20110411

टेलीविजन की छोटी बहुएं


कितनी नाटी हो. छोटी हो कद में. कुछ करती क्यों नहीं कि थोड़ा कद बढ़े. कभी एक दौर था. जब लड़कियों को हमेशा अपने परिवार व जमाने से अपने छोटे कद के लिए ताने सुनने पड़ते थे. लेकिन टेलीवुड में पिछले कई सालों से लगातार मुख्य किरदारों में ऐसी अभिनेत्रियों को अवसर दिये जा रहे हैं, जिनका कद नहीं बल्कि उनका अभिनय महत्व रखता है. गौर करनेवाली बात यह भी है न सिर्फ कद बल्कि इतनी गंभीर भूमिकाएं निभानेवाली ये अदाकाराएं बहद कम उम्र की भी हैं.

उतरन की इच्छा और तपू आज हर घर की प्यारी है. लोग उनके अभिनय को इस कदर पसंद करते हैं कि वे उनके छोटे कद पर ध्यान भी नहीं देते. टीवी सेट पर गॉरजियस दिखनेवाली यह नायिकाओं को जब वास्तविक जिंदगी में करीब से देखो तो मन में यही प्रश्न आता है कि अरे इनका कद तो बेहद छोटा है. लेकिन कैमरे पर यह चीजें नजर ही नहीं आती. दरअसल, इन दिनों अगर आप गौर करें तो लगभग लीड किरदार निभानेवाली सभी नायिकाएं शॉट हाइटेड हैं. लेकिन मेकअप के कमाल व कैमरे के कमाल से हमें उनका वास्तविक कद नजर नहीं आता. एक बात गौर करनेवाली और भी है कि ये नायिकाएं न सिर्फ कद में बल्कि उम्र में भी बेहद छोटी हैं. लगभग अधिकतर नायिकाएं 19 वर्ष की हैं. यह पूछने पर कि वे क्यों कम उम्र में इस क्षेत्र में आना चाहती हैं. वे साफ कहती हैं कि अभिनय के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती. मौका मिलते ही बस एंट्री ले लेनी चाहिए.

पूजा गौर , मन की आवाज में लीड किरदार

पूजा गौर मन की आवाज प्रतिज्ञा में लीड किरदार निभा रही हैं. उम्र में वे बेहद छोटी हैं. वे फिलवक्त केवल 19साल की हैं. गुजरात के अहमदाबाद की रहनेवाली पूजा का कद मात्र 5फिट 1 इंच हैं. यह पूछने पर कि वे क्यों इस क्षेत्र में आयीं.और क्या कभी कम कद की वजह से उन्हें ताने नहीं सुनने पड़े. वे बताती हैं कि यह सच है कि लड़कियों में प्रायः कम कद होने की वजह से उन्हें बाते सुननी पड़ती हैं. मुझे भी मेरे दोस्त चिढ़ाया करते थे. कभी कभी पड़ोस के लोग भी. लेकिन जब मैं एक्ट्रेस बन गयी हूं. यह चीजें अब मामूली सी बात लगती है.

सांभवी, गिनी, छज्जे छज्जे का प्यार

सांभवी की उम्र 19 साल है. और वे सोनी टीवी के शो छज्जे छज्जे का प्यार में लीड किरदार निभा रही हैं. यह पूछने पर कि क्या कभी उन्हें छोटी उम्र होने के बावजूद कुछ ऐसे गंभीर किरदार निभाने में परेशानी नहीं होती. वे कहती हैं कि जब यह सोच लिया है कि इसी क्षेत्र में आना है तो अपनी सोच को भी तो मैच्योर करना होगा. रही जहां तक बात कद की तो मेरा परिवार काफी सहयोगी था. उसने मुझे कभी ताने नहीं दिये. कभी भी नहीं. सो, मुझे नहीं लगता कि अभिनय में कद कहीं से भी मैटर करता है. ऐसा होता तो फिर रानी मुखर्जी को भी काम नहीं मिलता न.

सारा खान

21 वर्षीय सारा खान खुद को बहुत मैच्योर मानती हैं और कहती हैं कि उन्हें तो कभी कद की वजह से कोई परेशानी नहीं हुई. मैं तो मिस मध्य प्रदेश का खिताब भी जीत चुकी हूं. हालांकि उनका परिवार भी मध्य वर्गीय था तो सभी पापा को कहते थे कि बेटी का न स्वास्थ्य ठीक है और न ही कद. कैसे ढूंढेंगे लड़का. लेकिन मैंने कभी उन बातों पर ध्यान ही नहीं दिया. सारा की लंबाई 5 फीट 1 इंच है.

पूजा जोशी

ये रिश्ता क्या कहलाता में अक्षरा की बेस्ट फ्रेंड और भाभी का किरदार निभानेवाली पूजा जोशी की लंबाई केवल 4 फिट है. लेकिन इसके बावजूद उनके सशक्त अभिनय के वजह से उन्हें हमेशा मौके मिलते रहे हैं.

श्रीति झा, रक्त संबंध

इमेजिन के शो रक्त संबंध व ज्योति में महत्वपूर्ण किरदार निभा चुकीं श्रीति 21 वर्ष की हैं और इनकी लंबाई भी 5 फिट 1 इंच है. लेकिन इसके बावजूद इन्होंने अब तक महत्वपूर्ण व गंभीर भूमिका कर अपनी पहचान बनायी है.

