सलमान खान की फिल्म जय हो ने साबित कर दिया है कि वे आम आदमी के अभिनेता हैं। फिल्म ने पहले दिन ही २० करोड़ रुपए की कमाई की( आलेख लिखने तक) फिल्म आजम आदमी पर आधारित है, जिसमें उन्होंने आम आदमी से जुड़े सारे तत्व देने की कोशिश की है। एक दौर में सलमान खान ने लगातार फ्लॉप फिल्में दी. लेकिन उन्होंने धीरे धीरे नब्ज पकड़ी। और वे जल्द ही ये बात समझ गए कि दर्शकों को उनसे क्या चाहिए। वांटेड फिल्म से शायद सलमान ने भी इतनी उम्मीद नहीं की थी उन्हें उस फिल्म से इस कदर सफलता मिलेगी। और वह उनके करियर की टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लगातार सफल फिल्म देने के बाद उन्हें इस बात का अनुमान हो चुका है कि अब दर्शक उन्हें एकरसता में पसंद नहीं करेंगे। सो, उन्होंने अब बापना ट्रैक बदलने की कोशिश की है। वे जल्द ही भैया जी जैसी रोमेंटिक फिल्म लेकर आ रहे हैं। हाल ही में जब उनसे मुलाकात हुई उनके चेहरे पे एक प्यारी सी मुस्कान थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही आपका प्रेम लौट रहा है। पूछने पर उन्होंने कहा प्रेम यानि बनकर अभिनय करना बेहद भाता है। दरअसल इसकी वजह यह है कि जब जिंदगी में प्रेम होता है तो इंसान खुद ब खुद अच्छा लगता लगने लगता है। यही वजह है कि दर्शक जब एक सी फिल्में देख कर उब जाएं तो अभिनेता को चाहिए कि वे खुद को बदलें और दर्शकों के सामने किसी में आयें। सलमान को सभी एंग्री यंग मन मानते हैं और उन्होंने कई स्टंट वाली फिल्में कर ली है और अब उनकी इक्षा है कि वह अपना लुक्क बदलें ताकि लोगों के दिलो दिमाग से अलग न हो। उन्होंने एक सही निर्णय लिया है। जाहिर सी बात है कि सलमान जिन ऊंचाइयों को छू चुके हैं वे निशित्तौर पे उसे खोना नहीं चाहेंगे। भले ही वह इस बात से इंकार करें लेकिन कोई भी अपने शासित प्रदेश में किसी अन्य शासक कका आना बर्दास्त नहीं करेंगे। सो उनकी नये अवतार का इंतजार रहेगा
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20140218
सलमान की जय हो
सलमान खान की फिल्म जय हो ने साबित कर दिया है कि वे आम आदमी के अभिनेता हैं। फिल्म ने पहले दिन ही २० करोड़ रुपए की कमाई की( आलेख लिखने तक) फिल्म आजम आदमी पर आधारित है, जिसमें उन्होंने आम आदमी से जुड़े सारे तत्व देने की कोशिश की है। एक दौर में सलमान खान ने लगातार फ्लॉप फिल्में दी. लेकिन उन्होंने धीरे धीरे नब्ज पकड़ी। और वे जल्द ही ये बात समझ गए कि दर्शकों को उनसे क्या चाहिए। वांटेड फिल्म से शायद सलमान ने भी इतनी उम्मीद नहीं की थी उन्हें उस फिल्म से इस कदर सफलता मिलेगी। और वह उनके करियर की टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लगातार सफल फिल्म देने के बाद उन्हें इस बात का अनुमान हो चुका है कि अब दर्शक उन्हें एकरसता में पसंद नहीं करेंगे। सो, उन्होंने अब बापना ट्रैक बदलने की कोशिश की है। वे जल्द ही भैया जी