहब की गुमनाम पसंद है। इसके अलावा वो कौन थी की कहानी बेहद पसंद है।इन सारी फिल्मों में बहुत अच्छी कहानियां रही हैं। अधिकतर हिंदी फिल्मों में जहां तक में समझती हूं कहानियों में हॉरर के साथ साथ थ्रिलर का भी अंगले अवश्य रहा है इसलिए हम हर फिल्म को हॉरर नहीं बोल पाते। लेकिन फिल्म अंतिम तक हॉरर फिल्मों के रूप में रहती है तो दर्शक काफी डरते भी हैं लेकिन बाद में फिल्म थ्रिलर बन जाती है। इसलिए लोग अब तक हॉरर और थ्रिलर को कैतेग्राईज़ नहीं कर पाये हैं।
टीवी पर किसी हिंदी शो को फॉलो करती थीं आप?
नहीं मैं ईमानदारी से कहूंगी कि हिंदी टीवी मैं नहीं देखती। हां मगर में अंगरेजी शो बहुत फॉलो करती हूं।टू डिटेक्टिव मेरा पसंदीदा शो है।में चाहती हूं कि कुछ वैसा काम हमारे टीवी में भी हो तो मैं जरूर करना चाहूंगी।
एक्टिंग के अलावा kin चीजों में दिलचस्पी रही है।
मुझे पेरफोरमंस वाली सारी विधाएं पसंद हैं और मुझे मौका मिले। अच्छे काम मिलें तो मैं इस दुनिया से कभी दूर नहीं हो सकती हूं। मेरे लिए परफॉर्मेंस का माध्यम महत्वपूर्ण है।

परिणीति का नया अवतार


परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपना काफी वजन कम किया है और वह लगातार कई हेल्थ मैगजीन के कवर पर नजर आ रही हैं. उनके इस अवतार पर बॉलीवुड की कई कमसीन हसीनाओं और उनकी समकक्ष अभिनेत्रियां उन्हें लगातार बधाई दे रही हैं कि उन्होंने अपना वजन काफी कम कर लिया है और वह इस नये अवतार में कमाल की लग रही हैं. लेकिन इसके साथ ही हकीकत यह भी है कि परिणीति इन दिनों फिल्मों में कितनी नजर आ रही हैं. जब उन्होंने बॉलीवुड में दस्तक दी थी. उस वक्त उन्होंने कम वक्त में ही संभावनाएं जगाई थीं, कि वह लीक से हट कर रानी मुखर्जी सरीके अभिनय से दर्शकों को प्रभावित करेंगी. लेकिन अचानक ही उन्होंने किसी और तरफ रुख किया है. मुमकिन है कि उन्हें ऐसा उनके मेंटर आदित्य चोपड़ा ने कहा हो और उनके साथ एक फिल्म में काम कर चुकीं वाणी कपूर को जैसे उन्होंने अपनी नयी फिल्म में अभिनेत्री चुना है. परिणीति के लिए भी उन्होंने कुछ सोच रखा हो. परिणीति ने अपने करियर की शुरुआत पीआर के रूप में की थी और उन्होंने अभिनय को लेकर कभी योजना नहीं बनाई थी. इस लिहाज से उन्होंने जो कुछ अब तक हासिल किया है. वह बेहतरीन है. लेकिन साथ ही साथ एक हकीकत यह भी है कि परिणीति ने खुद को पूरी तरह से बदलने का निर्णय आखिर क्यों लिया. उन्होंने विद्या बालन की तरह रास्ता इख्तियार करना क्यों असहज लगा कि वह अपने किरदारों पर विशेष ध्यान देतीं. न कि अपनी शारीरिक बनावट पर. दरअसल, बॉलीवुड ने उन्हें बदलने पर मजबूर किया है. यहां सारी अभिनेत्रियां जब परदे पर नजर आती हैं, तो एक ही समान नजर आती हैं. खुद वहीदा रहमान ने यह बात स्वीकारी है कि आज के दौर में सारी अभिनेत्री एक ही कद काठी की नजर आती हैं. ऐसे में परिणीति का यूं बदलना भी स्वाभाविक ही है.