बहने

स्टार प्लस के शो बहने की सभी अभिनेत्रियां छोटे कद की हैं. लेकिन कैमरे के कमाल से उन्हें खूबसूरत और लंबी दिखाया जाता है.

इसके अलावा असल जिंदगी में पापड़ पोल की कोकिला अमि त्रिवेद्वी, सजन रे झूठ मत बोलो की नायिकाएं, सना, छोटी बहू की रुबीना मल्लिक, सुप्रिया, रतन राजपूत भी छोटे कद व कम उम्र की नायिकाएं हैं.

मां भी तू सखी भी तू


हिंदी सिनेमा जगत में एक दौर ऐसा भी था जब अभिनेत्रियों के लिए न उम्र की सीमा मायने रखती थी और न ही अपनी उम्र से अधिक किरदार करने से उन्हें कोई गुरेज था. चूंकि वह वक्त था. जब अभिनेत्रियों के लिए किरदार मायने रखते थे. उस दौर में ऐसी ही कुछ अभिनेत्रियों पर एक नजर जिन्होंने लोकप्रिय होते हुए भी अपने सहयोगी कलाकारों की मां की भूमिका निभाने से भी गुरेज नहीं किया.

फिल्म नमक हलाल में वहीदा रहमान बेहद दुखी हैं क्योंकि उनके बेटे शशि कपूर उन्हें अच्छी मां नहीं समझते. उनके घर के नौकर के किरदार में अमिताभ बच्चन उन्हें समझाते हैं कि वे चिंता न करें उनके बेटे जल्द ही असलियत जान जायेंगे. अमिताभ बच्चन उन्हें मां कह कर संबोधित करते हैं. कुछ इसी तरह राखी ने भी कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन व अपने सहयोगी कलाकारों के साथ मां की भूमिका निभाई है. दरअसल, उस दौर में अभिनेत्री या अभिनेता पर अभिनय की धुन कुछ इस कदर सवार रहती थी कि उन्हें सिर्फ किरदार नजर आता था. उनमें वह ललक होती थी कि वे हर हाल में उस किरदार को निभायें . फिर भले ही वह किरदार उम्र से बड़ा क्यों न हो. ब्लैक एंड ह्वाइट से लेकर अब तक ऐसी कई फिल्में हमने देखी हैं जिसमें अभिनेत्रियां अपने सहयोगी कलाकार की मम्मी भी बनी हैं और अगली ही फिल्म में उनकी अभिनेत्री भी. मधुबाला, नरगिस, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगोर और राखी उनमें से एक हैं. और उनकी अभिनय के जादू का ही जलवा था जो दर्शकों ने उन्हें हर रूप में स्वीकार किया. फर्ज कीजिए अगर यही दौर अब का रहा होता तो निश्चित तौर पर यह संभव नहीं था. दरअसल, उस दौर में निदर्ेशक सर्वोपरि थे. वे जैसा सोचते थे जैसे किरदार की इच्छा रखते थे वे अपने अभिनेताओं से वैसी भूमिकाएं निभाने को कहते थे और वे निभाते भी थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता. हालांकि विद्या बालन इसमें अपवाद हैं. उन्होंने फिल्म पा में अमिताभ बच्चन की मां का किरदार निभाने का जोखिम उठाया. जो कम से कम आज के दौर में तो कोई अभिनेत्री नहीं ही उठाती हैं. चूंकि उन्हेंं यह लगता है कि उन पर मां बनने का ठप्पा लग जायेगा, जिससे उनके भविष्य पर ग्रहण लग सकता है.

नरगिस

फिल्म मदर इंडिया में नरगिस ने सुनील दत्त की मां की भूमिका निभाई है. जबकि वास्तविक जिंदगी में दोनों पति-पत्नी हैं. मदर इंडिया के किरदार के लिए जब नरगिस से पूछा गया था उस वक्त दोनों के प्यार के बीज बोये जा चुके थे. लेकिन दोनों ने इस सशक्त किरदार को निभाने के लिए रजामंदी दी. फिल्म में नरगिस ने बेहतरीन अदाकारी की, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले.

क्लाइमेस से दर्शकों के ये फासले....


एक दौर था, जब दर्शक थियेटर में सीट पर बैठ कर बस यह सोचा करते थे यार अब क्या होगा. फिल्म का इंटरवल लोगों के मन में और उत्सुकता पैदा करता था. लेकिन हाल की फिल्मों पर गौर करें तो लगभग सभी फिल्में शुरुआत से बेहद अच्छे अंदाज में शुरू होती हैं लेकिन धीरे-धीरे क्लाइमेक्स आते आते कहानी दम तोड़ देती है. थियेटर से बाहर निकलने के बाद दर्शक मायूस हो जाते हैं कि उन्होंने देखा क्या. शुरुआत से अंत तक दर्शकों की उत्सुकता को बांधे न रख पाने वाली कहानियों पर अनुप्रिया अनंत की रिपोर्ट