जैसी रोमेंटिक फिल्म लेकर आ रहे हैं। हाल ही में जब उनसे मुलाकात हुई उनके चेहरे पे एक प्यारी सी मुस्कान थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही आपका प्रेम लौट रहा है। पूछने पर उन्होंने कहा प्रेम यानि बनकर अभिनय करना बेहद भाता है। दरअसल इसकी वजह यह है कि जब जिंदगी में प्रेम होता है तो इंसान खुद ब खुद अच्छा लगता लगने लगता है। यही वजह है कि दर्शक जब एक सी फिल्में देख कर उब जाएं तो अभिनेता को चाहिए कि वे खुद को बदलें और दर्शकों के सामने किसी में आयें। सलमान को सभी एंग्री यंग मन मानते हैं और उन्होंने कई स्टंट वाली फिल्में कर ली है और अब उनकी इक्षा है कि वह अपना लुक्क बदलें ताकि लोगों के दिलो दिमाग से अलग न हो। उन्होंने एक सही निर्णय लिया है। जाहिर सी बात है कि सलमान जिन ऊंचाइयों को छू चुके हैं वे निशित्तौर पे उसे खोना नहीं चाहेंगे। भले ही वह इस बात से इंकार करें लेकिन कोई भी अपने शासित प्रदेश में किसी अन्य शासक कका आना बर्दास्त नहीं करेंगे। सो उनकी नये अवतार का इंतजार रहेगा
खिल चुकी है कली
इम्तियाज अली ने फिल्म हाइवे में आलिया भट्ट को मुख्य किरदार के रूप में कास्ट किया है. आलिया भट्ट महेश भट्ट की बेटी हैं और वह मुंबई में ही पली बढ़ी हैं. निश्चित तौर पर वे मुंबई की लड़की रही हैं और उन्होंने ऐशो आराम से अपनी जिंदगी जी है. लेकिन इम्तियाज की इस फिल्म के माध्यम से आलिया को देश के ऐसे हिस्सों में जाने और देखने समझने का मौका मिला है, जहां वे शायद ही घूमने गयी हों, और शायद ही उन्होंने उन स्थानों को कभी देखा हो. चूंकि मुंबई की लड़कियां खासतौर से फिल्मी दुनिया की लड़की को स्टारबक्स की कॉफी व उनके फ्लेवर और स्वीटजरलैंड के ब्रांड के नाम भले ही याद हों. लेकिन उन्हें किसी भारत के कोने में स्थित किसी शहर का नाम शायद ही याद होगा. इस फिल्म के प्रोमोज को ध्यान से देखें तो वाकई ऐसा लगता है कि आलिया को जैसे एक नयी जिंदगी मिल गयी है और वह उसे खुल कर जी लेना चाहती हैं. वे फिल्म में अभिनय करती नजर नहीं आ रहीं, बल्कि उसे जी रही हैं. ऐसा महसूस होरहा है. दरअसल, आलिया की यह पहली फिल्म होनी चाहिए थी. चंूकि इस फिल्म में उन्हें खुद को निखारने और अपने अभिनय के कई रूप दिखाने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं. ऐसा नजर आ रहा है कि यह कली खिल रही है. इम्तियाज अली की पारखी नजर की दाद देनी चाहिए जो उन्होंने एक जूहू गर्ल को ऐसा किरदार सौंपा है और आलिया उसे परिपक्वता से निभाती नजर भी आ रही हैं.स्पष्ट है कि आलिया जो कि फिल्म स्टूडेंट आॅफ द ईयर में बेहद चार्मी और अरबन दुनिया की लड़की का ही किरदार निभा रही थी. इस फिल्म से उनका नया रूप लोगों के सामने आयेगा और लोग इसे देख कर दंग हो जायेंगे. स्पष्ट है कि यह कली अब खिल कर मुस्कुराने और अपने पंख फैलाने के लिए तैयार है. उम्मीद है यह कली खुशबू भी फैलायेगी.