स्वरा कीप वॉकिंग


स्वरा भाष्कर इन दिनों फिल्म अनारकली आरावाली की शूटिंग कर रही हैं. वे फिल्म में लीड किरदार निभा रही हैं. अपने सोशल साइट्स पर वे फिल्म की शूटिंग की कुछ झलकियां व तसवीरें शेयर कर रही हैं. फिल्म में उनके साथ संजय मिश्रा जैसे सीनियर और प्रबुद्ध कलाकार भी हैं. लेकिन खुद संदजय मिश्रा ने स्वरा के बारे में अपने फेसबुक स्टेटस में यह लिखा कि स्वरा उनके लिए अभिनय की नयी इंस्टीटयूशन हैं और उनसे वे काफी कुछ नया सीख भी रहे हैं. स्वरा ने अपनी शुरुआत माधवलाल कीप वॉकिंग से की थी और वे लगातार कई फिल्मों का हिस्सा बन रही हैं. खास बात यह है कि स्वरा ने ग्लैमर और फंैटेंसी गुड़ियों के बीच भी अपनी अलग जगह बनाई है और अपने अंदाज में बनाई है. फिल्म रांझणा में वह भी एक रांझणा की ही भूमिका में थीं, जो कुंदन के प्यार में पागल थी. उन्होंने प्यार में पड़ी पागल प्रेमिका का किरदार निभा कर सबको मोहित किया. इसी फिल्म से वह सोनम के करीब आयीं और सोनम खुद स्वीकारती हैं कि उन्हें स्वरा से बातें करने में मजा भी आता है और वह खुद को सेक्योर भी महसूस करती हैं.फिल्म प्रेम रतन धन पायो ने दोनों ने फिर से साथ काम किया था. सलमान और सोनम जैसे सितारों के बावजूद आप इस फिल्म में स्वरा के अभिनय को नजरअंदाज नहीं कर सकते. यही उनकी काबिलियत है. उनके नजदीकी बताते हैं कि वे काफी समझदार और देश दुनिया के बारे में जानकारी और अपना नजरिया रखने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं. इस लिहाज से स्वरा ने कीप वॉकिंग से जिस सफर पर चलने की शुरुआत की थी.धीरे धीरे वे नयी दिशा दे रही हैं और बॉलीवुड को अब यह समझना होगा कि स्वरा जैसी अभिनेत्री के लिए अनारकली आरावाली जैसी फिल्मों के किरदार लिखे जायें. चूंकि उनमें इस तरह के विषयपरक किरदार निभाने की पूरी क्षमता नजर आती है. स्वरा के अभिनय के स्वर यूं ही बरकरार रहने चाहिए. वे धीरे धीरे ही सही लेकिन खास पहचान बना रही हैं, और जिस तरह के विषयों का वह चुनाव कर रही हैं.वे जल्द ही खास तरह के सिनेमा की पहली पसंद बनती जायेंगी. इसकी पूरी संभावनाएं हैं. 

नए कलाकार और म्यूजिक अल्बम


टी सीरीज ने फिर से एक नयी शुरुआत की है। एक बार फिर से वे एल्बम मेकिंग पर विशेष रूप से कार्य कर रहा। हाल ही में सोनू निगम एक नए एलबम के साथ आये हैं। उनके गाने यू ट्यूब पर काफी पसंद भी किये ज रहे हैं। यह हकीकत है कि सोनू निगम सारेगामा से अपनी पहचान बनायी। लेकिन वे दर्शकों के चहेते अपने म्यूजिक वीडियो एल्बम की वजह से ही बने। सोनू निगम एक दौर में किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं थे। उनकी लड़कियों की फैन फॉलिंग बेहद खास थी। उस दौर में उनके वीडियो कसेट काफी महंगे दामों में बिकते थे। उसी दौर में बिपाशा बसु को भी बड़े मौके मिले। निश्चित तौर पर उस दौर के म्यूजिक वीडियो के सुपरस्टार रहे कलाकार वह दौर मिस करते होंगे। लेकिन टी सीरीज ने फिर से उन्हें सांस लेने के मौके दिये हैं। टी सीरीज प्रमुख का मानना है कि नए कलाकारों को मौके देना बेहद जरूरी हैं। और सभी को फिल्मों में मौके देना और वह भी एक साथ यह संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने तय किया है कि एक बार फिर से वे इस माध्यम को प्रोत्साहित करेंगे। और इसी क्रम में उन्होंने शुरुआत की है। ऋतिक रोशन और सोनम कपूर के वीडियो गीत काफी पसंद भी किये गए हैं। आने वाले समय में नयी प्रतिभाओं को मौके देने के लिए यह सहायक होंगे।सो बेहद जरूरी है कि बाकी प्रोडक्शन हाउस को भी इस तरीके की शुरुआत करनी ही चाहिए। ताकि नई प्रतिभाओं को अधिक अवसर मिले। सनम, बादशाह, हनी सिंह जैसे नाम टी सीरीज की वजह से बड़े नाम बने हैं। बड़े निर्देशक भी पहले की तरह अगर वीडियो निर्माण में फिर से आएं तो नई प्रतिभाएं अधिक प्रोत्साहित होंगी। सो इंटरनेट वीडियो के रूप में भी इसे बढ़ाना जरूरी है।