अकिरा कुरसावा जब निदर्ेशक के रूप में बहत लोकप्रिय हो गये थे. इसके बाद वे कई कॉलेज में फिल्म मेकिंग की ट्रेनिंग देने जाया करते थे. उन्होंने अपने भाषण के दौरान बच्चों को सिखाया था कि किसी भी फिल्म की कहानी तभी बहुत प्र्रभाव छोड़ पाती है. जब वह बेहतरीन हो. उसकी शुरुआत उसका मध्यांतर और क्लाइमेक्स यानी अंत तक कहानी दर्शकों को बांध कर रख सकती है. उनका प्रभाव अब तक भारतीय निदर्ेशकों पर रहा है. बर्गमैन जैसे निदर्ेशकों ने भी इस ग्रामर को हमेशा फॉलो किया है. लेकिन हाल की फिल्मों में देखें तो जिस कदर नये निदर्ेशक व नये प्रयोगों के साथ कहानियां आ रही हैं. वे अपनी फिल्मों के क्लाइमेक्स के साथ बहुत न्याय नहीं कर पाते. गौर करें तो राजकपूर की फिल्मों ज्यादातर आम लोगों पर या लव स्टोरी हुआ करती थी. लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद दिलचस्प होता था. दर्शक यह अनुमान नहीं लगा पाते थे कि आगे क्या होगा. हमेशा उनकी सोच के विपरीत होता था क्लाइमेक्स. कुछ ऐसा ही उस दौर की थ्रीलर फिल्मों के साथ भी होता था. अंत तक लोगों को पता नहीं चल पाता था कि आखिरकार खुनी कौन है या किस तरह यह होगा. अच्छे किरदार बाद में जाकर खलनायक के रूप में जब लोगों के सामने आते थे. तो सभी यही सोचते थे अरे यह खूनी है. यस खलनायक है. यही वजह थी लोगों की उत्सुकता बरकरार रहती थी. लेकिन हाल की थ्रीलर फिल्मों की बात करें तो सभी फिल्मों में थ्रील जैसा कुछ भी नहीं होता. न ही रोमांच होता है और न ही कोई थ्रील. न ही कोई सस्पेंस जैसी चीजें.

तनु वेड्स मनु

तनु वेड्स मनु जिम्मी शेरगील ही कंगना रनाउत का ब्वॉयफ्रेंड होगा. यह अनुमान उस वक्त ही लोगों ने लगा लिया था जिस वक्त जिम्मी शेरगिल की दोबारा ट्रेन में एंट्री होती है. फिल्म वही से कमडोर पड़ जाती है और लोगों की रुचि घट जाती है. सभी ने इस फिल्म को अंतराल से पहले बेहद पसंद किया. लेकिन बाद में फिल्म कमजोर तो हुई ही. अंत भी बहुत जोरदार या प्रभाव छोड़नेवाला नहीं हुआ. नतीजन दर्शकों ने माना कि यह फिल्म अच्छी तो है लेकिन अंत कुछ खास नहीं रहा.

सात खून माफ

सात खून माफ में लगातार यह दिखाया गया है सुजैना यानी प्रियंका चोपड़ा बहुत क्रांतिकारी स्वभाव की है. वह अपने रास्ते के रोड़े को हटाना जानती थी. रास्ता बदलना उसे नहीं आता था. लकिन अंत में उसने अपनेआप को भगवान को समर्पित कर दिया. तो यह बेहद अटपटी सी समाप्ति हुई.

अज्ञात

फिल्म अज्ञात में लगातार अंत में नायिका को जंगल में रास्ता नहीं मिलता है. अचानक नायिका का पैरा रुक जाता है. और नीचे पानी है. और फिल्म अंत हो जाता है. यहां भी दर्शक रोमांचित होने की बजाय बोर हो जाते हैं.

ये फासले

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ये फासले में महाजार रेडी के आने के साथ ही दर्शक इस बात का अनुमान लगा लेते हैं कि फिल्म में वही खलनायक हैं. फिल्म लगातार खींची जाती है. लेकिन अंततः खलनायक बिल्कुल बेतरतीब तरीके से लोगों के सामने आता है. कहानी का कमजोर पहलू यही है.

कौन

फिल्म कौन नायिका खुद लोगों से डरती रहती हैं. और अंत में वह खुद मर्डरर निकलती हैं. दर्शक फिल्म की कहानी के बीच में ही इस बात का अनुमान लगा चुके थे कि फिल्म में उर्मिला ही खूनी हैं.

रावण

फिल्म रावण की कहानी जितनी कमजोर थी उतना ही उसका क्लाइमेक्स भी. वीरा मर जाता है. और फिल्म वही खत्म हो जाती है. फिल्म में दर्शकों को यही महसूस होता है कि उनके साथ कोई मजाक किया गया है.

अच्छी क्लाइमेक्सवाली फिल्में

गौर करें तो ऐसी भी कई फिल्में रही हैं जिनके क्लाइमेक्स शानदार रहे हैं

ज्वेल थीफ

फिल्म ज्वेल थीफ में लोगों को बहुत बाद में यह जानकारी मिलती है कि दरअसल अशोक कुमार खलनायक हैं.

जानी दुश्मन

गांव में हर दुल्हन का खून हो रहा है. लेकिन फिल्म के अंत में लोगों को यह जानकारी मिलती है कि दरअसल संजीव कुमार ही वह खून करते थे.