कब के बिछड़े आज मिले
हाल ही में जावेद अख्तर और सलीम खान सीएनएन आइबीएन में साथ साथ आये. दोनों के बीच आयी दरार के बाद यह पहला मौका था जब सलीम खान और जावेद अख्तर ने साथ साथ कोई साक्षात्कार दिया. दोनों इस इंटरव्यू के दौरान कई बार रोये.दोनों ने अपने मन की बात कही. यह पहली बार था, जब किसी दो बिछड़े दोस्तों ने साथ साथ मिल कर कॉफी विद करन जैसे इतर शो की अपेक्षा किसी अन्य शो में शिरकत की और खुल कर अपनी बातें सामने रखीं . दोनों ने आपसी मतभेद की चर्चा की. सलीम जावेद से किस बात पर नाराज हुए थे. यह स्पष्ट रूप से किसी को भी जानकारी नहीं. लेकिन लोगों में चर्चा यही रहती है कि जावेद अख्तर ने सलीम खान को धोखा दिया था और सलीम खान के बारे में अमिताभ बच्चन से जाकर कुछ कह दिया था. तब से दोनों दूर हंै. लेकिन फिर भी दोनों परिवारों के बीच वह दूरी नहीं. सलीम खान जब भी जावेद की पहली पत् नी हनी ईरानी से मिलते दोनों में खूब बातें होतीं. जंजीर फिल्म को लेकर भी दोनों साथ साथ आये. लेकिन खुद सलीम खान मानते हैं कि रिश्ते में एक बार जब दरार पड़ जाती है तो वह दोबारा वह गांठ खुल नहीं पाती. वे आज भी मानते हैं कि शाहरुख और सलमान के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते. मुमकिन हो कि सलमान खान ने अपने पिता से ही दोस्ती और दोस्ती में पड़ी दरार के रिश्ते को निभाने का तरीका सीखा हो. लेकिन बहाना कोई भी हो. दोनों का साथ साथ फिर से एक मंच पर आना. एक सफलता है और राजीव मशंद की भी यह सफलता है कि उन्होंने दोनों को साथ किया. फिल्मी पत्रकार अगर इस तरह की भूमिका निभाते हैं तो इस बात का भी उल्लेख होना ही चाहिए. चूंकि आमतौर पर फिल्मी पत्रकारों को केवल गॉसिप कर वाहवाही लूटने वाला ही माना जाता रहा है. इस लिहाज से यह एक सफल कदम है.
नाम नामात्र नहीं
दीया मिर्जा फिल्म निर्माता बन कर बेहद खुश हंै और उनके चेहरे से उनकी यह खुशी साफ झलकती है. उनका मानना है कि हिंदी फिल्मों में अभिनेत्रियां जब जब फिल्म निर्माण से जुड़ती हैं लोग उनके बारे में यह बातें बनाने लगते हैं कि वे प्रोडयूसर बनी हैं क्योंकि उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिल रहा या फिल्मों में सफल नहीं हो पायीं. दीया को इन बातों से तकलीफ होती है और दुख भी होता है कि अब भी बॉलीवुड में महिला निर्मात्री को लेकर इस तरह की बातें क्यों की जाती हैं. जबकि लोग अगर देखें तो महिला निर्मात्री में एकता कपूर जैसी सफल निर्मात्री ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं भी सफल अभिनेत्री हो सकती हैं और उन्हें सिर्फ फिल्मों में नाम नहीं चाहिए. किसी दौर तक गौरी खान का नाम फिल्मों में यूं ही जाता रहा. लेकिन हकीकत यह है कि अब गौरी खान भी फिल्मों की मेकिंग और उनके प्रोडक् शन में दखल देने लगी हैं. इससे स्पष्ट है कि फिल्मों में अब अभिनेत्रियां केवल अपना नाम नामात्र नहीं रखना चाहतीं. वे चाहती हैं कि उन्हें के्रडिट तभी मिले. जब उन्होंने वाकई उस नाम के लिए काम किया हो. दीया मिर्जा ने साफ किया है कि लोग यह न सोचें कि निर्माता का मतलब केवल चेक काटने का होता है. ऐसा नहीं है दीया फिल्म के हर क्रियेटिव विभाग में दिलचस्पी ले रही हैं.