गुमनाम

फिल्म गुमनाम के अंत में लोगों को पता चलता है कि नायिका नहीं बल्कि नायक का दोस्त खलनायक है.

दबंग

फिल्म दबंग में अंत में लोगों को पता चलता है कि सोनू सुद ने सलमान खान की मां का खून किया था.

रेस

फिल्म रेस में बार-बार कट्रीना, सैफ, बिपाशा और अक्षय खन्ना एक दूसरे से प्यार का नाटक करते हैं. बाद में लोगों को पता चलता है कि सैफ व बिपाशा एक साथ हैं.

फ्लॉप हैं पर हिट हैं



बॉलीवुड की बात ही निराली है. यहां जो फ्लॉप हैं. वह भी हिट हैं और जो हिट हैं वह भी फ्लॉप हैं. अगर ्ाप गौर करें, तो बॉलीवुड के वे तमाम नामचीन हस्तियां अपनी लगातार फ्लॉप फिल्में देने के बावजूद हिट ह

अक्षय कुमार की फिल्म तीस मार खां में जब दर्शकों ने उनकी एक्टिंग देखी तो उन्हें साफ तौर पर अक्षय को एक अभिनेता के रूप में नकार दिया. खबर आने लगी कि अब उनका करियर ढलाव पर है. तभी खबर आती है कि उनके पास अब भी सबसे ज्यादा फिल्में हैं. दरअसल, बॉलीवुड में उन अभिनेताओं की भी तूती बोलती है. जो फ्लॉप हैं. एक के बाद एक फिल्में लगातार बॉक्स ऑफिस पर पिटती जायें लेकिन उनके पास फिल्मों के ऑफर कम नहीं होते,वे सालोंभर काम में व्यस्त रहते हैं और उनके पास अन्य कामों के लिए वक्त नहीं होता. गौर करें तो हाल की फिल्मों में वे सारे बड़े नामों पर फिल्मों को फ्लॉप कराने का कलंक लग चुका है. इसके बावजूद उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ा, चूंकि उनके पास उनकी फेहरिस्त में अगले चार साल के लिए फिल्में आ चुकी हैं. तो ऐसे में वाकई यह बात मायने रखती है कि किसी अभिनेता या अभिनेत्री के लिए क्या वाकई फिल्मों की सफलता होना अहमियत नहीं रखा. अहमियत सिर्फ उनकी फिल्मों में उपस्थिति मात्र है. अक्सर खबरें मिलती रहती हैं कि बॉलीवुड निर्माताओं के आधार पर फिल्में तय करता है. तो फिर क्या वजह है कि नायक-नायिकाओं की असफलताओं के बावजूद घूम फिर कर सारी फिल्मों में वही चेहरे नजर आते हैं. गौर करें तो कुछेक ही निदर्ेशक हैं जो नये चेहरों के साथ प्रयोग करना चाहते हैं. इनमें दिबाकर बनर्जी, अनुराग कश्यप ही प्रमुख हैं. इन्हें चोड़ दें तो अनीस बज्मी जैसे निदर्ेशक उन निदर्ेशकों में से हैं जो लगातार पुराने चेहरों को ही दोहराते रहते हैं.

सोनम कपूर

अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत सांवरिया से शुरू किया था. वह फिल्म खास कमाल नहीं दिखाया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली 6 में अभिनय किया. यह फिल्म भी फ्लॉप के खाते में गयी. इसके बाद आयशा भी फ्लॉप रही. इसके बाद वे आइ हेट लव स्टोरी में नजर आयीं. यह एक मात्र फिल्म रही जिसे सफलता मिली. लेकिन किसी ने भी सोनम के अभिनय की सराहना नहीं की. सबने यही कहा कि अभी उनके अभिनय में बहुत बचपना है. उसमें सुधार की काफी गुंजाइश है. इसके बाद फिल्म थैंक्यू में वे नजर आयी हैं. जिसमें उनके अभिनय के लिए खास स्पेस ही नहीं छोड़ा गया है. लेकिन इसके बावजूद उनके पास आनेवाले समय में कई फिल्में हैं. मौसम और प्लेयर्स उनकी आनेवाली फिल्मों में प्रमुख हैं.

अभिषेक बच्चन

अमिताभ बच्चन के सुपुत्र अभिषेक बच्चन ने रिफ्यूजी से अपने करियर की शुरुआत की थी. लेकिन फिल्म को खास सफलता नहीं मिली. उसके बाद उन्होंने लगभग जितनी भी फिल्मों में काम किया है. कम ही फिल्मों को सफलता मिली है. गौर करें तो अभिषेक बच्चन के फिल्मी करियर के 11 साल पूरे हो चुके हैं और उन्होंने अब तक सिर्फ तीन से चार ही फिल्में हिट दी हैं. इनमें गुरु, पा, धूम सीरिज, दोस्ताना प्रमुख हैं. गौरतलब हैं कि इन फिल्मों की सफलता के पीछे का श्रेय पूरी तरह से अभिषेक को नहीं दिया जा सकता. सिर्फ गुरु को छोड़ दें तो शेष फिल्मों में वे कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाये हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म गेम भी फ्लॉप हो चुकी है. रावण बुरी तरह पिटी. और शुरुआती दौर की फिल्में भी फ्लॉप होती रही हैं. इन सबके बावजूद उनके पास फिल्मों की कोई कमी नहीं है और उन्हें इसका अच्छा मेहनताना भी मिल रहा है. आनेवाली फिल्मों में दम मारो दम, प्लेयर्स, बोल बच्चन, दोस्ताना प्रमुख हैं.

अक्षय कुमार

अक्षय कुमार भी फ्लॉप फिल्मों की फेहरिस्त में सबसे आगे हैं. लेकिन आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि अक्षय कुमार के पास शाहरुख, सलमान और आमिर से भी ज्यादा फिल्में हैं. उन्होंने अब तक कई फिल्में फ्लॉप दी हैं. हाल ही में तीस मार खां से उन्हें सबसे बड़ा झटका लगा था. फिर पटियाला हाउस भी खास कमाल नहीं कर पायी. थैंक्यू रिलीज हो चुकी है और आनेवाले समय में रे जोकर और देसी ब्वॉयज में नजर आयेंगे.

दीपिका पादुकोण

दीपिका पादुकोण भले ही बी टाउन की की पसंदीदा नायिका हों और दम मारो दम के गाने से लोगों के सामने उनकी लोकप्रियता बढ़ गयी हों. लेकिन उनकी फिल्में भी बाक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पायी हैं. गौर करें तो ओम शांति ओम के बाद, लव आजकल, बचना ऐ हसीनो और हाउसफुल के अलावा उनकी सारी फिल्में पिट चुकी हैं. इसके बावजूद अगले चार साल तक उनके पास किसी भी निदर्ेशक को डेट्स देने के लिए नहीं हैं. उन्होंने फिल्म केले हम जी जान से, ब्रेक के बाद में भी अभिनय किया. लेकिन सफल नहीं हो पायीं.

रितेश देशमुख

रितेश देशमुख अब तक अपने दम पर किसी भी फिल्म को हिट नहीं करा पाये हैं. लेकिन इसके बावजूद उन्हें फिल्में मिल रही हैं. तुझे मेरी कसम से शुरुआत करनेवाले रितेश ने अब तक अपने दम पर कभी अभिनय नहीं किया.वे हास्य फिल्मों में ही नजर आये हैं. लेकिन फिर भी वे सालोंभर फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त रहते हैं.

बड़े नामों की बात करें तो हाल में प्रियंका चोपड़ा, रनबीर कपूर की फिल्में भी खास कमाल नहीं कर पायी हैं. लेकिन फिर भी उनके पास फिल्मों की कमी नहीं. इमरान खान ने अब तक केवल दो जाने तू या जाने और आइ हेट लव स्टोरी के रूप में ही दो हिट फिल्में दी हैं. लेकिन इसके बावजूद वे कई फिल्मों में नजर आ रहे हैं. रितिक रोशन ने भी हाल में दो फ्लॉप फिल्में दी हैं. लेकिन उनमें अभिनय की पूरी क्षमता नजर आती है. ऐश्वर्य ने भी पिछले साल दो फ्लॉप फिल्में दी हैं.

फिल्मों के लव गुरुओं को थैंक्यू


बॉलीवुड में इन दिनों कॉमेडी फिल्मों के विषय में उन किरदारों को अधिक तवज्जो दी जा रही है, जिन्होंने फिल्मों के माध्यम से लव गुरु के रूप में या फिर पति-पत्नी के बीच आयी गलतफहमियों को दूर करने का जिम्मा उठा रखा है.

फिल्म थैंक्यू में अक्षय कुमार ने एक ऐसा किरदार निभाया है, जो लोगों के एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर से संबंधित समस्याओं को सुलझाता है. इस फिल्म में वे तीन जोड़ियों की निजी जिंदगी को सुलझाते नजर आयेंगे. दरअसल, पिछले कई वर्षों से कॉमेडी फिल्में बना रहे निदर्ेशकों के लिए यह विषय पसंदीदा विषय बन चुका है. चूंकि लगभग ऐसे किरदारोंवाली हर फिल्म को सफलता मिलती है. इसलिए वे बार-बार इस किरदार को दोहरा रहे हैं. इसकी एक वजह यह भी रही है कि अक्सर ऐसा होता है जब दो पति-पत्नी के रिश्तों में दरार या दूरियां आती हैं. तब कोई तीसरा ही उन रिश्तों को फिर से एक दूसरे के करीब लाता है. खासतौर से महानगरों में यह बेहद लोकप्रिय फंडा है. यही वजह है कि इन दिनों कई एजेंसियों ने इस तरह के लव गुरु या एक्स्ट्रा मेरेटियल अफेयर को सुधारनेवाले लोगों को नियुक्त करना शुरू कर दिया है. गौर करें तो पुराने दौर में भी निदर्ेशकों ने ऐसे किरदारों को तवज्जो दी थी. सुपरहिट फिल्म पड़ोसन इसका बेहतरीन उदाहरण है. फिल्म में किशोर कुमार ने सुनील दत्त और शायरा बानो के बीच प्यार का बीज बोने का काम किया था.