और उन्हें लगता है कि यह महिलाओं के लिए एक बेहतरीन क्षेत्र है. जल्द ही अमीषा पटेल अपने प्रोडक् शन की पहली फिल्म लेकर आ रही हैं और अभी से इस बात की चर्चा शुरू हो चुकी है कि वह बुरी फिल्म का ही निर्माण करेंगी. चूंकि वह अभिनेत्री के रूप में सफल नहीं रही हैं. इसका यह कतई मतलब नहीं कि एक असफल अभिनेत्री सफल निर्माता नहीं हो सकती. बॉलीवुड भविष्यवाणियों से ग्रसित है. जबकि जो नयी अभिनेत्रियां फिल्मों के साथ निर्माण का क्षेत्र चुन रही हैं. उनका प्रोत्साहन बढ़ाया जाना चाहिए
शादी की मुहर
अभय देओल पहली बार अपनी वास्तविक गर्लफ्रेंड प्रीति के साथ आॅन स्क्रीन पर नजर आयेंगे. यह प्रीति की पहली फिल्म है. प्रीति को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके और अभय के बारे में किस तरह की बातें करते हैं. वे अभय के साथ लीव इन रिलेशनशीप में रह कर भी बेहद खुश हैं. उनका मानना है कि उन्हें किसी के साथ रहने के लिए किसी से मुहर लगवाने की जरूरत नहीं है. वे अकेली खुश हैं और बिंदास हैं. दरअसल, इन दिनों बॉलीवुड में कई जोड़ियां शादी की बजाय लीव इन में रहना पसंद कर रहे हंै. शुद्ध देसी रोमांस जैसी फिल्में इसी सोच का ही नतीज ा है और इसमें कोई हर्ज भी नहीं. खुद परिणीति चोपड़ा ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर उन्हें कभी मौका मिले तो वे ताउम्र बिना शादी के किसी लड़के के साथ जो उसका दोस्त हो, उसके साथ जिंदगी बिताना पसंद करेंगी बजाय इसके कि वह किसी अन्य ऐसे आदमी से शादी के बंधन में बंधे जो उसके लिए परेशानी का सबब बने या फिर किसी भी रूप में उसके करियर के लिए बांधा बने. करीना बिंदास अंदाज में बताती हैं कि वे शादी से पहले सैफ के साथ लीव इन में रहती थीं. सोहा अली खान और कुणाल खेमू भी लीव इन रिलेशनशीप में ही रहते हैं. हाल ही में इरफान खान ने भी बातों बातों में कहा कि शादी की मुहर किसी रिश्ते को न तो बांध सकती है और न ही रोक सकती है. सो, फिर शादी क्यों. दरअसल, वर्तमान में बॉलीवुड शादी और तलाक जैसे रिश्तों को लेकर अभिनेता उतने गंभीर नहीं, जितने आम लोग हैं. वे रिश्तों में एक दूसरे का साथ चाहते हैं न कि बंधन और यह हकीकत है कि उन्हें अगर कहीं से भी इस बात की भनक लगती है कि रिश्ते उनके लिए परेशानी का सबब बनेंगे वे फौरन उन रिश्तों से किनारा कर लेते हैं, सुजैन और रितिक का अलग होना इस बात का प्रमाण है.