इश्क विश्क( यश टांक)

फिल्म इश्क विश्क में पहली बार इस तरह के किरदार निखर कर सामने आये थे. अमृता राव व शाहिद कपूर अभिनीत इस फिल्म में जब नायक व नायिका के बीच गलतफहमियां आ जाती हैं तो यश टांक लव गुरु बन कर उन दूरियों को मिटाने का काम करते हैं.

बीवी नंबर 1 ( अनिल कपूर)

सलमान खान व करिश्मा कपूर अभिनीत इस फिल्म में सलमान जब करिश्मा यानी अपनी बीवी से प्यार करने की बजाय किसी और से इश्क फरमाना शुरू करते हैं और करिश्मा को इस बात की जानकारी मिलती है तो वे अनिल कपूर का सहारा लेते हैं. अनिल कपूर इसमें लव गुरु का किरदार निभाते हैं. उनकी मदद से सलमान वापस अपनी बीवी के पास आ जाते हैं.

मस्ती( अजय देवगन-लारा दत्ता)

तीन दोस्तों की कहानी पर आधारित फिल्म मस्ती में रितेश देशमुख, आफताब शिवदसानी और विवेक ऑबरॉय अपनी अपनी पत्नियों से पीछा छुड़ाने के लिए किसी दूसरे माध्यम का सहारा लेते हैं. ऐसे में वे अपनी अपनी पत्नियों से झूठ बोल कर उन्हें धोखा देने की कोशिश करते हैं. लेकिन ऐन वक्त पर उनकी पत्नियां लव गुरु अजय देवगन और लारा दत्ता का सहारा लेते हैं. दोनों की मदद से तीनों पतियों को अपनी कमियों का एहसास होता है. और वे फिर एक हो जाते हैं.

पार्टनर( सलमान खान)

फिल्म पार्टनर में तो सलमान खान ने पूरी तरह से लव गुरु का ही किरदार निभाया है. लव गुरु ही सलमान खान का व्यवसाय भी है. इस फिल्म में वे अपने दोस्त गोविंदा को उसकी प्रेमिका से मिलवाने में उसे बेहतरीन टिप्स देता है और फिर वे एक हो जाते हैं.

थैंक्यू( अक्षय कुमार)

फिल्म थैंक्यू की कहानी बहुत हद तक फिल्म मस्ती से मिलती जुलती है. इसमें भी तीन धोखेबाज पतियों की कहानी है और फिल्म थैंक्यू में भी तीन किरदारों को दर्शाया गया है. फिल्म में सुनील शेट्ठी, सोनम कपूर, बॉबी देओल, अक्षय कुमार, इरफान खान व रिम्मी सेन ने मुख्य भूमिका निभाई है. फिल्म में अक्षय कुमार तीनों के बीच की गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश करते हैं.

आमदनी अठ्ठनी खर्चा रुपया( गोविंदा-जूही)

फिल्म आमदनी अठ्ठनी खर्चा रुपया में भी तीन पति-पत्नी की जोड़ियों पर कहानी आधारित है. सभी पति अपनी पत्नियों पर जुल्म ढ़ाते हैं. ऐसेमें जूही और गोविंदा उनके मोहल्ले में आते हैं और उनकी जीवन में आये मनमुटाव को दूर करने की कोशिश करते हैं.

हद कर दी आपने( रानी-गोविंदा)

फिल्म हद कर दी आपने में रानी और गोविंदा अपने अपने बेस्ट फ्रेंड में आयी दूरियों को मिटाने की कोशिश करते हैं और फिर उन दोनों में खुद ही प्यार हो जाता है.

नायकों के पिता ने भी निभाई है लव गुरु की भूमिका

हिंदी सिनेमा में ऐसी भी कई फिल्में रही हैं, जिनमें नायक व नायिकाओं के पिताजी या उनके किसी सगे-संबंधी ने दो प्रेमी युगल को मिलाने की कोशिश की है. इनमें कादर खान का नाम सबसे पहले आता है. उन्होंने फिल्म हीरो नंबर 1 व कई फिल्मों में गोविंदा के लिए लव गुरु का काम किया है. फिल्म दिलवाले दुल्हनिया में अनुपम खेर शाहरुख के लव गुरु बने हैं . अनुपम खेर ही फिल्म प्यार इं्पोसिबल में उदय चोपड़ा के लव गुरु बने हैं.

20110325

काशी का हूबहू अस्सी मुंबई में


किसी भी फिल्म के लिए उसके लोकेशन व सेट का वास्तविक नजर आना बहुत आवश्यक, खासतौर से तब अगर फिल्म किसी ऐतिहासिक स्थान पर बनायी जा रही हो. ऐसे में अगर हम सिर्फ यह मान कर बैठें कि फिल्म की सफलता सिर्फ निदर्ेशक या कलाकार के हाथ में होती है तो यह हमारी गलत अवधारणा होगी. चूंकि फिल्म की सफलता का श्रेय उससे जुड़े परदे के पीछे के लोगों को भी जाता है. तो इस बार परदे के पीछे में हम आपको सेट डिजाइनर भूपेन सिंह से रूबरू कराते हैं. फिलवक्त व फिल्म मोहल्ला अस्सी के निर्माण में जुड़े हैं.

दोपहर 1 बजे हम अपने फोटोग्राफर के साथ गोरेगांव फिल्म सिटी के मंदिर पर उपस्थित मोहल्ला अस्सी के सेट पर पहुंचे. वहां फिल्म के निदर्ेशक डॉ चंद्र प्रकाश द्विवेदी से मुलाकात होनी थी. हमें सेक्योरिटी गार्ड ने अंदर का रास्ता दिखाया और हमारी मुलाकात डॉ चंद्र प्रकाश से हो गयी. बातचीत शुरू करने से पहले ही डॉ साहब ने कहा कि मुझसे बात करने से पहले इसके सेट डिजाइनर से बात करें. फिर हमें पूरे सेट की तफ्तीश की. वहां एक दृश्य की शूटिंग चल रही है. पूरे सेट को देख कर कहीं से नहीं लग रहा था कि हम मुंबई की किसी फिल्म सिटी में हैं. यहां तक कि काशी के पप्पू की दुकान का हूबहू प्रारूप हमारे सामने था. अब तक मन में जिज्ञासा हुई कि इसके सेट डिजाइनर से बात की जाये. नंदिता ने उनसे मिलवाया. जी भूपेन सिंह हैं. सेट डिजाइनर. भूपेन शानदार काम किया है आपने. वे पहले थोड़ा झिझके. बातचीत अखबार के लिए क्या कहूंगा. लिख दो जो देख रहे हो आपलोग. फिर उन्हें थोड़ी देर में बातचीत के लिए मनाया और वह तैयार हुए. भूपेन ने बताया कि उन्होंने फिल्म पिंजर में भी डॉ द्विवेदी के साथ काम किया है. उस वक्त से दोनों साथ हैं. मोहल्ला अस्सी अलग तरह की फिल्म है. इसमें माहौल को पूरा बनारसी लुक देना था. सो, बिल्कुल मेहनत तो ज्यादा थी ही. खासतौर से पप्पू की दुकान का माहौल तैयार करना था. हम बनारस गये. वहंा से तसवीरें लेकर आये. फिर यहां तैयार किया सबकुछ. आप गौर करेंगे तो देखेंगे कि पप्पू की वह दुकान में जिस तरह से राख लगी है. यहां भी लगी है. हमने वही टूटा फैन, केतली जैसी चीजें इस्तेमाल की है, वह भी वही की हैं. भूपेन सिंह ने इससे पहले अन्य और भी दो फिल्मों में काम किया है. लेकिन वह पिंजर और मोहल्ला अस्सी को अपना बड़ा ब्रेक मानते हैंं. वे मानते हैं कि अगर कोई सेट डिजाइनिंग की क्षेत्र में आता है, तो उसे धैर्य रखना होगा और चीजों को बहुत बारीकी से देखने की कला में माहिर होना होगा,

टेलीवुड के कलाकार बने बॉलीवुड में फिल्मकार


ेटेलीवुड और बॉलीवुड का रिश्ता पुराना है. ऐसे कई कलाकार हैं, जो लगातार छोटे परदे के साथ-साथ बड़े परदे पर भी अभिनय करते हैं. चूंकि टेलीवुड के अधिकतर अभिनेता व अभिनेत्री की ख्वाहिश यही होती है कि वे फिल्मों के परदे पर नजर आये. लेकिन ऐसे भी कुछ टेलीवुड अभिनेता हैं, जिन्होंने छोटे परदे पर अभिनय का हुनर बिखेरा. लेकिन बड़े परदे को अभिनय के लिए नहीं निदर्ेशन के लिए चुना. कुछ ऐसे ही टेलीवुड अभिनेता, जिन्होंने हिंदी सिनेमा के निदर्ेशन क्षेत्र में कदम रखा, उनके निदर्ेशन कार्य पर अनुप्रिया अनंत की रिपोर्ट.

बस में बैठे हैं नाना पाटेकर, हाथों में गुब्बारे लिये. संग बैठे सारे यात्रियों को हंस कर मुस्कुराकर जिंदगी में खुश होने का पाठ पढ़ा रहे हैं. कुछ देर बार वह एक कब्र पर पहुंचते हैं....और फिर की कहानी आगे बढ़ती है. गुब्बारे नामक इस फिल्म का निदर्ेशन रोहित रॉय ने किया था. जिन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे परदे के स्वाभिमान धारावाहिक से की थी. गुब्बारे एक बेहद ही छोटी ही लेकिन अत्यधिक भावुक कहानी थी. फिल्म देखने के बाद वाकई इस बात का अनुमान लगा पाना मुश्किल था कि फिल्म का निर्माण एक छोटे परदे के अभिनेता ने किया है. दरअसल, छोटे परदे की कई प्रतिभाओं ने बड़े परदे को अपना निदर्ेशन का भी क्षेत्र माना और गौर करनेवाली बात यह है कि इन सभी छोटे परदे के अभिनेताओं ने बड़े परदे पर सराहनीय काम किया है. लेकिन इन सभी को उस मंजिल तक पहुंचने में एक लंबा सफर लगा है. जिसे वह कभी भूल नहीं सकते. ऐसे अभिनेताओं में रोहित रॉय के साथ साथ आमिर वसिर, कबीर सदानंद, परमीत शेट्ठी और जल्द ही रिलीज होनेवाली फिल्म फालतू का निदर्ेशन कर रहे रेमो का नाम भी आता है.