फिल्में और व्यवसायी
कुछ दिनों पहले अनुराग कश्यप ने इस बात का विरोध किया है कि फिल्मों में एंटी स्मोकिंग डिस्क्लेमर की जरूरत नहीं. अनुराग कश्यप ने बांबे हाइ कोर्ट में इसे लेकर केस भी दर्ज किया, जिसमें उन्होंने साफतौर पर कहा कि वे इस बात के लिए कतई तैयार नहीं कि फिल्म में हर सीन में वह सिगरेट इज इनजुरियस टू हेल्थ का टैगलाइन लगायें. इसे लेकर बहसबाजी चल ही रही थी कि एक और नयी खबर यह आ रही कि अब फिल्मों में जो भी अभिनेता मोटरबाइक पर स्टंट करते नजर आयेंगे. उन्हें अब हेलमेट पहन कर फिल्मों में नजर आना होगा. सीबीएफसी के नये मुख्य अधिकारी ने इस बात की घोषणा की है. चूंकि उनका मानना है कि युवा पीढ़ी के प्रति फिल्मकारों को भी अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए. दरअसल, फिल्मों की अपनी शैली होती है. यह सच है कि सिनेमा समाज का आईना है. लेकिन फिल्मों की अपनी शैली में अगर हर बार इस तरह की बाधाएं प्रस्तुत की जाती रही तो निश्चित तौर पर फिल्मकारों को परेशानियों से जूझना होगा. हां, अब लगभग हर फिल्म में स्टंट के सीन के पहले कई तरह के डिस्कलेमर दिखाये जाते हैं और वह उचित भी है. लेकिन जरूरत से ज्यादा दिखाई गयी सावधानियां और चेतावनी भी दरअसल, लोगों को और अधिक लोगों को उकासने के लिए काफी होते हैं. चूंकि यह बिल्कुल सामान्य सी बात है कि अगर किसी को गड्ढे में गिरने से बचाना है तो उन्हें एक बार गिरने दें. फिर वे खुद सचेत हो जायेंगे. अगर वाकई सीबीएफसी को भी यही महसूस होता है कि उन्हें
एक फैन ऐसी भी
सुधा कृष्णमूर्ति 365 दिनों में 365 फिल्में देखती हैं. मसलन हर दिन वह लगभग एक फिल्म जरूर देखती हैं. कम ही लोगों को यह जानकारी है कि सुधा और नारायण मूर्ति भी सुधा के फिल्मी शौक की वजह से ही मिले थे. उन्हें फिल्मों में इस कदर दिलचस्पी थी कि उन्होंने नारायण मूर्ति की भी फिल्मों के प्रति रुझान पैदा कर दिया था. वरना, नारायण मूर्ति फिल्मों के बिल्कुल शौकीन नहीं थे. दरअसल, व्यवसाय अपने आप में एक ऐसा नशा है, जिसके सामने किसी और नशे की जरूरत ही नहीं. शायद यही वजह है कि कई सफल और महान व्यवसायियों ने फिल्मों को हमेशा हीन रूप में देखा. खुद गांधीजी भी फिल्मों को बुरी चीज मानते थे. एक बार रतन टाटा और दिलीप कुमार एक ही विमान में सफर कर रहे थे. दिलीप कुमार ने रतन टाटा को देख कर हाथ मिलाया और कहा कि मैं दिलीप कुमार. रतन टाटा ने उनसे पूछा कि कौन दिलीप कुमार. इस बार से दिलीप कुमार बेहद आहत हुए. उन्हें इस बात से काफी तकलीफ हुई कि जिस दिलीप कुमार के पीछे पूरी दुनिया पागल है, रतन टाटा उन्हें नहीं जानते. इस बात से उन्हें काफी तकलीफ हुई थी और उन्हें कई बार इस बात का जिक्र फिल्मों में किया . दरअसल, दोष रतन टाटा का नहीं था. वे फिल्में चूंकि देखा ही नहीं करते हैं सो, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी. उस वक्त मीडिया इस कदर सक्रिय भी नहीं थी कि लोगों को इतनी जानकारी मिल जाये. अब तो दौर बदल चुका है. अब व्यापार ब्रांड का रूप ले चुका है और हर ब्रांड का चेहरा कोई न कोई सेलिब्रिटी है. मुकेश अंबानी और उनकी पत् नी नीता अंबानी की पार्टी में अब फिल्मी सितारों के बिना फीके हैं. हर व्यवसायी अब सेलिब्रिटिज के नजदीक रहने के बहाने ढूंढते हैं. लेकिन पहले फिल्मो को लेकर लोगों की सोच बिल्कुल अलग थी.
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