पंकज कपूर( मौसम)

शुरुआत पंकज कपूर से. पंकज छोटे परदे के साथ-साथ बड़े परदे पर भी हमेशा अभिनय में सक्रिय रहे. उन्होंने लगभग 74 प्ले व धारावाहिकों का निर्माण व निदर्ेशन किया. अभिनय किया. मोहनदास एलऐलबी, वाह भाई वाह, साहबजी बीवीजी, गुलामजी जैसे कई शोज का निर्माण करने के बाद उन्होंने 1982 में पहली फिल्म में मौका मिला. गौरतलब है कि इसके बाद उन्होंने दोनों माध्यमों में अपनी सक्रिय भूमिका निभायी. उन्होंने छोटे परदे पर करमचंद, ऑफिस-ऑफिस व जबान संभाल के जैसे हिट शोज दिये है. और इसी वर्ष वे अपने निदर्ेशन करियर की शुरुआत कर रहे हैं फिल्म मौसम से. फिल्म मौसम में उन्होंने अपने बेटे शाहिद कपूर को मौका दिया है. बकौल पंकज कपूर मैंने निदर्ेशन का फैसला इतने सालों बाद इसलिए लिया क्योंकि मुझे लगा कि अभी मुझे और भी बहुत पु कुछ सीखना था. अब लगा कि कर सकता हूं तो निदर्ेशन शुरू किया.

परमीत शेट्ठी( बदमाश कंपनी)

परमीत शेट्ठी ने जब आदित्य चोपड़ा से अपनी फिल्म बदमाश कंपनी के लिए बात की तो आदित्य ने पहले कई बार ना कहा. लेकिन परमीत ने लगातार कोशिश जारी रखा. अंततः आदित्य ने पूरी स्क्रिप्ट सुनी और परमीत को निदर्ेशन का मौका दिया. लेकिन वह स्क्रिप्ट लेकर जब शाहिद के पास गये और शाहिद ने निदर्ेशन का नाम पूछा तो शाहिद ने यही जवाब दिया कि यार किसे ले रहे हो...आदित्य ने विश्वास जताया और फिर बदमाश कंपनी का निर्माण हुआ. फिल्म को सराहना मिली और खासतौर से स्क्रिप्ट की बेहद तारीफ की गयी. परमीत ने भी अपनी शुरुआत छोटे परदे से की. उन्होंने दिलवाले दुल्हनिया में छोटा सा किरदार भी निभाया था और वे शुरुआती दौर से ही निदर्ेशन के क्षेत्र में आना चाहते थे. परमीत ने अब तक जस्सी जैसी कोई नहीं, मायका, नच बलिये जैसे शो में काम किया है.

कबीर सदानंद( तुम मिलो तो सही)

चैंलेंज व फैमिली नंबर वन जैसे धारावाहिक करने के बाद से ही कबीर ने तय कर लिया था कि वह निदर्ेशन के ही क्षेत्र में जायेंगे. उन्होेंने शुरुआती दौर से ही कई निदर्ेशकों के साथ काम किया. बारीकियां सीखीं. और फिर निदर्ेशन के क्षेत्र में कदम रखा. निदर्ेशन के रूप में पॉप खाओ मस्त हो जाओ में पहली शुरुआत की. लेकिन उन्हें खास पहचान मिली तुम मिलो तो सही. इस फिल्म में उन्हें नाना पाटेकर, डिंपल कपाड़िया जैसे कलाकारों ने अभिनय किया. फिल्म को दर्शकों ने बेहद पसंद किया. जल्द ही सदानंद रिलायंस के लिए फिल्म निर्माण करेंगे.

रोहित रॉय(गुब्बारे)

रोहित राय ने छोटे परदे पर स्थापित कलाकार के रूप में पहचान बनायी. रोहित रॉय ने स्वाभिमान से शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने देश में निकला होगा चांद जैसे शो में अभिनय किया. िफर नच बलिये में उन्हें मौका मिला और इसके साथ-साथ एंकरिंग का सिलसिला भी जारी रखा. रोहित रॉय ने दस कहानियां नामक फिल्म में गुब्बारे नामक फिल्म का निर्माण किया. और वे जल्द ही बड़े बजट की फिल्म बनाने जा रहे हैं.

रेमो डिसूजा ( फालतू)

रेमो ने कुछ बांग्ला फिल्में बनायी हैं. इसके बाद उन्होंने छोटे परदे के डांस इंडिया डांस के शो के कोरियोग्राफर के रूप में शुरुआत की, फिर उन्हें झलक दिखला जा में बतौर जज की भूमिका निभाने का मौका मिला. जल्द ही उनकी फिल्म फालतू रिलीज होनेवाली है. रेमो बताते हैं कि वे हमेशा से कोरियोग्राफर और निदर्ेशन के क्षेत्र में जाना चाहते हैं. सो, उन्होंने हमेशा इसके लिए प्रयास जारी रखा और अब उनकी फिल्म फालतू रिलीज होनेवाली है.

आमिर बसीर( हाउद)

आमिर बसीर ने अपनी शुरुआत छोटे परदे से की थी. उन्होंने चैलेंज जैसे शो में अभिनय किया.